रविवार 5 नवंबर, 2023



विषयआदम और पतित आदमी

SubjectAdam And Fallen Man

वर्ण पाठ: स्वर्ण पाठ: अय्यूब 15:7

"क्या पहिला मनुष्य तू ही उत्पन्न हुआ? क्या तेरी उत्पत्ति पहाड़ों से भी पहिले हुई?"



Golden Text: Job 15 : 7

Art thou the first man that was born? or wast thou made before the hills?




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यूहन्ना 1: 1, 3, 13 • उत्पत्ति 2: 6, 7, 21, 22 • उत्पत्ति 4: 1


1     आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।

3     सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।

13     वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

6     तौभी कोहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी

7     और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया।

21     तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भारी नीन्द में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उसने उसकी एक पसली निकाल कर उसकी सन्ती मांस भर दिया।

22     और यहोवा परमेश्वर ने उस पसली को जो उसने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया।

1     जब आदम अपनी पत्नी हव्वा के पास गया तब उसने गर्भवती हो कर कैन को जन्म दिया और कहा, मैं ने यहोवा की सहायता से एक पुरूष पाया है।

Responsive Reading: John 1 : 1, 3, 13   •   Genesis 2 : 6, 7, 21, 22   •   Genesis 4 : 1

1.     In the beginning was the Word, and the Word was with God, and the Word was God.

3.     All things were made by him; and without him was not any thing made that was made.

13.     Which were born, not of blood, nor of the will of the flesh, nor of the will of man, but of God.

6.     But there went up a mist from the earth, and watered the whole face of the ground.

7.     And the Lord God formed man of the dust of the ground, and breathed into his nostrils the breath of life; and man became a living soul.

21.     And the Lord God caused a deep sleep to fall upon Adam, and he slept: and he took one of his ribs, and closed up the flesh instead thereof;

22.     And the rib, which the Lord God had taken from man, made he a woman, and brought her unto the man.

1.     And Adam knew Eve his wife; and she conceived, and bare Cain, and said, I have gotten a man from the Lord.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. यशायाह 2: 22

22     सो तुम मनुष्य से परे रहो जिसकी श्वास उसके नथनों में है, क्योंकि उसका मूल्य है ही क्या?

1. Isaiah 2 : 22

22     Cease ye from man, whose breath is in his nostrils: for wherein is he to be accounted of?

2. नीतिवचन 8: 22, 23, 25–30, 32 (से:)

22     यहोवा ने मुझे काम करने के आरम्भ में, वरन अपने प्राचीनकाल के कामों से भी पहिले उत्पन्न किया।

23     मैं सदा से वरन आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि के पहिले ही से ठहराई गई हूं।

25     जब पहाड़ वा पहाड़ियां स्थिर न की गई थीं,

26     जब यहोवा ने न तो पृथ्वी और न मैदान, न जगत की धूलि के परमाणु बनाए थे, इन से पहिले मैं उत्पन्न हुई।

27     जब उस ने अकाश को स्थिर किया, तब मैं वहां थी, जब उस ने गहिरे सागर के ऊपर आकाशमण्डल ठहराया,

28     जब उस ने आकाशमण्डल को ऊपर से स्थिर किया, और गहिरे सागर के सोते फूटने लगे,

29     जब उस ने समुद्र का सिवाना ठहराया, कि जल उसकी आज्ञा का उल्लंघन न कर सके, और जब वह पृथ्वी की नेव की डोरी लगाता था,

30     तब मैं कारीगर सी उसके पास थी; और प्रति दिन मैं उसकी प्रसन्नता थी, और हर समय उसके साम्हने आनन्दित रहती थी।

32     इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो; क्या ही धन्य हैं वे जो मेरे मार्ग को पकड़े रहते हैं।

2. Proverbs 8 : 22, 23, 25–30, 32 (to :)

22     The Lord possessed me in the beginning of his way, before his works of old.

23     I was set up from everlasting, from the beginning, or ever the earth was.

25     Before the mountains were settled, before the hills was I brought forth:

26     While as yet he had not made the earth, nor the fields, nor the highest part of the dust of the world.

27     When he prepared the heavens, I was there: when he set a compass upon the face of the depth:

28     When he established the clouds above: when he strengthened the fountains of the deep:

29     When he gave to the sea his decree, that the waters should not pass his commandment: when he appointed the foundations of the earth:

30     Then I was by him, as one brought up with him: and I was daily his delight, rejoicing always before him;

32     Now therefore hearken unto me, O ye children:

3. अय्यूब 14: 1, 6 (से 1st,)

1     मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है, वह थोड़े दिनों का और दुख से भरा रहता है।

6     इस कारण उस से अपना मुंह फेर ले।

3. Job 14 : 1, 6 (to 1st ,)

1     Man that is born of a woman is of few days, and full of trouble.

6     Turn from him,

4. 1 कुरिन्थियों 15: 22, 45, 47, 49

22     और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसा ही मसीह में सब जिलाए जाएंगे।

45     ऐसा ही लिखा भी है, कि प्रथम मनुष्य, अर्थात आदम, जीवित प्राणी बना और अन्तिम आदम, जीवनदायक आत्मा बना।

47     प्रथम मनुष्य धरती से अर्थात मिट्टी का था; दूसरा मनुष्य स्वर्गीय है।

49     और जैसे हम ने उसका रूप जो मिट्टी का था धारण किया वैसे ही उस स्वर्गीय का रूप भी धारण करेंगे॥

4. I Corinthians 15 : 22, 45, 47, 49

22     For as in Adam all die, even so in Christ shall all be made alive.

45     And so it is written, The first man Adam was made a living soul; the last Adam was made a quickening spirit.

47     The first man is of the earth, earthy: the second man is the Lord from heaven.

49     And as we have borne the image of the earthy, we shall also bear the image of the heavenly.

5. यूहन्ना 3: 1-7

1     फरीसियों में से नीकुदेमुस नाम एक मनुष्य था, जो यहूदियों का सरदार था।

2     उस ने रात को यीशु के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, हम जानते हैं, कि तू परमेश्वर की आरे से गुरू हो कर आया है; क्योंकि कोई इन चिन्हों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो, तो नहीं दिखा सकता।

3     यीशु ने उस को उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।

4     नीकुदेमुस ने उस से कहा, मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो क्योंकर जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दुसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?

5     यीशु ने उत्तर दिया, कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं; जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।

6     क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।

7     अचम्भा न कर, कि मैं ने तुझ से कहा; कि तुम्हें नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।

5. John 3 : 1-7

1     There was a man of the Pharisees, named Nicodemus, a ruler of the Jews:

2     The same came to Jesus by night, and said unto him, Rabbi, we know that thou art a teacher come from God: for no man can do these miracles that thou doest, except God be with him.

3     Jesus answered and said unto him, Verily, verily, I say unto thee, Except a man be born again, he cannot see the kingdom of God.

4     Nicodemus saith unto him, How can a man be born when he is old? can he enter the second time into his mother’s womb, and be born?

5     Jesus answered, Verily, verily, I say unto thee, Except a man be born of water and of the Spirit, he cannot enter into the kingdom of God.

6     That which is born of the flesh is flesh; and that which is born of the Spirit is spirit.

7     Marvel not that I said unto thee, Ye must be born again.

6. यूहन्ना 8: 2, 13 (से,), 25 (कौन), 38, 41 (तब), 42, 44, 45, 51

2     और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा।

13     फरीसियों ने उस से कहा।

25     तू कौन है यीशु ने उन से कहा, वही हूं जो प्रारम्भ से तुम से कहता आया हूं।

38     मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।

41     उन्होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे; हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर।

42     यीशु ने उन से कहा; यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा।

44     तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।

45     परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते।

51     मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्त काल तक मृत्यु को न देखेगा।

6. John 8 : 2, 13 (to ,), 25 (Who), 38, 41 (Then), 42, 44, 45, 51

2     And early in the morning he came again into the temple, and all the people came unto him; and he sat down, and taught them.

13     The Pharisees therefore said unto him,

25 Who art thou? And Jesus saith unto them, Even the same that I said unto you from the beginning.

38     I speak that which I have seen with my Father: and ye do that which ye have seen with your father.

41     Then said they to him, We be not born of fornication; we have one Father, even God.

42     Jesus said unto them, If God were your Father, ye would love me: for I proceeded forth and came from God; neither came I of myself, but he sent me.

44     Ye are of your father the devil, and the lusts of your father ye will do. He was a murderer from the beginning, and abode not in the truth, because there is no truth in him. When he speaketh a lie, he speaketh of his own: for he is a liar, and the father of it.

45     And because I tell you the truth, ye believe me not.

51     Verily, verily, I say unto you, If a man keep my saying, he shall never see death.

7. यूहन्ना 12: 37, 39 (से कहा), 40, 43

37     और उस ने उन के साम्हने इतने चिन्ह दिखाए, तौभी उन्होंने उस पर विश्वास न किया।

39     इस कारण वे विश्वास न कर सके, क्योंकि यशायाह ने फिर भी कहा।

40     कि उस ने उन की आंखें अन्धी, और उन का मन कठोर किया है; कहीं ऐसा न हो, कि आंखों से देखें, और मन से समझें, और फिरें, और मैं उन्हें चंगा करूं।

43     क्योंकि मनुष्यों की प्रशंसा उन को परमेश्वर की प्रशंसा से अधिक प्रिय लगती थी॥

7. John 12 : 37, 39 (to said), 40, 43

37     But though he had done so many miracles before them, yet they believed not on him:

39     Therefore they could not believe, because that Esaias said …

40 He hath blinded their eyes, and hardened their heart; that they should not see with their eyes, nor understand with their heart, and be converted, and I should heal them.

43     For they loved the praise of men more than the praise of God.

8. गलातियों 1: 1, 6, 10, 15, 16

1     पौलुस की, जो न मनुष्यों की ओर से, और न मनुष्य के द्वारा, वरन यीशु मसीह और परमेश्वर पिता के द्वारा, जिस ने उस को मरे हुओं में से जिलाया, प्रेरित है।

6     मुझे आश्चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे।

10     यदि मैं अब तक मनुष्यों को ही प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता॥

15     परन्तु परमेश्वर की, जिस ने मेरी माता के गर्भ ही से मुझे ठहराया और अपने अनुग्रह से बुला लिया।

16     जब इच्छा हुई, कि मुझ में अपने पुत्र को प्रगट करे कि मैं अन्यजातियों में उसका सुसमाचार सुनाऊं; तो न मैं ने मांस और लोहू से सलाह ली।

8. Galatians 1 : 1, 6, 10, 15, 16

1     Paul, an apostle, (not of men, neither by man, but by Jesus Christ, and God the Father, who raised him from the dead;)

6     I marvel that ye are so soon removed from him that called you into the grace of Christ unto another gospel:

10     For do I now persuade men, or God? or do I seek to please men? for if I yet pleased men, I should not be the servant of Christ.

15     But when it pleased God, who separated me from my mother’s womb, and called me by his grace,

16     To reveal his Son in me, that I might preach him among the heathen; immediately I conferred not with flesh and blood:

9. 1यूहन्ना 2: 1 (से 1st,), 13 (1st तुम) (से 1st.), 13 (3rd तुम), 16, 17, 20 (1st तुम), 24

1     हेमेरे बालकों।

13     ... जो आदि से है, तुम उसे जानते हो ... तुम पिता को जान गए हो।

16     क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है।

17     और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा॥

20     ... तुम्हारा तो उस पवित्र से अभिषेक हुआ है, और तुम सब कुछ जानते हो।

24     जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे।

9. I John 2 : 1 (to 1st ,), 13 (1st ye) (to 1st .), 13 (3rd ye), 16, 17, 20 (1st ye), 24

1     My little children,

13     …ye have known him that is from the beginning. … ye have known the Father.

16     For all that is in the world, the lust of the flesh, and the lust of the eyes, and the pride of life, is not of the Father, but is of the world.

17     And the world passeth away, and the lust thereof: but he that doeth the will of God abideth for ever.

20     …ye have an unction from the Holy One, and ye know all things.

24     Let that therefore abide in you, which ye have heard from the beginning. If that which ye have heard from the beginning shall remain in you, ye also shall continue in the Son, and in the Father.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 502: 24-27

अनंत की कोई शुरुआत नहीं है। इस शब्द की शुरुआत ही एकमात्र के संकेत के लिए की जाती है, - यानी, ब्रह्मांड सहित ईश्वर और मनुष्य की अनंत सत्यता और एकता।

1. 502 : 24-27

The infinite has no beginning. This word beginning is employed to signify the only, — that is, the eternal verity and unity of God and man, including the universe.

2. 288: 25 (यह)-26

… आध्यात्मिक वास्तविक मनुष्य का कोई जन्म नहीं होता, कोई भौतिक जीवन नहीं होता, और कोई मृत्यु नहीं होती।

2. 288 : 25 (the)-26

…the spiritual real man has no birth, no material life, and no death.

3. 258: 27-30

अनंत काल तक ईश्वर की सरकार के तहत, कभी पैदा नहीं हुआ और कभी नहीं मरना मनुष्य के लिए, उसकी उच्च संपत्ति से गिरना असंभव था।

3. 258 : 27-30

Never born and never dying, it were impossible for man, under the government of God in eternal Science, to fall from his high estate.

4. 223: 3-6, 8-9

जल्दी या बाद में हमें पता चलेगा कि मनुष्य की परिमित क्षमता के भ्रूण को इस भ्रम से मजबूर किया जाता है कि वह आत्मा के बजाय आत्मा के स्थान पर शरीर में रहता है।

यदि आत्मा सब कुछ है और हर जगह है, पदार्थ क्या और कहाँ है?

4. 223 : 3-6, 8-9

Sooner or later we shall learn that the fetters of man's finite capacity are forged by the illusion that he lives in body instead of in Soul, in matter instead of in Spirit.

If Spirit is all and is everywhere, what and where is matter?

5. 490: 28-30

नींद और सम्मोहन भौतिक इंद्रिय की पौराणिक प्रकृति की व्याख्या करते हैं। नींद भौतिक बोध को या तो विस्मृति, शून्यता, या भ्रम या स्वप्न के रूप में दर्शाती है।

5. 490 : 28-30

Sleep and mesmerism explain the mythical nature of material sense. Sleep shows material sense as either oblivion, nothingness, or an illusion or dream.

6. 491: 28-6

जब हम जागते हैं, तो हम पदार्थ के दुखों और सुखों का सपना देखते हैं। कौन कहेगा, भले ही वह क्रिश्चियन विज्ञान को नहीं समझता है, कि यह सपना - सपने देखने वाले के बजाय - नश्वर मनुष्य नहीं हो सकता है? तर्कसंगत रूप से अन्यथा कौन कह सकता है, जब सपना नश्वर मनुष्य को शरीर और विचार में बरकरार रखता है, हालांकि तथाकथित सपने देखने वाला बेहोश है? सही तर्क के लिए, विचार से पहले केवल एक तथ्य होना चाहिए, अर्थात् आध्यात्मिक अस्तित्व। वास्तव में, कोई अन्य अस्तित्व नहीं है क्योंकि जीवन को इसकी विषमता, मृत्यु दर से एकजुट नहीं किया जा सकता है।

6. 491 : 28-6

When we are awake, we dream of the pains and pleasures of matter. Who will say, even though he does not understand Christian Science, that this dream — rather than the dreamer — may not be mortal man? Who can rationally say otherwise, when the dream leaves mortal man intact in body and thought, although the so-called dreamer is unconscious? For right reasoning there should be but one fact before the thought, namely, spiritual existence. In reality there is no other existence, since Life cannot be united to its unlikeness, mortality.

7. 306: 32–2

सभी मानवीय कलहों का जनक एडम-स्वप्न, गहरी नींद थी, जिसमें यह भ्रम उत्पन्न हुआ कि जीवन और बुद्धि आगे बढ़े और पदार्थ में चले गए।

7. 306 : 32–2

The parent of all human discord was the Adam-dream, the deep sleep, in which originated the delusion that life and intelligence proceeded from and passed into matter.

8. 552: 13-19

नश्वर जीवन में मानव अनुभव, जो एक अंडे से शुरू होता है, अय्यूब के साथ मेल खाता है, जब वह कहता है, "मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है, वह थोड़े दिनों का और दुख से भरा रहता है।" नश्वर को भौतिक जीवन की इस धारणा से समग्र रूप से उभरना चाहिए। उन्हें ईसाई विज्ञान के साथ अपने गोले खोलने चाहिए, और बाहर और ऊपर की ओर देखना चाहिए।

8. 552 : 13-19

Human experience in mortal life, which starts from an egg, corresponds with that of Job, when he says, "Man that is born of a woman is of few days, and full of trouble." Mortals must emerge from this notion of material life as all-in-all. They must peck open their shells with Christian Science, and look outward and upward.

9. 538: 27-3

चूंकि नश्वर मनुष्य और पाप दोनों की शुरुआत होती है, इसलिए उनका अंत भी होना चाहिए, जबकि पाप रहित, वास्तविक मनुष्य शाश्वत है। ईव की घोषणा, "मैं ने यहोवा की सहायता से एक पुरूष पाया है।" ईश्वर को पाप और पाप की संतान का रचयिता मानता है। अस्तित्व की यह मिथ्या भावना भ्रातृघातक है। यीशु के शब्दों में, यह (बुराई, शैतान) है "आरम्भ से हत्यारा है।"

9. 538 : 27-3

As both mortal man and sin have a beginning, they must consequently have an end, while the sinless, real man is eternal. Eve's declaration, "I have gotten a man from the Lord," supposes God to be the author of sin and sin's progeny. This false sense of existence is fratricidal. In the words of Jesus, it (evil, devil) is "a murderer from the beginning."

10. 554: 20-28

यीशु ने परमेश्वर और उसकी सृष्टि के इस विपरीत को हमसे बेहतर परिभाषित किया, जब उसने कहा, "वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।" यीशु ने यह भी कहा, "क्या मैं ने तुम बारहों को नहीं चुन लिया? तौभी तुम में से एक व्यक्ति शैतान है?" यह बात उसने आदम की जाति में से एक यहूदा के विषय में कही। यीशु ने कभी नहीं बताया कि परमेश्वर ने शैतान बनाया है, परन्तु उसने कहा, "तुम अपने पिता शैतान से हो।" ये सभी कहावतें यह दर्शाने के लिए थीं कि पदार्थ में मन स्वयं इसका लेखक है, और यह केवल एक मिथ्या और भ्रम है।

10. 554 : 20-28

Jesus defined this opposite of God and His creation better than we can, when he said, "He is a liar, and the father of it." Jesus also said, "Have not I chosen you twelve, and one of you is a devil?" This he said of Judas, one of Adam's race. Jesus never intimated that God made a devil, but he did say, "Ye are of your father, the devil." All these sayings were to show that mind in matter is the author of itself, and is simply a falsity and illusion.

11. 214: 9-14

एडम, जिसे शास्त्रों में धूल से निर्मित दर्शाया गया है, मानव मन के लिए एक वस्तु-पाठ है। भौतिक इंद्रियाँ, एडम की तरह, पदार्थ में उत्पन्न होती हैं और धूल में लौट जाती हैं, - गैर-बुद्धिमान साबित होती हैं। वे जैसे आये थे वैसे ही बाहर भी जाते हैं, क्योंकि वे अभी भी त्रुटि हैं, अस्तित्व का सत्य नहीं।

11. 214 : 9-14

Adam, represented in the Scriptures as formed from dust, is an object-lesson for the human mind. The material senses, like Adam, originate in matter and return to dust, — are proved non-intelligent. They go out as they came in, for they are still the error, not the truth of being.

12. 281: 20-2

जब हम सच्चे के लिए गलत अर्थ को त्याग देते हैं, और देखते हैं कि पाप और नश्वरता का कोई सिद्धांत या स्थायित्व नहीं है, तो हम सीखेंगे कि पाप और नश्वरता वास्तविक उत्पत्ति या सही अस्तित्व के बिना हैं। वे मूल शून्यता हैं, जिनमें से त्रुटि धूल से बने मनुष्य के माध्यम से सृजन का अनुकरण करेगी।

दिव्य विज्ञान नई शराब को पुरानी बोतलों में नहीं डालता है, आत्मा को सामग्री में, न ही अनंत में। जब हम आत्मा के तथ्यों को समझ लेते हैं, तो भौतिक वस्तुओं के बारे में हमारे झूठे विचार नष्ट हो जाते हैं। पुरानी मान्यता को खत्म किया जाना चाहिए या नया विचार फैलाया जाएगा, और प्रेरणा, जो हमारे दृष्टिकोण को बदलने के लिए है, खो जाएगी। अब, पुराने समय की तरह, सत्य बुराइयों को दूर करता है और बीमारों को ठीक करता है।

12. 281 : 20-2

When we put off the false sense for the true, and see that sin and mortality have neither Principle nor permanency, we shall learn that sin and mortality are without actual origin or rightful existence. They are native nothingness, out of which error would simulate creation through a man formed from dust.

Divine Science does not put new wine into old bottles, Soul into matter, nor the infinite into the finite. Our false views of matter perish as we grasp the facts of Spirit. The old belief must be cast out or the new idea will be spilled, and the inspiration, which is to change our standpoint, will be lost. Now, as of old, Truth casts out evils and heals the sick.

13. 544: 7-12

जन्म, क्षय और मृत्यु वस्तुओं के भौतिक बोध से उत्पन्न होते हैं, आध्यात्मिक से नहीं, क्योंकि बाद में जीवन उन चीज़ों से नहीं बनता जो मनुष्य खाता है। पदार्थ इस शाश्वत तथ्य को नहीं बदल सकता कि मनुष्य का अस्तित्व इसलिए है क्योंकि ईश्वर का अस्तित्व है। अनंत मन के लिए कुछ भी नया नहीं है।

13. 544 : 7-12

Birth, decay, and death arise from the material sense of things, not from the spiritual, for in the latter Life consisteth not of the things which a man eateth. Matter cannot change the eternal fact that man exists because God exists. Nothing is new to the infinite Mind.

14. 463: 6-9 (से,), 12-13

नए बच्चे के जन्म, या दिव्य विचार में उचित रूप से भाग लेने के लिए, आपको नश्वर विचार को उसकी भौतिक अवधारणाओं से अलग करना चाहिए, … एक आध्यात्मिक विचार में त्रुटि का एक भी तत्व नहीं होता है, और यह सत्य जो कुछ भी आपत्तिजनक है उसे ठीक से हटा देता है।

14. 463 : 6-9 (to ,), 12-13

To attend properly the birth of the new child, or divine idea, you should so detach mortal thought from its material conceptions, … A spiritual idea has not a single element of error, and this truth removes properly whatever is offensive.

15. 528: 31 (में)-4

… मानव इतिहास में, जब निषिद्ध फल अपनी तरह का फल ला रहा था, तो कार्यप्रणाली में बदलाव का सुझाव आया, - कि पुरुष को महिला से पैदा होना चाहिए, न कि महिला को फिर से पुरुष से लिया जाना चाहिए।

15. 528 : 31 (in)-4

…in human history, when the forbidden fruit was bringing forth fruit of its own kind, there came a suggestion of change in the modus operandi, — that man should be born of woman, not woman again taken from man.

16. 529: 6-12

मनुष्य की प्रकृति और उत्पत्ति के संबंध में एक और परिवर्तन आएगा, और यह रहस्योद्घाटन अस्तित्व के सपने को नष्ट कर देगा, वास्तविकता को बहाल करेगा, विज्ञान और सृष्टि के गौरवशाली तथ्य को सामने लाएगा, कि पुरुष और महिला दोनों ईश्वर से आते हैं और उनके शाश्वत बच्चे हैं, किसी कम माता-पिता से संबंधित नहीं।

16. 529 : 6-12

Another change will come as to the nature and origin of man, and this revelation will destroy the dream of existence, reinstate reality, usher in Science and the glorious fact of creation, that both man and woman proceed from God and are His eternal children, belonging to no lesser parent.

17. 557: 18 (दिव्य)-21

ईश्वरीय विज्ञान सत्य के प्रकाश के साथ त्रुटि के बादलों को वापस रोल करता है, और मनुष्य पर पर्दा उठाता है जैसे कि कभी पैदा नहीं हुआ और कभी न मरने वाला, लेकिन अपने निर्माता के साथ सह-अस्तित्व के रूप में।

17. 557 : 18 (Divine)-21

Divine Science rolls back the clouds of error with the light of Truth, and lifts the curtain on man as never born and as never dying, but as coexistent with his creator.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6