रविवार 28 जून, 2020 |

रविवार 28 जून, 2020



विषयक्रिश्चियन साइंस

SubjectChristian Science

वर्ण पाठ: निर्गमन 15: 26

मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं॥



Golden Text: Exodus 15 : 26

I am the Lord that healeth thee.




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प्रकाशित वाक्य 21: 1–4, 6, 7


1     फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।

2     फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।

3     फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।

4     और वह उन की आंखोंसे सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।

6     फिर उस ने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।

7     जो जय पाए, वही इन वस्तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

Responsive Reading: Revelation 21 : 1–4, 6, 7

1.     And I saw a new heaven and a new earth: for the first heaven and the first earth were passed away; and there was no more sea.

2.     And I John saw the holy city, new Jerusalem, coming down from God out of heaven, prepared as a bride adorned for her husband.

3.     And I heard a great voice out of heaven saying, Behold, the tabernacle of God is with men, and he will dwell with them, and they shall be his people, and God himself shall be with them, and be their God.

4.     And God shall wipe away all tears from their eyes; and there shall be no more death, neither sorrow, nor crying, neither shall there be any more pain: for the former things are passed away.

6.     And he said unto me, It is done. I am Alpha and Omega, the beginning and the end. I will give unto him that is athirst of the fountain of the water of life freely.

7.     He that overcometh shall inherit all things; and I will be his God, and he shall be my son.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. भजन संहिता 103 : 1–5

1     हेमेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!

2     हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।

3     वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,

4     वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,

5     वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है॥

1. Psalm 103 : 1–5

1     Bless the Lord, O my soul: and all that is within me, bless his holy name.

2     Bless the Lord, O my soul, and forget not all his benefits:

3     Who forgiveth all thine iniquities; who healeth all thy diseases;

4     Who redeemeth thy life from destruction; who crowneth thee with lovingkindness and tender mercies;

5     Who satisfieth thy mouth with good things; so that thy youth is renewed like the eagle’s.

2. 2 राजा 5 : 1–3, 9–15

1     अराम के राजा का नामान नाम सेनापति अपने स्वामी की दृष्टि में बड़ा और प्रतिष्ठित पुरुष था, क्योंकि यहोवा ने उसके द्वारा अरामियों को विजयी किया था, और यह शूरवीर था, परन्तु कोढ़ी था।

2     अरामी लोग दल बान्ध कर इस्राएल के देश में जा कर वहां से एक छोटी लड़की बन्धुवाई में ले आए थे और वह नामान की पत्नी की सेवा करती थी।

3     उसने अपनी स्वामिन से कहा, जो मेरा स्वामी शोमरोन के भविष्यद्वक्ता के पास होता, तो क्या ही अच्छा होता! क्योंकि वह उसको कोढ़ से चंगा कर देता।

9     तब नामान घोड़ों और रथों समेत एलीशा के द्वार पर आकर खड़ा हुआ।

10     तब एलीशा ने एक दूत से उसके पास यह कहला भेजा, कि तू जा कर यरदन में सात बार डुबकी मार, तब तेरा शरीर ज्यों का त्यों हो जाएगा, और तू शुद्ध होगा।

11     परन्तु नामान क्रोधित हो यह कहता हुआ चला गया, कि मैं ने तो सोचा था, कि अवश्य वह मेरे पास बाहर आएगा, और खड़ा हो कर अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर के कोढ़ के स्थान पर अपना हाथ फेर कर कोढ़ को दूर करेगा!

12     क्या दमिश्क की अबाना और पर्पर नदियां इस्राएल के सब जलाशयों से अत्तम नहीं हैं? क्या मैं उन में स्नान कर के शुद्ध नहीं हो सकता हूँ? इसलिये वह जलजलाहट से भरा हुआ लौट कर चला गया।

13     तब उसके सेवक पास आकर कहने लगे, हे हमारे पिता यदि भविष्यद्वक्ता तुझे कोई भारी काम करने की आज्ञा देता, तो क्या तू उसे न करता? फिर जब वह कहता है, कि स्नान कर के शुद्ध हो जा, तो कितना अधिक इसे मानना चाहिये।

14     तब उसने परमेश्वर के भक्त के वचन के अनुसार यरदन को जा कर उस में सात बार डुबकी मारी, और उसका शरीर छोटे लड़के का सा हो गया; उौर वह शुद्ध हो गया।

15     तब वह अपने सब दल बल समेत परमेश्वर के भक्त के यहां लौट आया, और उसके सम्मुख खड़ा हो कर कहने लगा सुन, अब मैं ने जान लिया है, कि समस्त पृथ्वी में इस्राएल को छोड़ और कहीं परमेश्वर नहीं है। इसलिये अब अपने दास की भेंट ग्रहण कर।

2. II Kings 5 : 1–3, 9–15

1     Now Naaman, captain of the host of the king of Syria, was a great man with his master, and honourable, because by him the Lord had given deliverance unto Syria: he was also a mighty man in valour, but he was a leper.

2     And the Syrians had gone out by companies, and had brought away captive out of the land of Israel a little maid; and she waited on Naaman’s wife.

3     And she said unto her mistress, Would God my lord were with the prophet that is in Samaria! for he would recover him of his leprosy.

9     So Naaman came with his horses and with his chariot, and stood at the door of the house of Elisha.

10     And Elisha sent a messenger unto him, saying, Go and wash in Jordan seven times, and thy flesh shall come again to thee, and thou shalt be clean.

11     But Naaman was wroth, and went away, and said, Behold, I thought, He will surely come out to me, and stand, and call on the name of the Lord his God, and strike his hand over the place, and recover the leper.

12     Are not Abana and Pharpar, rivers of Damascus, better than all the waters of Israel? may I not wash in them, and be clean? So he turned and went away in a rage.

13     And his servants came near, and spake unto him, and said, My father, if the prophet had bid thee do some great thing, wouldest thou not have done it? how much rather then, when he saith to thee, Wash, and be clean?

14     Then went he down, and dipped himself seven times in Jordan, according to the saying of the man of God: and his flesh came again like unto the flesh of a little child, and he was clean.

15     And he returned to the man of God, he and all his company, and came, and stood before him: and he said, Behold, now I know that there is no God in all the earth, but in Israel: now therefore, I pray thee, take a blessing of thy servant.

3. मत्ती 4 : 23 (यीशु), 24

23     और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन की सभाओं में उपदेश करता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और दुर्बल्ता को दूर करता रहा।

24     और सारे सूरिया में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो नाना प्रकार की बीमारियों और दुखों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्टात्माएं थीं और मिर्गी वालों और झोले के मारे हुओं को उसके पास लाए और उस ने उन्हें चंगा किया।

3. Matthew 4 : 23 (Jesus), 24

23     Jesus went about all Galilee, teaching in their synagogues, and preaching the gospel of the kingdom, and healing all manner of sickness and all manner of disease among the people.

24     And his fame went throughout all Syria: and they brought unto him all sick people that were taken with divers diseases and torments, and those which were possessed with devils, and those which were lunatick, and those that had the palsy; and he healed them.

4. मत्ती 8 : 2–4

2     और देखो, एक कोढ़ी ने पास आकर उसे प्रणाम किया और कहा; कि हे प्रभु यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।

3     यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ, और कहा, मैं चाहता हूं, तू शुद्ध हो जा और वह तुरन्त को ढ़ से शुद्ध हो गया।

4     यीशु ने उस से कहा; देख, किसी से न कहना परन्तु जाकर अपने आप को याजक को दिखला और जो चढ़ावा मूसा ने ठहराया है उसे चढ़ा, ताकि उन के लिये गवाही हो।

4. Matthew 8 : 2–4

2     And, behold, there came a leper and worshipped him, saying, Lord, if thou wilt, thou canst make me clean.

3     And Jesus put forth his hand, and touched him, saying, I will; be thou clean. And immediately his leprosy was cleansed.

4     And Jesus saith unto him, See thou tell no man; but go thy way, shew thyself to the priest, and offer the gift that Moses commanded, for a testimony unto them.

5. यूहन्ना 14 : 5–7, 15–17

5     थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?

6     यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

7     यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।

15     यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।

16     और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।

17     अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।

5. John 14 : 5–7, 15–17

5     Thomas saith unto him, Lord, we know not whither thou goest; and how can we know the way?

6     Jesus saith unto him, I am the way, the truth, and the life: no man cometh unto the Father, but by me.

7     If ye had known me, ye should have known my Father also: and from henceforth ye know him, and have seen him.

15     If ye love me, keep my commandments.

16     And I will pray the Father, and he shall give you another Comforter, that he may abide with you for ever;

17     Even the Spirit of truth; whom the world cannot receive, because it seeth him not, neither knoweth him: but ye know him; for he dwelleth with you, and shall be in you.

6. प्रकाशित वाक्य 10 : 1–3 (से :), 8–11

1     फिर मैं ने एक और बली स्वर्गदूत को बादल ओढ़े हुए स्वर्ग से उतरते देखा, उसके सिर पर मेघधनुष था: और उसका मुंह सूर्य का सा और उसके पांव आग के खंभे के से थे।

2     और उसके हाथ में एक छोटी सी खुली हुई पुस्तक थी; उस ने अपना दाहिना पांव समुद्र पर, और बायां पृथ्वी पर रखा।

3     और ऐसे बड़े शब्द से चिल्लाया, जैसा सिंह गरजता है।

8     और जिस शब्द करने वाले को मैं ने स्वर्ग से बोलते सुना था, वह फिर मेरे साथ बातें करने लगा; कि जा, जो स्वर्गदूत समुद्र और पृथ्वी पर खड़ा है, उसके हाथ में की खुली हुई पुस्तक ले ले।

9     और मैं ने स्वर्गदूत के पास जा कर कहा, यह छोटी पुस्तक मुझे दे; और उस ने मुझ से कहा ले इसे खा ले, और यह तेरा पेट कड़वा तो करेगी, पर तेरे मुंह में मधु सी मीठी लगेगी।

10     सो मैं वह छोटी पुस्तक उस स्वर्गदूत के हाथ से ले कर खा गया, वह मेरे मुंह में मधु सी मीठी तो लगी, पर जब मैं उसे खा गया, तो मेरा पेट कड़वा हो गया।

11     तब मुझ से यह कहा गया, कि तुझे बहुत से लोगों, और जातियों, और भाषाओं, और राजाओं पर, फिर भविष्यद्ववाणी करनी होगी॥

6. Revelation 10 : 1–3 (to :), 8–11

1     And I saw another mighty angel come down from heaven, clothed with a cloud: and a rainbow was upon his head, and his face was as it were the sun, and his feet as pillars of fire:

2     And he had in his hand a little book open: and he set his right foot upon the sea, and his left foot on the earth,

3     And cried with a loud voice, as when a lion roareth:

8     And the voice which I heard from heaven spake unto me again, and said, Go and take the little book which is open in the hand of the angel which standeth upon the sea and upon the earth.

9     And I went unto the angel, and said unto him, Give me the little book. And he said unto me, Take it, and eat it up; and it shall make thy belly bitter, but it shall be in thy mouth sweet as honey.

10     And I took the little book out of the angel’s hand, and ate it up; and it was in my mouth sweet as honey: and as soon as I had eaten it, my belly was bitter.

11     And he said unto me, Thou must prophesy again before many peoples, and nations, and tongues, and kings.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. xi : 9-21

क्रिश्चियन साइंस के फिजिकल हीलिंग अब परिणाम है, यीशु के समय के अनुसार, ईश्वरीय सिद्धांत के संचालन से, इससे पहले कि पाप और बीमारी मानवीय चेतना में अपनी वास्तविकता खो देते हैं और स्वाभाविक रूप से गायब हो जाते हैं और आवश्यक रूप से अंधेरा प्रकाश और पाप को सुधार के लिए जगह देता है। अब, अतीत की तरह, ये शक्तिशाली कार्य अलौकिक नहीं हैं, बल्कि सर्वोच्च प्राकृतिक हैं। वे इमैनुअल, या "भगवान हमारे साथ है," का संकेत हैं — मानवीय चेतना में मौजूद एक दिव्य प्रभाव और खुद को दोहराते हुए, अब जैसा कि वादा किया गया था, आ रहा है,

कि बन्धुओं को छुटकारे का और

अन्धों को दृष्टि पाने का सुसमाचार

प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं।

1. xi : 9-21

The physical healing of Christian Science results now, as in Jesus' time, from the operation of divine Principle, before which sin and disease lose their reality in human consciousness and disappear as naturally and as necessarily as darkness gives place to light and sin to reformation. Now, as then, these mighty works are not supernatural, but supremely natural. They are the sign of Immanuel, or "God with us," — a divine influence ever present in human consciousness and repeating itself, coming now as was promised aforetime,

To preach deliverance to the captives [of sense],

And recovering of sight to the blind,

To set at liberty them that are bruised.

2. 139 : 4–8, 15-27

शुरुआत से लेकर अंत तक, पवित्रशास्त्र आत्मा, मन की बात की विजय से भरपूर है। मूसा ने मन की शक्ति को उसके द्वारा सिद्ध किया, जिसे पुरुषों ने चमत्कार कहा; तब यहोशू, एलिय्याह और एलीशा ने किया।

चर्च काउंसिल के वोट के रूप में निर्णय के रूप में क्या किया जाना चाहिए और पवित्र लेखन नहीं माना जाना चाहिए; प्राचीन संस्करणों में प्रकट गलतियाँ; ओल्ड टेस्टामेंट में तीस हजार अलग-अलग रीडिंग, और न्यू में तीन सौ हजार, - इन तथ्यों से पता चलता है कि कैसे एक नश्वर और भौतिक अर्थ दैवीय रिकॉर्ड में चुराया गया था, अपने स्वयं के ह्यू के साथ कुछ हद तक प्रेरित पृष्ठों पर काला पड़ गया। लेकिन गलतियाँ न तो पूरी तरह से दिव्य विज्ञान को देख सकती हैं जो उत्पत्ति से प्रकाशित वाक्य में देखी गई शास्त्रों की विज्ञान, यीशु के प्रदर्शन से शादी करती हैं, न ही भविष्यवक्ताओं द्वारा उपचार को रद्द करती हैं, जो कि भविष्यवाणी करते हैं "राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया" "वही कोने का सिरा हो गया।"

2. 139 : 4–8, 15-27

From beginning to end, the Scriptures are full of accounts of the triumph of Spirit, Mind, over matter. Moses proved the power of Mind by what men called miracles; so did Joshua, Elijah, and Elisha.

The decisions by vote of Church Councils as to what should and should not be considered Holy Writ; the manifest mistakes in the ancient versions; the thirty thousand different readings in the Old Testament, and the three hundred thousand in the New, — these facts show how a mortal and material sense stole into the divine record, with its own hue darkening to some extent the inspired pages. But mistakes could neither wholly obscure the divine Science of the Scriptures seen from Genesis to Revelation, mar the demonstration of Jesus, nor annul the healing by the prophets, who foresaw that "the stone which the builders rejected" would become "the head of the corner."

3. 107 : 1-6

वर्ष 1866 में, मैं ने जीवन, सत्य और प्रेम के क्रिएचरियन साइंस या ईश्वरीय नियमों की खोज की और अपनी खोज का नाम क्रिश्चियन साइंस रखा। वैज्ञानिक मानसिक उपचार के पूर्ण दिव्य सिद्धांत के इस अंतिम रहस्योद्घाटन के स्वागत के लिए भगवान ने कई वर्षों के दौरान मुझे विनम्रतापूर्वक तैयार किया।

3. 107 : 1-6

In the year 1866, I discovered the Christ Science or divine laws of Life, Truth, and Love, and named my discovery Christian Science. God had been graciously preparing me during many years for the reception of this final revelation of the absolute divine Principle of scientific mental healing.

4. 109 : 11–15, 16–22

अपनी खोज के तीन साल बाद, मैंने माइंड-हीलिंग की इस समस्या का समाधान खोजा, शास्त्रों की खोज की और थोड़ा और पढ़ा, समाज से अलग रखा और एक सकारात्मक नियम की खोज के लिए समय और ऊर्जा समर्पित की। … मैं जानता था कि सभी सामंजस्यपूर्ण माइंड-एक्शन का सिद्धांत ईश्वर है, और यह कि पवित्र, उत्थान विश्वास द्वारा आदिम ईसाई उपचार में उत्पन्न हुए थे; लेकिन मुझे इस उपचार के विज्ञान का पता होना चाहिए, और मैंने दिव्य रहस्योद्घाटन, कारण और प्रदर्शन के माध्यम से पूर्ण निष्कर्ष के लिए अपना रास्ता जीता।

4. 109 : 11–15, 16–22

For three years after my discovery, I sought the solution of this problem of Mind-healing, searched the Scriptures and read little else, kept aloof from society, and devoted time and energies to discovering a positive rule. … I knew the Principle of all harmonious Mind-action to be God, and that cures were produced in primitive Christian healing by holy, uplifting faith; but I must know the Science of this healing, and I won my way to absolute conclusions through divine revelation, reason, and demonstration.

5. 558 : 1–8

संत उहन्ना लिखते हैं, उनकी पुस्तक के दसवें अध्याय में प्रकाशित सिंट: —

फिर मैं ने एक और बली स्वर्गदूत को बादल ओढ़े हुए स्वर्ग से उतरते देखा, उसके सिर पर मेघधनुष था: और उसका मुंह सूर्य का सा और उसके पांव आग के खंभे के से थे।और उसके हाथ में एक छोटी सी खुली हुई पुस्तक थी; उस ने अपना दाहिना पांव समुद्र पर, और बायां पृथ्वी पर रखा।

5. 558 : 1–8

St. John writes, in the tenth chapter of his book of Revelation: — And I saw another mighty angel come down from heaven, clothed with a cloud: and a rainbow was upon his head, and his face was as it were the sun, and his feet as pillars of fire: and he had in his hand a little book open: and he set his right foot upon the sea, and his left foot on the earth.

6. 559 : 1–23

इस परी ने अपने हाथ में "एक छोटी सी पुस्तक," सभी को पढ़ने और समझने के लिए खोल दिया। क्या इसी पुस्तक में ईश्वरीय विज्ञान के रहस्योद्घाटन, "दाहिने पैर" या प्रमुख शक्ति है, जो समुद्र पर थी, - प्राथमिक, अव्यक्त त्रुटि, सभी त्रुटि के दृश्य रूपों का स्रोत? देवदूत का बायां पैर पृथ्वी पर था; अर्थात्, दृश्य त्रुटि और श्रव्य पाप पर एक द्वितीयक शक्ति का प्रयोग किया गया था। वैज्ञानिक चिंतन का "हुआ डाउन वर्ड" महाद्वीप और महासागर से लेकर ग्लोब के रिमोटेस्ट बाउंड तक पहुंचता है। सत्य की अश्रव्य आवाज मानव मन के लिए है, "जब एक शेर दहाड़ता है।" यह रेगिस्तान में और भय के अंधेरे स्थानों में सुनाई देता है। यह बुराई के "सात आवाज़" पैदा करता है, और गुप्त अव्यवस्थाओं की पूरी डायपसन उच्चारण करने के लिए उनकी अव्यक्त ताकतों को रोकता है। तब सत्य की शक्ति प्रदर्शित होती है, — त्रुटि के विनाश में प्रकट किया जाता है। फिर सद्भाव रोने से एक आवाज होगी: “जाओ और छोटी किताब ले जाओ। … इसे खा ले, और यह तेरा पेट कड़वा तो करेगी, पर तेरे मुंह में मधु सी मीठी लगेगी।" नश्वर, स्वर्गीय सुसमाचार का पालन करते हैं। दिव्य विज्ञान को लें। इस किताब को शुरू से आखिर तक पढ़ें। इसका अध्ययन करें, इसका पालन करें। यह वास्तव में अपने पहले स्वाद में मीठा होगा, जब यह आपको ठीक करता है; लेकिन बड़बड़ाहट सत्य पर नहीं, अगर आपको इसका पाचन कड़वा लगता है।

6. 559 : 1–23

This angel had in his hand "a little book," open for all to read and understand. Did this same book contain the revelation of divine Science, the "right foot" or dominant power of which was upon the sea, — upon elementary, latent error, the source of all error's visible forms? The angel's left foot was upon the earth; that is, a secondary power was exercised upon visible error and audible sin. The "still, small voice" of scientific thought reaches over continent and ocean to the globe's remotest bound. The inaudible voice of Truth is, to the human mind, "as when a lion roareth." It is heard in the desert and in dark places of fear. It arouses the "seven thunders" of evil, and stirs their latent forces to utter the full diapason of secret tones. Then is the power of Truth demonstrated, — made manifest in the destruction of error. Then will a voice from harmony cry: "Go and take the little book. … Take it, and eat it up; and it shall make thy belly bitter, but it shall be in thy mouth sweet as honey." Mortals, obey the heavenly evangel. Take divine Science. Read this book from beginning to end. Study it, ponder it. It will be indeed sweet at its first taste, when it heals you; but murmur not over Truth, if you find its digestion bitter.

7. 150 : 4-17

सत्य की हीलिंग पावर को एक अभूतपूर्व प्रदर्शनी के बजाय एक स्थायी, शाश्वत विज्ञान के रूप में व्यापक रूप से प्रदर्शित किया जाता है। इसका प्रकट होना "पृथ्वी पर शांति, पुरुषों के प्रति सद्भाव" के सुसमाचार का आने वाला है। यह आ रहा है, जैसा कि मास्टर द्वारा वादा किया गया था, इसकी स्थापना पुरुषों के बीच एक स्थायी वितरण के रूप में है; लेकिन क्रिश्चियन साइंस का मिशन अब, जैसा कि इसके पहले के प्रदर्शन के समय में था, मुख्य रूप से शारीरिक उपचार में से एक नहीं है। अब, जैसा कि, संकेत और चमत्कार शारीरिक रोग के आध्यात्मिक उपचार में गढ़ा जाता है; लेकिन ये संकेत केवल इसकी दिव्य उत्पत्ति को प्रदर्शित करने के लिए हैं, - दुनिया के पापों को दूर करने के लिए मसीह-शक्ति के उच्च मिशन की वास्तविकता को प्रमाणित करने के लिए।

7. 150 : 4-17

To-day the healing power of Truth is widely demonstrated as an immanent, eternal Science, instead of a phenomenal exhibition. Its appearing is the coming anew of the gospel of "on earth peace, good-will toward men." This coming, as was promised by the Master, is for its establishment as a permanent dispensation among men; but the mission of Christian Science now, as in the time of its earlier demonstration, is not primarily one of physical healing. Now, as then, signs and wonders are wrought in the metaphysical healing of physical disease; but these signs are only to demonstrate its divine origin, — to attest the reality of the higher mission of the Christ-power to take away the sins of the world.

8. 55 : 15–29

अपने स्वयं के पंखों के नीचे बीमार और पापी लोगों को इकट्ठा करके, सत्य का अमर विचार सदियों से चल रहा है। मेरी थकी हुई आशा उस सुखद दिन को महसूस करने की कोशिश करती है, जब मनुष्य मसीह के विज्ञान को पहचान लेगा और अपने पड़ोसी को अपने जैसा प्यार करेगा, — जब वह ईश्वर की सर्वशक्तिमानता और उस परमात्मा की उपचार शक्ति का एहसास करेगा जो उसने किया है और मानव जाति के लिए कर रहा है। वादे पूरे होंगे। दिव्य चिकित्सा के प्रकट होने का समय हर समय है; और जो कोई भी दिव्य विज्ञान की वेदी पर अपने सांसारिक स्तर को रखता है, अब मसीह के प्याले को पीता है, और वह ईसाई उपचार की भावना और शक्ति से संपन्न है।

संत उहन्ना के शब्दों में: "वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।" इस कम्फ़र्टर को मैं ईश्वरीय विज्ञान समझता हूँ।

8. 55 : 15–29

Truth's immortal idea is sweeping down the centuries, gathering beneath its wings the sick and sinning. My weary hope tries to realize that happy day, when man shall recognize the Science of Christ and love his neighbor as himself, — when he shall realize God's omnipotence and the healing power of the divine Love in what it has done and is doing for mankind. The promises will be fulfilled. The time for the reappearing of the divine healing is throughout all time; and whosoever layeth his earthly all on the altar of divine Science, drinketh of Christ's cup now, and is endued with the spirit and power of Christian healing.

In the words of St. John: "He shall give you another Comforter, that he may abide with you forever." This Comforter I understand to be Divine Science.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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