रविवार 26 जनवरी, 2020 |

रविवार 26 जनवरी, 2020



विषयसत्य

SubjectTruth

वर्ण पाठ: भजन संहिता 86 : 11

"हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा।"



Golden Text: Psalm 86 : 11

Teach me thy way, O Lord; I will walk in thy truth.




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भजन संहिता 100 : 1-5


1     हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!

2     आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!

3     निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं॥

4     उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!

5     क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है॥

Responsive Reading: Psalm 100 : 1-5

1.     Make a joyful noise unto the Lord, all ye lands.

2.     Serve the Lord with gladness: come before his presence with singing.

3.     Know ye that the Lord he is God: it is he that hath made us, and not we ourselves; we are his people, and the sheep of his pasture.

4.     Enter into his gates with thanksgiving, and into his courts with praise: be thankful unto him, and bless his name.

5.     For the Lord is good; his mercy is everlasting; and his truth endureth to all generations.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. व्यवस्थाविवरण 32 : 1-4

1     हे आकाश, कान लगा, कि मैं बोलूं; और हे पृथ्वी, मेरे मुंह की बातें सुन॥

2     मेरा उपदेश मेंह की नाईं बरसेगा और मेरी बातें ओस की नाईं टपकेंगी, जैसे कि हरी घास पर झीसी, और पौधों पर झडिय़ां॥

3     मैं तो यहोवा नाम का प्रचार करूंगा। तुम अपने परमेश्वर की महिमा को मानो!

4     वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उस में कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है॥

1. Deuteronomy 32 : 1-4

1     Give ear, O ye heavens, and I will speak; and hear, O earth, the words of my mouth.

2     My doctrine shall drop as the rain, my speech shall distil as the dew, as the small rain upon the tender herb, and as the showers upon the grass:

3     Because I will publish the name of the Lord: ascribe ye greatness unto our God.

4     He is the Rock, his work is perfect: for all his ways are judgment: a God of truth and without iniquity, just and right is he.

2. दानिय्येल 3 : 1, 8, 10-13 (से 1st .), 14 (से 1st ,), 15 (गिर कर) (से ;), 15 (परंतु), 16 (से 4th ,), 17, 18, 21, 24-26, 28, 29

1     नबूकदनेस्सर राजा ने सोने की एक मूरत बनवाई, जिनकी ऊंचाई साठ हाथ, और चौड़ाई छ: हाथ की थी। और उसने उसको बाबुल के प्रान्त के दूरा नाम मैदान में खड़ा कराया।

8     उसी समय कई एक कसदी पुरूष राजा के पास गए, और कपट से यहूदियों की चुगली खाई।

10     हे राजा, तू ने तो यह आज्ञा दी है कि जो मनुष्य नरसिंगे, बांसुली, वीणा, सारंगी, सितार, शहनाई आदि सब प्रकार के बाजों का शब्द सुने, वह गिर कर उस सोने की मूरत को दण्डवत करे;

11     और जो कोई गिर कर दण्डवत न करे वह धधकते हुए भट्ठे के बीच में डाल दिया जाए।

12     देख, शद्रक, मेशक, और अबेदनगो नाम कुछ यहूदी पुरूष हैं, जिन्हें तू ने बाबुल के प्रान्त के कार्य के ऊपर नियुक्त किया है। उन पुरूषों ने, हे राजा, तेरी आज्ञा की कुछ चिन्ता नहीं की; वे तेरे देवता की उपासना नहीं करते, और जो सोने की मूरत तू ने खड़ी कराई है, उसको दण्डवत नहीं करते॥

13     तब नबूकदनेस्सर ने रोष और जलजलाहट में आकर आज्ञा दी कि शद्रक मेशक और अबेदनगो को लाओ।

14     नबूकदनेस्सर ने उन से पूछा।

15     ... गिर कर मेरी बनवाई हुई मूरत को दण्डवत करो... और यदि तुम दण्डवत ने करो तो इसी घड़ी धधकते हुए भट्ठे के बीच में डाले जाओगे; फिर ऐसा कौन देवता है, जो तुम को मेरे हाथ से छुड़ा सके?

16     शद्रक, मेशक और अबेदनगो ने राजा से कहा।

17     हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते हैं वह हम को उस धधकते हुए भट्टे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है।

18     परन्तु, यदि नहीं, तो हे राजा तुझे मालूम हो, कि हम लोग तेरे देवता की उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी खड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दण्डवत करेंगे॥

21     तब वे पुरूष अपने मोजों, अंगरखों, बागों और और वस्त्रों सहित बान्धकर, उस धधकते हुए भट्ठे में डाल दिए गए।

24     तब नबूकदनेस्सरे राजा अचम्भित हुआ और घबरा कर उठ खड़ा हुआ। और अपने मन्त्रियों से पूछने लगा, क्या हम ने उस आग के बीच तीन ही पुरूष बन्धे हुए नहीं डलवाए? उन्होंने राजा को उत्तर दिया, हां राजा, सच बात तो है।

25     फिर उसने कहा, अब मैं देखता हूं कि चार पुरूष आग के बीच खुले हुए टहल रहे हैं, और उन को कुछ भी हानि नहीं पहुंची; और चौथे पुरूष का स्वरूप ईश्वर के पुत्र के सदृश्य है॥

26     फिर नबूकदनेस्सर उस धधकते हुए भट्ठे के द्वार के पास जा कर कहने लगा, हे शद्रक, मेशक और अबेदनगो, हे परमप्रधान परमेश्वर के दासो, निकल कर यहां आओ! यह सुन कर शद्रक, मेशक और अबेदनगो आग के बीच से निकल आए।

28     नबूकदनेस्सर कहने लगा, धन्य है शद्रक, मेशक और अबेदनगो का परमेश्वर, जिसने अपना दूत भेज कर अपने इन दासों को इसलिये बचाया, क्योंकि इन्होंने राजा की आज्ञा न मान कर, उसी पर भरोसा रखा, और यह सोच कर अपना शरीर भी अर्पण किया, कि हम अपने परमेश्वर को छोड़, किसी देवता की उपासना वा दण्डवत न करेंगे।

29     इसलिये अब मैं यह आज्ञा देता हूं कि देश-देश और जाति-जाति के लोगों, और भिन्न-भिन्न भाषा बोलने वालों में से जो कोई शद्रक, मेशक और अबेदनगो के परमेश्वर की कुछ निन्दा करेगा, वह टुकड़े टुकड़े किया जाएगा, और उसका घर घूरा बनाया जाएगा; क्योंकि ऐसा कोई और देवता नहीं जो इस रीति से बचा सके।

2. Daniel 3 : 1, 8, 10-13 (to 1st .), 14 (to 1st ,), 15 (fall) (to ;), 15 (but), 16 (to 4th ,), 17, 18, 21, 24-26, 28, 29

1     Nebuchadnezzar the king made an image of gold, whose height was threescore cubits, and the breadth thereof six cubits: he set it up in the plain of Dura, in the province of Babylon.

8     Wherefore at that time certain Chaldeans came near, and accused the Jews.

10     Thou, O king, hast made a decree, that every man that shall hear the sound of the cornet, flute, harp, sackbut, psaltery, and dulcimer, and all kinds of musick, shall fall down and worship the golden image:

11     And whoso falleth not down and worshippeth, that he should be cast into the midst of a burning fiery furnace.

12     There are certain Jews whom thou hast set over the affairs of the province of Babylon, Shadrach, Meshach, and Abed-nego; these men, O king, have not regarded thee: they serve not thy gods, nor worship the golden image which thou hast set up.

13     Then Nebuchadnezzar in his rage and fury commanded to bring Shadrach, Meshach, and Abed-nego.

14     Nebuchadnezzar spake and said unto them,

15     …fall down and worship the image which I have made; but if ye worship not, ye shall be cast the same hour into the midst of a burning fiery furnace; and who is that God that shall deliver you out of my hands?

16     Shadrach, Meshach, and Abed-nego, answered and said to the king,

17     If it be so, our God whom we serve is able to deliver us from the burning fiery furnace, and he will deliver us out of thine hand, O king.

18     But if not, be it known unto thee, O king, that we will not serve thy gods, nor worship the golden image which thou hast set up.

21     Then these men were bound in their coats, their hosen, and their hats, and their other garments, and were cast into the midst of the burning fiery furnace.

24     Then Nebuchadnezzar the king was astonied, and rose up in haste, and spake, and said unto his counsellers, Did not we cast three men bound into the midst of the fire? They answered and said unto the king, True, O king.

25     He answered and said, Lo, I see four men loose, walking in the midst of the fire, and they have no hurt; and the form of the fourth is like the Son of God.

26     Then Nebuchadnezzar came near to the mouth of the burning fiery furnace, and spake, and said, Shadrach, Meshach, and Abed-nego, ye servants of the most high God, come forth, and come hither. Then Shadrach, Meshach, and Abed-nego, came forth of the midst of the fire.

28     Then Nebuchadnezzar spake, and said, Blessed be the God of Shadrach, Meshach, and Abed-nego, who hath sent his angel, and delivered his servants that trusted in him, and have changed the king’s word, and yielded their bodies, that they might not serve nor worship any god, except their own God.

29     Therefore I make a decree, That every people, nation, and language, which speak any thing amiss against the God of Shadrach, Meshach, and Abed-nego, shall be cut in pieces, and their houses shall be made a dunghill: because there is no other God that can deliver after this sort.

3. यूहन्ना 8 : 1, 2, 26-32

1     यीशु जैतून के पहाड़ पर गया।

2     और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा।

26     तुम्हारे विषय में मुझे बहुत कुछ कहना और निर्णय करना है परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है; और जो मैं ने उस से सुना हे, वही जगत से कहता हूं।

27     वे न समझे कि हम से पिता के विषय में कहता है।

28     तब यीशु ने कहा, कि जब तुम मनुष्य के पुत्र को ऊंचे पर चढ़ाओगे, तो जानोगे कि मैं वही हूं, और अपने आप से कुछ नहीं करता, परन्तु जैसे पिता ने मुझे सिखाया, वैसे ही ये बातें कहता हूं।

29     और मेरा भेजनेवाला मेरे साथ है; उस ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा; क्योंकि मैं सर्वदा वही काम करता हूं, जिस से वह प्रसन्न होता है।

30     वह ये बातें कह ही रहा था, कि बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया॥

31     तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।

32     और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा

3. John 8 : 1, 2, 26-32

1     Jesus went unto the mount of Olives.

2     And early in the morning he came again into the temple, and all the people came unto him; and he sat down, and taught them.

26     I have many things to say and to judge of you: but he that sent me is true; and I speak to the world those things which I have heard of him.

27     They understood not that he spake to them of the Father.

28     Then said Jesus unto them, When ye have lifted up the Son of man, then shall ye know that I am he, and that I do nothing of myself; but as my Father hath taught me, I speak these things.

29     And he that sent me is with me: the Father hath not left me alone; for I do always those things that please him.

30     As he spake these words, many believed on him.

31     Then said Jesus to those Jews which believed on him, If ye continue in my word, then are ye my disciples indeed;

32     And ye shall know the truth, and the truth shall make you free.

4. याकूब 1 : 17, 18

17     क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।

18     उस ने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्टि की हुई वस्तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों॥

4. James 1 : 17, 18

17     Every good gift and every perfect gift is from above, and cometh down from the Father of lights, with whom is no variableness, neither shadow of turning.

18     Of his own will begat he us with the word of truth, that we should be a kind of firstfruits of his creatures.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 7 : 13-21

विचारकों का समय आ गया है। सत्य, सिद्धांतों और समय-सम्मानित प्रणालियों से स्वतंत्र, मानवता के द्वार पर दस्तक देता है। अतीत के साथ संतोष और भौतिकवाद की ठंडी परम्परा के बीच टकराव कम हो रहा है। भगवान की अज्ञानता अब विश्वास के रास्ते का पत्थर नहीं है। आज्ञाकारिता का एकमात्र ज़मानता उसी की एक सही आशंका है जिसे जानने के लिए जीवन अनन्त है। यद्यपि साम्राज्य गिरते हैं, "प्रभु हमेशा के लिए शासन करेंगे।"

1. vii : 13-21

The time for thinkers has come. Truth, independent of doctrines and time-honored systems, knocks at the portal of humanity. Contentment with the past and the cold conventionality of materialism are crumbling away. Ignorance of God is no longer the stepping-stone to faith. The only guarantee of obedience is a right apprehension of Him whom to know aright is Life eternal. Though empires fall, "the Lord shall reign forever."

2. 224 : 28-4

सत्य स्वतंत्रता के तत्वों को लाता है। इसके बैनर पर आत्मा से प्रेरित आदर्श वाक्य है, "गुलामी को समाप्त कर दिया गया है।" भगवान की शक्ति कैद में उद्धार लाता है। कोई भी शक्ति दिव्य प्रेम का सामना नहीं कर सकती। यह कौन सी शक्ति है, जो स्वयं ईश्वर का विरोध करती है? यह किसके साथ आता है? वह कौन सी चीज है जो मनुष्य को पाप, बीमारी और मृत्यु के लिए लोहे की छड़ से बांधती है? जो कुछ भी मनुष्य को गुलाम बनाता है वह ईश्वरीय सरकार का विरोध करता है. सत्य ही मनुष्य को मुक्त बनाता है।

2. 224 : 28-4

Truth brings the elements of liberty. On its banner is the Soul-inspired motto, "Slavery is abolished." The power of God brings deliverance to the captive. No power can withstand divine Love. What is this supposed power, which opposes itself to God? Whence cometh it? What is it that binds man with iron shackles to sin, sickness, and death? Whatever enslaves man is opposed to the divine government. Truth makes man free.

3. 259 : 6-14

दिव्य विज्ञान में, मनुष्य भगवान की सच्ची छवि है। मसीह यीशु में ईश्वरीय प्रकृति को सर्वश्रेष्ठ रूप से व्यक्त किया गया था, विचार जो मनुष्य को पतित, बीमार, पापी और मरने के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वैज्ञानिक होने और दैवीय उपचार की मसीह की समझ में एक आदर्श सिद्धांत और विचार शामिल हैं, पूर्ण ईश्वर और पूर्ण मनुष्य, विचार और प्रदर्शन के आधार के रूप में।

3. 259 : 6-14

In divine Science, man is the true image of God. The divine nature was best expressed in Christ Jesus, who threw upon mortals the truer reflection of God and lifted their lives higher than their poor thought-models would allow, — thoughts which presented man as fallen, sick, sinning, and dying. The Christlike understanding of scientific being and divine healing includes a perfect Principle and idea, — perfect God and perfect man, — as the basis of thought and demonstration.

4. 286 : 1-15

मानव सिद्धांत में विश्वास के माध्यम से सत्य की तलाश करना अनंत को समझना नहीं है। हमें परिमित, पारस्परिक, और नश्वर के माध्यम से अपरिवर्तनीय और अमर की तलाश नहीं करनी चाहिए, और इसलिए प्रदर्शन के बजाय विश्वास पर निर्भर रहना चाहिए, क्योंकि यह विज्ञान के ज्ञान के लिए घातक है। सत्य की समझ सत्य में पूर्ण विश्वास देती है, और आध्यात्मिक समझ सभी जले हुए प्रसादों से बेहतर है।

मास्टर ने कहा, "बिना मेरे द्वारा कोई पिता (होने का दिव्य सिद्धांत) के पास नहीं पहुंच सकता।" मसीह, जीवन, सत्य, प्रेम के बिना; क्योंकि मसीह कहता है: "मार्ग मैं हूं." इस मूल पुरुष, यीशु द्वारा पहले से लेकर आखिर तक शारीरिक कार्य को अलग रखा गया था। वह जानता था कि दिव्य सिद्धांत, प्रेम, वास्तविक सब कुछ बनाता और संचालित करता है।

4. 286 : 1-15

To seek Truth through belief in a human doctrine is not to understand the infinite. We must not seek the immutable and immortal through the finite, mutable, and mortal, and so depend upon belief instead of demonstration, for this is fatal to a knowledge of Science. The understanding of Truth gives full faith in Truth, and spiritual understanding is better than all burnt offerings.

The Master said, "No man cometh unto the Father [the divine Principle of being] but by me," Christ, Life, Truth, Love; for Christ says, "I am the way." Physical causation was put aside from first to last by this original man, Jesus. He knew that the divine Principle, Love, creates and governs all that is real.

5. 161 : 5-10

पवित्र प्रेरणा ने मन की अवस्थाएँ पैदा की हैं जो आग की लपटों को कम करने में सक्षम हैं, जैसे बाइबिल में तीन युवा हिब्रू बंदियों को बेबीलोनियन भट्ठी में डाला गया था; जबकि एक विपरीत मानसिक स्थिति सहज दहन उत्पन्न कर सकती है।

5. 161 : 5-10

Holy inspiration has created states of mind which have been able to nullify the action of the flames, as in the Bible case of the three young Hebrew captives, cast into the Babylonian furnace; while an opposite mental state might produce spontaneous combustion.

6. 243 : 4-9

दैवीय प्रेम, जिसने जहरीली सांप को हानिरहित बना दिया, जिसने उबलते हुए तेल से पुरुषों को ज्वलंत भट्ठी से, शेर के जबड़े से, हर उम्र में बीमार और पाप और विजय से मृत्यु तक पहुंचाया। इसने नायाब शक्ति और प्रेम के साथ यीशु के प्रदर्शनों को ताज पहनाया।

6. 243 : 4-9

The divine Love, which made harmless the poisonous viper, which delivered men from the boiling oil, from the fiery furnace, from the jaws of the lion, can heal the sick in every age and triumph over sin and death. It crowned the demonstrations of Jesus with unsurpassed power and love.

7. 167 : 22-31

अड़ियल और आधे-अधूरे पद पर बैठना या आत्मा और भौतिक, सत्य और त्रुटि के साथ समान रूप से काम करने की अपेक्षा करना बुद्धिमानी नहीं है। एक तरीका है - ईश्वर और उसका विचार - जो आध्यात्मिक होने की ओर ले जाता है। शरीर की वैज्ञानिक सरकार को दिव्य मन के माध्यम से प्राप्त किया जाना चाहिए। शरीर पर किसी अन्य तरीके से नियंत्रण हासिल करना असंभव है। इस बुनियादी बिंदु पर, डरपोक रूढ़िवाद बिल्कुल बेवजह है। केवल सत्य पर कट्टरपंथी निर्भरता के माध्यम से वैज्ञानिक उपचार शक्ति का एहसास किया जा सकता है।

7. 167 : 22-31

It is not wise to take a halting and half-way position or to expect to work equally with Spirit and matter, Truth and error. There is but one way — namely, God and His idea — which leads to spiritual being. The scientific government of the body must be attained through the divine Mind. It is impossible to gain control over the body in any other way. On this fundamental point, timid conservatism is absolutely inadmissible. Only through radical reliance on Truth can scientific healing power be realized. 

8. 495 : 6-13

यदि बीमारी सच है या सत्य का विचार है, तो आप बीमारी को नष्ट नहीं कर सकते हैं, और यह कोशिश करना बेतुका होगा। तब बीमारी और त्रुटि को वर्गीकृत करें जैसा कि हमारे मास्टर ने किया था, जब उन्होंने बीमारों की बात की थी, "जिसे शैतान ने बाध्य किया," और मानव विश्वास पर कार्य करने वाली सत्य की जीवन-शक्ति में त्रुटि के लिए एक संप्रभु मारक पाते हैं, एक शक्ति जो जेल के दरवाज़े को इस तरह से खोलती है, और बंदी को शारीरिक और नैतिक रूप से मुक्त करती है।

8. 495 : 6-13

If sickness is true or the idea of Truth, you cannot destroy sickness, and it would be absurd to try. Then classify sickness and error as our Master did, when he spoke of the sick, "whom Satan hath bound," and find a sovereign antidote for error in the life-giving power of Truth acting on human belief, a power which opens the prison doors to such as are bound, and sets the captive free physically and morally.

9. 227 : 14-29

मनुष्य के अधिकारों को त्यागकर, हम सभी उत्पीड़न के विनाश को दूर करने में विफल नहीं हो सकते। गुलामी मनुष्य की वैध स्थिति नहीं है। ईश्वर ने मनुष्य को स्वतंत्र किया। पाल ने कहा, "मैं आज़ाद पैदा हुआ था।" सभी पुरुषों को स्वतंत्र होना चाहिए। "जहां कहीं प्रभु का आत्मा है, वहां स्वतंत्रता है।" प्रेम और सत्य मुक्त करते हैं, लेकिन बुराई और त्रुटि पुरुषों को कैद में ले जाती है।

क्रिश्चियन साइंस स्वतंत्रता और रोने के मानक को बढ़ाता है: "मेरे पीछे आओ! बीमारी, पाप, और मृत्यु के बंधन से बचो! ” यीशु ने रास्ता चिह्नित किया। दुनिया के नागरिक, "परमेश्वर के बच्चों की शानदार स्वतंत्रता" स्वीकार करें और मुक्त रहें! यह तुम्हारा दिव्य अधिकार है। भौतिक बोध का भ्रम, ईश्वरीय विधान नहीं, आपको बाध्य करता है, आपके मुक्त अंगों को उलझाता है, आपकी क्षमताओं को अपंग करता है, आपके शरीर को ऊर्जावान करता है, और आपके होने के टैबलेट को ख़राब कर देता है।

9. 227 : 14-29

Discerning the rights of man, we cannot fail to foresee the doom of all oppression. Slavery is not the legitimate state of man. God made man free. Paul said, "I was free born." All men should be free. "Where the Spirit of the Lord is, there is liberty." Love and Truth make free, but evil and error lead into captivity.

Christian Science raises the standard of liberty and cries: "Follow me! Escape from the bondage of sickness, sin, and death!" Jesus marked out the way. Citizens of the world, accept the "glorious liberty of the children of God," and be free! This is your divine right. The illusion of material sense, not divine law, has bound you, entangled your free limbs, crippled your capacities, enfeebled your body, and defaced the tablet of your being.

10. 368 : 2-9

विज्ञान से प्रेरित विश्वास इस तथ्य में निहित है कि सत्य वास्तविक है और त्रुटि असत्य है। सत्य से पहले त्रुटि कायरता है। दिव्य विज्ञान जोर देकर कहता है कि समय यह सब साबित करेगा। सत्य और त्रुटि दोनों नश्वरता की आशंका से पहले से कहीं अधिक निकट आ गए हैं, और सत्य अभी भी स्पष्ट हो जाएगा क्योंकि त्रुटि स्वयं नष्ट हो गई है।

10. 368 : 2-9

The confidence inspired by Science lies in the fact that Truth is real and error is unreal. Error is a coward before Truth. Divine Science insists that time will prove all this. Both truth and error have come nearer than ever before to the apprehension of mortals, and truth will become still clearer as error is self-destroyed.

11. 130 : 26-5

यदि ईश्वर या सत्य के वर्चस्व के लिए विज्ञान के मजबूत दावे पर विचार किया गया है, और अच्छाई के वर्चस्व पर संदेह किया गया है, क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि, दुष्टतापूर्ण, बुराई के जोरदार दावों पर चकित होना और उन पर संदेह करना, और अब उसे त्यागने के लिए पाप और अप्राकृतिक प्रेम करना स्वाभाविक नहीं लगता, - अब बुराई की कभी भी कल्पना करना अच्छा नहीं है और वर्तमान अच्छा है? सत्य को त्रुटि के रूप में इतना आश्चर्यजनक और अप्राकृतिक नहीं होना चाहिए, और त्रुटि को सत्य के रूप में वास्तविक नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य के रूप में बीमारी इतनी वास्तविक नहीं लगनी चाहिए। विज्ञान में कोई त्रुटि नहीं है, और हमारे जीवन को सभी के दैवीय सिद्धांत भगवान के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए वास्तविकता से शासित होना चाहिए।

11. 130 : 26-5

If thought is startled at the strong claim of Science for the supremacy of God, or Truth, and doubts the supremacy of good, ought we not, contrariwise, to be astounded at the vigorous claims of evil and doubt them, and no longer think it natural to love sin and unnatural to forsake it, — no longer imagine evil to be ever-present and good absent? Truth should not seem so surprising and unnatural as error, and error should not seem so real as truth. Sickness should not seem so real as health. There is no error in Science, and our lives must be governed by reality in order to be in harmony with God, the divine Principle of all being.

12. 228 : 11-15

मनुष्य की दासता वैध नहीं है। जब मनुष्य अपनी स्वतंत्रता की विरासत में प्रवेश करेगा, तो उसका ईश्वर प्रदत्त भौतिक इंद्रियों पर आधिपत्य हो जाएगा। नश्वर किसी दिन सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम पर अपनी स्वतंत्रता का दावा करेंगे।

12. 228 : 11-15

The enslavement of man is not legitimate. It will cease when man enters into his heritage of freedom, his God-given dominion over the material senses. Mortals will some day assert their freedom in the name of Almighty God.

13. 288 : 31-1

शाश्वत सत्य को नष्ट कर देता है जो लगता है कि मनुष्यों ने त्रुटि से सीखा है, और भगवान के बच्चे के रूप में मनुष्य का वास्तविक अस्तित्व प्रकाश में आता है।

13. 288 : 31-1

The eternal Truth destroys what mortals seem to have learned from error, and man's real existence as a child of God comes to light.

14. 380 : 4 केवल

सत्य हमेशा विजयी होता है।

14. 380 : 4 only

Truth is always the victor.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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