रविवार 22 जनवरी, 2023



विषयसत्य

SubjectTruth

वर्ण पाठ: स्वर्ण पाठ: निर्गमन 23: 1

"झूठी बात न फैलाना। अन्यायी साक्षी हो कर दुष्ट का साथ न देना।"



Golden Text: Exodus 23 : 1

Thou shalt not raise a false report: put not thine hand with the wicked to be an unrighteous witness.




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उत्तरदायी अध्ययन: भजन संहिता 15: 1-3 • भजन संहिता 18: 21-24, 32 • भजन संहिता 91: 4


1     हेपरमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?

2     वह जो खराई से चलता और धर्म के काम करता है, और हृदय से सच बोलता है;

3     जो अपनी जीभ से निन्दा नहीं करता, और न अपने मित्र की बुराई करता, और न अपने पड़ोसी की निन्दा सुनता है।

21     क्योंकि मैं यहोवा के मार्गों पर चलता रहा, और दुष्टता के कारण अपने परमेश्वर से दूर न हुआ।

22     क्योंकि उसके सारे निर्णय मेरे सम्मुख बने रहे और मैं ने उसकी विधियों को न त्यागा।

23     और मैं उसके सम्मुख सिद्ध बना रहा, और अधर्म से अपने को बचाए रहा।

24     यहोवा ने मुझे मेरे धर्म के अनुसार बदला दिया, और मेरे हाथों की उस शुद्धता के अनुसार जिसे वह देखता था॥

32     यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है।

4     उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।

Responsive Reading: Psalm 15 : 1-3Psalm 18 : 21-24, 32Psalm 91 : 4

1.     Lord, who shall abide in thy tabernacle? who shall dwell in thy holy hill?

2.     He that walketh uprightly, and worketh righteousness, and speaketh the truth in his heart.

3.     He that backbiteth not with his tongue, nor doeth evil to his neighbour, nor taketh up a reproach against his neighbour.

21.     For I have kept the ways of the Lord, and have not wickedly departed from my God.

22.     For all his judgments were before me, and I did not put away his statutes from me.

23.     I was also upright before him, and I kept myself from mine iniquity.

24.     Therefore hath the Lord recompensed me according to my righteousness, according to the cleanness of my hands in his eyesight.

32.     It is God that girdeth me with strength, and maketh my way perfect.

4.     His truth shall be thy shield and buckler.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. भजन संहिता 26: 1-3, 5, 11, 12

1     हेयहोवा, मेरा न्याय कर, क्योंकि मैं खराई से चलता रहा हूं, और मेरा भरोसा यहोवा पर अटल बना है।

2     हे यहोवा, मुझ को जांच और परख; मेरे मन और हृदय को परख।

3     क्योंकि तेरी करूणा तो मेरी आंखों के साम्हने है, और मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलता रहा हूं॥

5     मैं कुकर्मियों की संगति से घृणा रखता हूं, और दुष्टों के संग न बैठूंगा॥

11     परन्तु मैं तो खराई से चलता रहूंगा। तू मुझे छुड़ा ले, और मुझ पर अनुग्रह कर।

12     मेरे पांव चौरस स्थान में स्थिर है; सभाओं में मैं यहोवा को धन्य कहा करूंगा॥

1. Psalm 26 : 1-3, 5, 11, 12

1     Judge me, O Lord; for I have walked in mine integrity: I have trusted also in the Lord; therefore I shall not slide.

2     Examine me, O Lord, and prove me; try my reins and my heart.

3     For thy lovingkindness is before mine eyes: and I have walked in thy truth.

5     I have hated the congregation of evil doers; and will not sit with the wicked.

11     But as for me, I will walk in mine integrity: redeem me, and be merciful unto me.

12     My foot standeth in an even place: in the congregations will I bless the Lord.

2. निर्गमन 19: 17, 19

17     तब मूसा लोगों को परमेश्वर से भेंट करने के लिये छावनी से निकाल ले गया; और वे पर्वत के नीचे खड़े हुए।

19     फिर जब नरसिंगे का शब्द बढ़ता और बहुत भारी होता गया, तब मूसा बोला, और परमेश्वर ने वाणी सुनाकर उसको उत्तर दिया।

2. Exodus 19 : 17, 19

17     And Moses brought forth the people out of the camp to meet with God; and they stood at the nether part of the mount.

19     And when the voice of the trumpet sounded long, and waxed louder and louder, Moses spake, and God answered him by a voice.

3. निर्गमन 20: 1-3, 16

1     तब परमेश्वर ने ये सब वचन कहे,

2     कि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है॥

3     तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर करके न मानना॥

16     तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना॥

3. Exodus 20 : 1-3, 16

1     And God spake all these words, saying,

2     I am the Lord thy God, which have brought thee out of the land of Egypt, out of the house of bondage.

3     Thou shalt have no other gods before me.

16     Thou shalt not bear false witness against thy neighbour.

4. याकूब 3 : 2, 10-13

2     इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।

10     एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।

11     हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए।

12     क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता॥

13     तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है।

4. James 3 : 2, 10-13

2     For in many things we offend all. If any man offend not in word, the same is a perfect man, and able also to bridle the whole body.

10     Out of the same mouth proceedeth blessing and cursing. My brethren, these things ought not so to be.

11     Doth a fountain send forth at the same place sweet water and bitter?

12     Can the fig tree, my brethren, bear olive berries? either a vine, figs? so can no fountain both yield salt water and fresh.

13     Who is a wise man and endued with knowledge among you? let him shew out of a good conversation his works with meekness of wisdom.

5. यहोशू 24 : 14

14     इसलिये अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार और मिस्र में करते थे, उन्हें दूर करके यहोवा की सेवा करो।

5. Joshua 24 : 14

14     Now therefore fear the Lord, and serve him in sincerity and in truth: and put away the gods which your fathers served on the other side of the flood, and in Egypt; and serve ye the Lord.

6. मत्ती 11 : 1, 15, 19, 20

1     जब यीशु अपने बारह चेलों को आज्ञा दे चुका, तो वह उन के नगरों में उपदेश और प्रचार करने को वहां से चला गया॥

15     जिस के सुनने के कान हों, वह सुन ले।

19     मनुष्य का पुत्र खाता-पीता आया, और वे कहते हैं कि देखो, पेटू और पियक्कड़ मनुष्य, महसूल लेने वालों और पापियों का मित्र; पर ज्ञान अपने कामों में सच्चा ठहराया गया है।

20     तब वह उन नगरों को उलाहना देने लगा, जिन में उस ने बहुतेरे सामर्थ के काम किए थे; क्योंकि उन्होंने अपना मन नहीं फिराया था।

6. Matthew 11 : 1, 15, 19, 20

1     And it came to pass, when Jesus had made an end of commanding his twelve disciples, he departed thence to teach and to preach in their cities.

15     He that hath ears to hear, let him hear.

19     The Son of man came eating and drinking, and they say, Behold a man gluttonous, and a winebibber, a friend of publicans and sinners. But wisdom is justified of her children.

20     Then began he to upbraid the cities wherein most of his mighty works were done, because they repented not:

7. मत्ती 23: 23, 27, 28

23     हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते।

27     हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हिड्डयों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं।

28     इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो॥

7. Matthew 23 : 23, 27, 28

23     Woe unto you, scribes and Pharisees, hypocrites! for ye pay tithe of mint and anise and cummin, and have omitted the weightier matters of the law, judgment, mercy, and faith: these ought ye to have done, and not to leave the other undone.

27     Woe unto you, scribes and Pharisees, hypocrites! for ye are like unto whited sepulchres, which indeed appear beautiful outward, but are within full of dead men’s bones, and of all uncleanness.

28     Even so ye also outwardly appear righteous unto men, but within ye are full of hypocrisy and iniquity.

8. मत्ती 24: 4 (लेना)-7, 10-13

4     सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए।

5     क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे।

6     तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अन्त न होगा।

7     क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईंडोल होंगे।

10     तब बहुतेरे ठोकर खाएंगे, और एक दूसरे से बैर रखेंगे।

11     और बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएंगे।

12     और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा हो जाएगा।

13     परन्तु जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।

8. Matthew 24 : 4 (Take)-7, 10-13

4     Take heed that no man deceive you.

5     For many shall come in my name, saying, I am Christ; and shall deceive many.

6     And ye shall hear of wars and rumours of wars: see that ye be not troubled: for all these things must come to pass, but the end is not yet.

7     For nation shall rise against nation, and kingdom against kingdom: and there shall be famines, and pestilences, and earthquakes, in divers places.

10     And then shall many be offended, and shall betray one another, and shall hate one another.

11     And many false prophets shall rise, and shall deceive many.

12     And because iniquity shall abound, the love of many shall wax cold.

13     But he that shall endure unto the end, the same shall be saved.

9. प्रकाशित वाक्य 18: 1, 2 (से 4th ,), 4, 5, 21

1     इस के बाद मैं ने एक स्वर्गदूत को स्वर्ग से उतरते देखा, जिस का बड़ा अधिकार था; और पृथ्वी उसके तेज से प्रज्वलित हो गई।

2     उस ने ऊंचे शबद से पुकार कर कहा, कि गिर गया बड़ा बाबुल गिर गया है: और दुष्टात्माओं का निवास, और हर एक अशुद्ध आत्मा का अड्डा, और एक अशुद्ध और घृणित पक्षी का अड्डा हो गया।

4     फिर मैं ने स्वर्ग से किसी और का शब्द सुना, कि हे मेरे लोगों, उस में से निकल आओ; कि तुम उसके पापों में भागी न हो, और उस की विपत्तियों में से कोई तुम पर आ न पड़े।

5     क्योंकि उसके पाप स्वर्ग तक पहुंच गए हैं, और उसके अधर्म परमेश्वर को स्मरण आए हैं।

21     फिर एक बलवन्त स्वर्गदूत ने बड़ी चक्की के पाट के समान एक पत्थर उठाया, और यह कह कर समुद्र में फेंक दिया, कि बड़ा नगर बाबुल ऐसे ही बड़े बल से गिराया जाएगा, और फिर कभी उसका पता न मिलेगा।

9. Revelation 18 : 1, 2 (to 4th ,), 4, 5, 21

1     And after these things I saw another angel come down from heaven, having great power; and the earth was lightened with his glory.

2     And he cried mightily with a strong voice, saying, Babylon the great is fallen, is fallen,

4     And I heard another voice from heaven, saying, Come out of her, my people, that ye be not partakers of her sins, and that ye receive not of her plagues.

5     For her sins have reached unto heaven, and God hath remembered her iniquities.

21     And a mighty angel took up a stone like a great millstone, and cast it into the sea, saying, Thus with violence shall that great city Babylon be thrown down, and shall be found no more at all.

10. प्रकाशित वाक्य 20: 1-3 (से:)

1     फिर मै ने एक स्वर्गदूत को स्वर्ग से उतरते देखा; जिस के हाथ में अथाह कुंड की कुंजी, और एक बड़ी जंजीर थी।

2     और उस ने उस अजगर, अर्थात पुराने सांप को, जो इब्लीस और शैतान है; पकड़ के हजार वर्ष के लिये बान्ध दिया।

3     और उसे अथाह कुंड में डाल कर बन्द कर दिया और उस पर मुहर कर दी, कि वह हजार वर्ष के पूरे होने तक जाति जाति के लोगों को फिर न भरमाए; इस के बाद अवश्य है, कि थोड़ी देर के लिये फिर खोला जाए॥

10. Revelation 20 : 1-3 (to :)

1     And I saw an angel come down from heaven, having the key of the bottomless pit and a great chain in his hand.

2     And he laid hold on the dragon, that old serpent, which is the Devil, and Satan, and bound him a thousand years,

3     And cast him into the bottomless pit, and shut him up, and set a seal upon him, that he should deceive the nations no more, till the thousand years should be fulfilled:

11. प्रकाशित वाक्य 19: 1, 4-6

1     इस के बाद मैं ने स्वर्ग में मानो बड़ी भीड़ को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि हल्लिलूय्याह! उद्धार, और महिमा, और सामर्थ हमारे परमेश्वर ही की है।

4     और चौबीसों प्राचीनों और चारों प्राणियों ने गिर कर परमेश्वर को दण्डवत् किया; जो सिंहासन पर बैठा था, और कहा, आमीन, हल्लिलूय्याह!

5     और सिंहासन में से एक शब्द निकला, कि हे हमारे परमेश्वर से सब डरने वाले दासों, क्या छोटे, क्या बड़े; तुम सब उस की स्तुति करो।

6     फिर मैं ने बड़ी भीड़ का सा, और बहुत जल का सा शब्द, और गर्जनों का सा बड़ा शब्द सुना, कि हल्लिलूय्याह! इसलिये कि प्रभु हमारा परमेश्वर, सर्वशक्तिमान राज्य करता है।

11. Revelation 19 : 1, 4-6

1     And after these things I heard a great voice of much people in heaven, saying, Alleluia; Salvation, and glory, and honour, and power, unto the Lord our God:

4     And the four and twenty elders and the four beasts fell down and worshipped God that sat on the throne, saying, Amen; Alleluia.

5     And a voice came out of the throne, saying, Praise our God, all ye his servants, and ye that fear him, both small and great.

6     And I heard as it were the voice of a great multitude, and as the voice of many waters, and as the voice of mighty thunderings, saying, Alleluia: for the Lord God omnipotent reigneth.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 380 : 4 (सत्य)-7

सत्य की हमेशा जीत होती है। रोग और पाप अपने ही भार से गिरते हैं। सत्य युगों की चट्टान है, कोने का पत्थर है, ''परंतु जिस पर वह गिरेगा, उसे वह पीस डालेगा॥''

1. 380 : 4 (Truth)-7

Truth is always the victor. Sickness and sin fall by their own weight. Truth is the rock of ages, the headstone of the corner, "but on whomsoever it shall fall, it will grind him to powder."

2. 252 : 7-14

जब मिथ्या मानवीय विश्वासों को अपने मिथ्यात्व का थोड़ा सा भी पता चलता है, तो वे मिटने लगते हैं। त्रुटि और उसके कार्यों का ज्ञान सत्य की उस समझ से पहले होना चाहिए जो त्रुटि को नष्ट कर देता है, जब तक कि संपूर्ण नश्वर, भौतिक त्रुटि अंत में गायब नहीं हो जाती है, और शाश्वत सत्य, मनुष्य द्वारा और आत्मा द्वारा बनाया गया, उसकी सच्ची समानता के रूप में समझा और पहचाना जाता है।

2. 252 : 7-14

When false human beliefs learn even a little of their own falsity, they begin to disappear. A knowledge of error and of its operations must precede that understanding of Truth which destroys error, until the entire mortal, material error finally disappears, and the eternal verity, man created by and of Spirit, is understood and recognized as the true likeness of his Maker.

3. 129 : 1 (में)-6

…क्रिश्चियन साइंस में, कोई मतभेद या विरोधाभास नहीं हैं क्योंकि इसका तर्क उतना ही सामंजस्यपूर्ण है जितना कि सटीक रूप से बताए गए न्यायवाक्य का तर्क या अंकगणित में ठीक से गणना की गई राशि। सत्य हमेशा सत्य होता है, और आधार या निष्कर्ष में कोई त्रुटि बर्दाश्त नहीं कर सकता।

3. 129 : 1 (in)-6

…in Christian Science there are no discords nor contradictions, because its logic is as harmonious as the reasoning of an accurately stated syllogism or of a properly computed sum in arithmetic. Truth is ever truthful, and can tolerate no error in premise or conclusion.

4. 72 : 9 (जैसा)-12, 30-32

जैसे प्रकाश अन्धकार को नष्ट कर देता है और अन्धकार के स्थान पर सब प्रकाश हो जाता है, वैसे ही (परम विज्ञान में) आत्मा या ईश्वर ही मनुष्य को सत्य दाता है।

व्यक्तिगत अंतर्संबंध नहीं बल्कि ईश्वरीय कानून पृथ्वी और मानवता के लिए सत्य, स्वास्थ्य और सद्भाव का संचारक है।

4. 72 : 9 (As)-12, 30-32

As light destroys darkness and in the place of darkness all is light, so (in absolute Science) Soul, or God, is the only truth-giver to man.

Not personal intercommunion but divine law is the communicator of truth, health, and harmony to earth and humanity.

5. 7 : 32-9

पाखंड धर्म के लिए घातक है।

एक शाब्दिक प्रार्थना आत्म-औचित्य की एक शांत भावना प्रदान कर सकती है, हालांकि यह पापी को पाखंडी बना देती है। हमें कभी भी सच्चे हृदय से निराश होने की आवश्यकता नहीं है; लेकिन उन लोगों के लिए बहुत कम उम्मीद है जो अपनी दुष्टता के साथ अचानक आमने-सामने आते हैं और फिर इसे छिपाने की कोशिश करते हैं। उनकी प्रार्थनाएं सूचक हैं जो उनके चरित्र के अनुरूप नहीं हैं। वे पाप के साथ गुप्त संगति रखते हैं, और इस तरह के बाहरी लोगों के बारे में यीशु ने कहा है, "सफेदी से भरी हुई कब्रों की तरह ... सभी अशुद्धता से भरा हुआ।"

5. 7 : 32-9

Hypocrisy is fatal to religion.

A wordy prayer may afford a quiet sense of self-justification, though it makes the sinner a hypocrite. We never need to despair of an honest heart; but there is little hope for those who come only spasmodically face to face with their wickedness and then seek to hide it. Their prayers are indexes which do not correspond with their character. They hold secret fellowship with sin, and such externals are spoken of by Jesus as "like unto whited sepulchres ... full ... of all uncleanness."

6. 52 : 29-32

फरीसियों के आरोप उनके धर्म के समान ही आत्म-विरोधाभासी थे। धर्मांध, लुटेरे, कपटी, यीशु को खाऊ और शराब पीने वाला कहते थे।

6. 52 : 29-32

The accusations of the Pharisees were as self-contradictory as their religion. The bigot, the debauchee, the hypocrite, called Jesus a glutton and a wine-bibber.

7. 53 : 8-10, 16-24

जीसस की प्रतिष्ठा उनके चरित्र के बिल्कुल विपरीत थी। क्यों? क्योंकि यीशु के ईश्वरीय सिद्धांत और व्यवहार को गलत समझा गया था।

संसार उस बेचैनी की सही व्याख्या नहीं कर सका जो यीशु ने प्रेरित की और आध्यात्मिक आशीषें जो ऐसी बेचैनी से प्रवाहित हो सकती हैं। विज्ञान सदमा का कारण दिखाता है जो अक्सर सत्य द्वारा उत्पन्न होता है - अर्थात्, यह सदमा व्यक्ति और सत्य के बीच बड़ी दूरी से उत्पन्न होता है। पतरस की तरह, हमें सच्चाई को नकारने या उस आजीवन बलिदान का उपहास करने के बजाय जो अच्छाई बुराई के विनाश के लिए करती है, चेतावनी पर रोना चाहिए।

7. 53 : 8-10, 16-24

The reputation of Jesus was the very opposite of his character. Why? Because the divine Principle and practice of Jesus were misunderstood.

The world could not interpret aright the discomfort which Jesus inspired and the spiritual blessings which might flow from such discomfort. Science shows the cause of the shock so often produced by the truth, — namely, that this shock arises from the great distance between the individual and Truth. Like Peter, we should weep over the warning, instead of denying the truth or mocking the lifelong sacrifice which goodness makes for the destruction of evil.

8. 446 : 18 (ए)-20, 30-32

एक गलत मकसद में हार शामिल है। मन की चिकित्सा के विज्ञान में, ईमानदार होना अत्यावश्यक है, क्योंकि जीत अपरिवर्तनीय अधिकार के पक्ष में है।

अधर्म को ढँकने से समृद्धि और किसी भी कारण की अंतिम विजय को रोका जा सकेगा। त्रुटि को मिटाने की अज्ञानता अक्सर आपको इसके दुरुपयोग के अधीन करती है।

8. 446 : 18 (A)-20, 30-32

A wrong motive involves defeat. In the Science of Mind-healing, it is imperative to be honest, for victory rests on the side of immutable right.

Covering iniquity will prevent prosperity and the ultimate triumph of any cause. Ignorance of the error to be eradicated oftentimes subjects you to its abuse.

9. 447 : 20-29

उनके सभी रूपों में बुराई और बीमारी के दावों को बेनकाब और उनकी निंदा करें, लेकिन उनमें कोई वास्तविकता का एहसास न करें। एक पापी को केवल यह आश्वासन देकर सुधारा नहीं जाता है कि वह पापी नहीं हो सकता क्योंकि कोई पाप नहीं है। पाप के दावे को कम करने के लिए, आपको इसका पता लगाना होगा, मुखौटा हटाना होगा, भ्रम को इंगित करना होगा, और इस तरह पाप पर विजय प्राप्त करनी होगी और इस तरह इसकी असत्यता को साबित करना होगा। बीमार केवल यह घोषित करने से ठीक नहीं होते कि कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह जानने से कि कोई बीमारी नहीं है।

9. 447 : 20-29

Expose and denounce the claims of evil and disease in all their forms, but realize no reality in them. A sinner is not reformed merely by assuring him that he cannot be a sinner because there is no sin. To put down the claim of sin, you must detect it, remove the mask, point out the illusion, and thus get the victory over sin and so prove its unreality. The sick are not healed merely by declaring there is no sickness, but by knowing that there is none.

10. 225 : 5-13

आप जान सकते हैं कि पहला सत्य अपने अनुयायियों की पवित्रता और ईमानदारी से कब आगे बढ़ता है। इस प्रकार यह है कि समय की स्वतंत्रता के बैनर पर मार्च का आयोजन होता है। इस दुनिया की शक्तियाँ लड़ेंगी, और अपने प्रहरी को आज्ञा देंगी कि जब तक वह अपने सिस्टम की सदस्यता न ले, तब तक सच्चाई को पहरा न दें; लेकिन नुकीले चाकू की ओर ध्यान न देकर विज्ञान मार्च करता है। हमेशा कुछ खटपट होती है, लेकिन सच्चाई के मानक के लिए एक रैली है।

10. 225 : 5-13

You may know when first Truth leads by the fewness and faithfulness of its followers. Thus it is that the march of time bears onward freedom's banner. The powers of this world will fight, and will command their sentinels not to let truth pass the guard until it subscribes to their systems; but Science, heeding not the pointed bayonet, marches on. There is always some tumult, but there is a rallying to truth's standard.

11. 458 : 23-31

ईसाई वैज्ञानिक वैज्ञानिक ईश्वरीय कानून को दर्शाता है, इस प्रकार यह स्वयं के लिए एक कानून बन जाता है। वह किसी आदमी को हिंसा नहीं करता। न ही वह झूठा अभियुक्त है। साइंटिस्ट बुद्धिमानी से अपने पाठ्यक्रम को आकार देते हैं, और ईश्वरीय मन की अग्रणी का अनुसरण करने में ईमानदार और सुसंगत हैं। उसे जीवित रहने के साथ-साथ उपचार और शिक्षा के माध्यम से साबित करना होगा कि मसीह का मार्ग एकमात्र ऐसा है जिसके द्वारा नश्वर लोगों को पाप और बीमारी से बचाया जाता है।

11. 458 : 23-31

The Christianly scientific man reflects the divine law, thus becoming a law unto himself. He does violence to no man. Neither is he a false accuser. The Christian Scientist wisely shapes his course, and is honest and consistent in following the leadings of divine Mind. He must prove, through living as well as healing and teaching, that Christ's way is the only one by which mortals are radically saved from sin and sickness.

12. 453 : 16 (ईमानदारी)-23

ईमानदारी आध्यात्मिक शक्ति है। बेईमानी मानवीय कमजोरी है, जो दैवीय सहायता से वंचित है। आप पाप को उजागर करते हैं, चोट पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि भौतिक व्यक्ति को आशीर्वाद देने के लिए; और नेक नीयत का प्रतिफल होता है। छिपा हुआ पाप ऊंचे स्थानों पर आत्मिक दुष्टता है। इस विज्ञान में बहाना करने वाला ईश्वर को धन्यवाद देता है कि कोई बुराई नहीं है, फिर भी अच्छाई के नाम पर बुराई की सेवा करता है।

12. 453 : 16(Honesty)-23

Honesty is spiritual power. Dishonesty is human weakness, which forfeits divine help. You uncover sin, not in order to injure, but in order to bless the corporeal man; and a right motive has its reward. Hidden sin is spiritual wickedness in high places. The masquerader in this Science thanks God that there is no evil, yet serves evil in the name of good.

13. 581 : 17-22

बेबीलोन स्व-विनाशकारी त्रुटि; एक राज्य अपने आप में विभाजित है, जो खड़ा नहीं हो सकता; भौतिक ज्ञान।

पाँच भौतिक इन्द्रियों से प्राप्त प्रमाणों के आधार पर जितना ऊँचा मिथ्या ज्ञान निर्मित होता है, उतना ही भ्रम उत्पन्न होता है और उसकी संरचना का पतन निश्चित होता है।

13. 581 : 17-22

Babel. Self-destroying error; a kingdom divided against itself, which cannot stand; material knowledge.

The higher false knowledge builds on the basis of evidence obtained from the five corporeal senses, the more confusion ensues, and the more certain is the downfall of its structure.

14. 567 : 18-23

वह झूठा दावा - वह प्राचीन मान्यता, वह पुरानी नागिन जिसका नाम शैतान (बुराई) है, यह दावा करते हुए कि पुरुषों को लाभ पहुंचाने या उन्हें घायल करने के लिए या तो बुद्धि में है - शुद्ध भ्रम है, लाल ड्रैगन; और यह क्राइस्ट, सत्य, आध्यात्मिक विचार द्वारा डाली गई है, और इसलिए शक्तिहीन साबित हुई है।

14. 567 : 18-23

That false claim — that ancient belief, that old serpent whose name is devil (evil), claiming that there is intelligence in matter either to benefit or to injure men — is pure delusion, the red dragon; and it is cast out by Christ, Truth, the spiritual idea, and so proved to be powerless.

15. 571 : 22-2

ट्रॉप और रूपक के माध्यम से, रेवलेटर, आत्मा का अमर मुंशी और एक सच्चे आदर्शवाद, वह दर्पण प्रस्तुत करता है जिसमें नश्वर लोग अपनी छवि देख सकते हैं। महत्वपूर्ण आकृतियों में, वह उन विचारों को दर्शाता है जो वह नश्वर मन में देखता है। इस प्रकार वह पाप के अहंकार को धिक्कारता है, और उसके विनाश का पूर्वाभास करता है। अपनी आध्यात्मिक शक्ति के साथ, उन्होंने महिमा के द्वार खोल दिए हैं, और पाप, जादू-टोना, वासना और पाखंड को पछाड़ते हुए दिव्य विज्ञान की उदात्त भव्यता के साथ बुतपरस्ती की रात को रोशन कर दिया है। वह पगड़ी और राजदण्ड छीन लेता है। वह शुद्ध और निर्मल धर्म को सिंहासन पर बिठाता है, और केवल उन्हीं को ऊँचे पर उठाता है, जिन्होंने आज्ञाकारिता और कष्ट सहते हुए अपने वस्त्र सफेद कर लिए हैं।

15. 571 : 22-2

Through trope and metaphor, the Revelator, immortal scribe of Spirit and of a true idealism, furnishes the mirror in which mortals may see their own image. In significant figures he depicts the thoughts which he beholds in mortal mind. Thus he rebukes the conceit of sin, and fore-shadows its doom. With his spiritual strength, he has opened wide the gates of glory, and illumined the night of paganism with the sublime grandeur of divine Science, outshining sin, sorcery, lust, and hypocrisy. He takes away mitre and sceptre. He enthrones pure and undefiled religion, and lifts on high only those who have washed their robes white in obedience and suffering.

16. 118 : 10-12

युग बीत जाते हैं, लेकिन सत्य का यह उत्थान कभी काम पर होता है। इसे त्रुटि के पूरे द्रव्यमान को नष्ट करना चाहिए, और इसलिए मनुष्य की आध्यात्मिक स्वतंत्रता में अनंत काल तक महिमामंडित किया जाना चाहिए।

16. 118 : 10-12

Ages pass, but this leaven of Truth is ever at work. It must destroy the entire mass of error, and so be eternally glorified in man's spiritual freedom.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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