रविवार 19 मई, 2024



विषयनश्वर और अमर

SubjectMortals And Immortals

वर्ण पाठ: स्वर्ण पाठ: रोमियो 8: 14

"इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं।"



Golden Text: Romans 8 : 14

For as many as are led by the Spirit of God, they are the sons of God.




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उत्तरदायी अध्ययन: कुलुस्सियों 1: 1, 2, 9-13


1     पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से।

2     मसीह में उन पवित्र और विश्वासी भाइयों के नाम जो कुलुस्से में रहते हैं॥ हमारे पिता परमेश्वर की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति प्राप्त होती रहे॥

9     इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।

10     ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।

11     और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।

12     और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।

13     उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।

Responsive Reading: Colossians 1 : 1, 2, 9-13

1.     Paul, an apostle of Jesus Christ by the will of God, and Timotheus our brother,

2.     To the saints and faithful brethren in Christ.

9.     For this cause we also, since the day we heard it, do not cease to pray for you, and to desire that ye might be filled with the knowledge of his will in all wisdom and spiritual understanding;

10.     That ye might walk worthy of the Lord unto all pleasing, being fruitful in every good work, and increasing in the knowledge of God;

11.     Strengthened with all might, according to his glorious power, unto all patience and longsuffering with joyfulness;

12.     Giving thanks unto the Father, which hath made us meet to be partakers of the inheritance of the saints in light:

13.     Who hath delivered us from the power of darkness, and hath translated us into the kingdom of his dear Son.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. मत्ती 4: 23 (से 3rd,)

23     और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन की सभाओं में उपदेश करता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता।

1. Matthew 4 : 23 (to 3rd ,)

23     And Jesus went about all Galilee, teaching in their synagogues, and preaching the gospel of the kingdom,

2. मत्ती 5: 2, 5, 8

2     और वह अपना मुंह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने लगा,

5     धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।

8     धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।

2. Matthew 5 : 2, 5, 8

2     And he opened his mouth, and taught them, saying,

5     Blessed are the meek: for they shall inherit the earth.

8     Blessed are the pure in heart: for they shall see God.

3. मत्ती 18: 2-4

2     इस पर उस ने एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया।

3     और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे।

4     जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्वर्ग के राज्य में बड़ा होगा।

3. Matthew 18 : 2-4

2     And Jesus called a little child unto him, and set him in the midst of them,

3     And said, Verily I say unto you, Except ye be converted, and become as little children, ye shall not enter into the kingdom of heaven.

4     Whosoever therefore shall humble himself as this little child, the same is greatest in the kingdom of heaven.

4. मत्ती 19: 13, 14

13     तब लोग बालकों को उसके पास लाए, कि वह उन पर हाथ रखे और प्रार्थना करे; पर चेलों ने उन्हें डांटा।

14     यीशु ने कहा, बालकों को मेरे पास आने दो: और उन्हें मना न करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है।

4. Matthew 19 : 13, 14

13     Then were there brought unto him little children, that he should put his hands on them, and pray: and the disciples rebuked them.

14     But Jesus said, Suffer little children, and forbid them not, to come unto me: for of such is the kingdom of heaven.

5. 1 शमूएल 1: 1 (से 3rd,), 2, 10, 11 (से 8th,), 19 (और एलकाना), 20, 24-26 (से 1st,), 27, 28 (से 1st.)

1     एप्रैम के पहाड़ी देश के रामतैम सोपीम नाम नगर का निवासी एल्काना नाम पुरूष था।

2     और उसके दो पत्नियां थीं; एक का तो नाम हन्ना और दूसरी का पनिन्ना था। और पनिन्ना के तो बालक हुए, परन्तु हन्ना के कोई बालक न हुआ।

10     और यह मन में व्याकुल हो कर यहोवा से प्रार्थना करने और बिलख बिलखकर रोने लगी।

11     और उसने यह मन्नत मानी, कि हे सेनाओं के यहोवा, यदि तू अपनी दासी के दु: ख पर सचमुच दृष्टि करे, और मेरी सुधि ले, और अपनी दासी को भूल न जाए, और अपनी दासी को पुत्र दे, तो मैं उसे उसके जीवन भर के लिये यहोवा को अर्पण करूंगी, और उसके सिर पर छुरा फिरने न पाएगा।

19     … और एलकाना अपनी स्त्री हन्ना के पास गया, और यहोवा ने उसकी सुधि ली.

20     तब हन्ना गर्भवती हुई और समय पर उसके एक पुत्र हुआ, और उसका नाम शमूएल रखा, क्योंकि वह कहने लगी, मैं ने यहोवा से मांगकर इसे पाया है।

24     जब उसने उसका दूध छुड़ाया तब वह उसको संग ले गई, और तीन बछड़े, और एपा भर आटा, और कुप्पी भर दाखमधु भी ले गई, और उस लड़के को शीलो में यहोवा के भवन में पहुंचा दिया; उस समय वह लड़का ही था।

25     और उन्होंने बछड़ा बलि करके बालक को एली के पास पहुंचा दिया।

26     फिर उसने कहा।

27     यह वही बालक है जिसके लिये मैं ने प्रार्थना की थी; और यहोवा ने मुझे मुंह मांगा वर दिया है।

28     इसी लिये मैं भी उसे यहोवा को अर्पण कर देती हूं; कि यह अपने जीवन भर यहोवा ही का बना रहे। तब उसने वहीं यहोवा को दण्डवत किया॥

5. I Samuel 1 : 1 (to 3rd ,), 2, 10, 11 (to 8th ,), 19 (and Elkanah), 20, 24-26 (to 1st ,), 27, 28 (to 1st .)

1     Now there was a certain man of Ramathaim-zophim, of mount Ephraim, and his name was Elkanah,

2     And he had two wives; the name of the one was Hannah, and the name of the other Peninnah: and Peninnah had children, but Hannah had no children.

10     And she was in bitterness of soul, and prayed unto the Lord, and wept sore.

11     And she vowed a vow, and said, O Lord of hosts, if thou wilt indeed look on the affliction of thine handmaid, and remember me, and not forget thine handmaid, but wilt give unto thine handmaid a man child, then I will give him unto the Lord all the days of his life,

19     …and Elkanah knew Hannah his wife; and the Lord remembered her.

20     Wherefore it came to pass, when the time was come about after Hannah had conceived, that she bare a son, and called his name Samuel, saying, Because I have asked him of the Lord.

24     And when she had weaned him, she took him up with her, with three bullocks, and one ephah of flour, and a bottle of wine, and brought him unto the house of the Lord in Shiloh: and the child was young.

25     And they slew a bullock, and brought the child to Eli.

26     And she said,

27     For this child I prayed; and the Lord hath given me my petition which I asked of him:

28     Therefore also I have lent him to the Lord; as long as he liveth he shall be lent to the Lord.

6. 1 शमूएल 3: 1, 2 (से 2nd,), 3 (और शमूएल)-10, 19

1     और वह बालक शमूएल एली के साम्हने यहोवा की सेवा टहल करता था। और उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था; और दर्शन कम मिलता था।

2     और उस समय ऐसा हुआ कि जब वह अपने स्थान में लेटा हुआ था,

3     और शमूएल यहोवा के मन्दिर में जहाँ परमेश्वर का सन्दूक था लेटा था;

4     तब यहोवा ने शमूएल को पुकारा; और उसने कहा, क्या आज्ञा!

5     तब उसने एली के पास दौड़कर कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। वह बोला, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह। तो वह जा कर लेट गया।

6     तब यहोवा ने फिर पुकार के कहा, हे शमूएल! शमूएल उठ कर एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। उसने कहा, हे मेरे बेटे, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह।

7     उस समय तक तो शमूएल यहोवा को नहीं पहचानता था, और न तो यहोवा का वचन ही उस पर प्रगट हुआ था।

8     फिर तीसरी बार यहोवा ने शमूएल को पुकारा। और वह उठके एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। तब एली ने समझ लिया कि इस बालक को यहोवा ने पुकारा है।

9     इसलिये एली ने शमूएल से कहा, जा लेट रहे; और यदि वह तुझे फिर पुकारे, तो तू कहना, कि हे यहोवा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है तब शमूएल अपने स्थान पर जा कर लेट गया।

10     तब यहोवा आ खड़ा हुआ, और पहिले की नाईं पुकारा, शमूएल! शमूएल! शमूएल ने कहा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।

19     और शमूएल बड़ा होता गया, और यहोवा उसके संग रहा, और उसने उसकी कोई भी बात निष्फल होने नहीं दी।

6. I Samuel 3 : 1, 2 (to 2nd ,), 3 (and Samuel)-10, 19

1     And the child Samuel ministered unto the Lord before Eli. And the word of the Lord was precious in those days; there was no open vision.

2     And it came to pass at that time, when Eli was laid down in his place,

3     …and Samuel was laid down to sleep;

4     That the Lord called Samuel: and he answered, Here am I.

5     And he ran unto Eli, and said, Here am I; for thou calledst me. And he said, I called not; lie down again. And he went and lay down.

6     And the Lord called yet again, Samuel. And Samuel arose and went to Eli, and said, Here am I; for thou didst call me. And he answered, I called not, my son; lie down again.

7      Now Samuel did not yet know the Lord, neither was the word of the Lord yet revealed unto him.

8     And the Lord called Samuel again the third time. And he arose and went to Eli, and said, Here am I; for thou didst call me. And Eli perceived that the Lord had called the child.

9     Therefore Eli said unto Samuel, Go, lie down: and it shall be, if he call thee, that thou shalt say, Speak, Lord; for thy servant heareth. So Samuel went and lay down in his place.

10     And the Lord came, and stood, and called as at other times, Samuel, Samuel. Then Samuel answered, Speak; for thy servant heareth.

19     And Samuel grew, and the Lord was with him, and did let none of his words fall to the ground.

7. यूहन्ना 3: 1-5

1     फरीसियों में से नीकुदेमुस नाम एक मनुष्य था, जो यहूदियों का सरदार था।

2     उस ने रात को यीशु के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, हम जानते हैं, कि तू परमेश्वर की आरे से गुरू हो कर आया है; क्योंकि कोई इन चिन्हों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो, तो नहीं दिखा सकता।

3     यीशु ने उस को उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।

4     नीकुदेमुस ने उस से कहा, मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो क्योंकर जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दुसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?

5     यीशु ने उत्तर दिया, कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं; जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।

7. John 3 : 1-5

1     There was a man of the Pharisees, named Nicodemus, a ruler of the Jews:

2     The same came to Jesus by night, and said unto him, Rabbi, we know that thou art a teacher come from God: for no man can do these miracles that thou doest, except God be with him.

3     Jesus answered and said unto him, Verily, verily, I say unto thee, Except a man be born again, he cannot see the kingdom of God.

4     Nicodemus saith unto him, How can a man be born when he is old? can he enter the second time into his mother’s womb, and be born?

5     Jesus answered, Verily, verily, I say unto thee, Except a man be born of water and of the Spirit, he cannot enter into the kingdom of God.

8. इफिसियों 4: 1, 2 (से 1st,), 23

1     सो मैं जो प्रभु में बन्धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।

2     अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो।

23     और अपने मन के आत्मिक स्वभाव में नये बनते जाओ।

8. Ephesians 4 : 1, 2 (to 1st ,), 23

1     I therefore, the prisoner of the Lord, beseech you that ye walk worthy of the vocation wherewith ye are called,

2     With all lowliness and meekness,

23     And be renewed in the spirit of your mind;

9. रोमियो 12: 2

2     और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो॥

9. Romans 12 : 2

2     And be not conformed to this world: but be ye transformed by the renewing of your mind, that ye may prove what is that good, and acceptable, and perfect, will of God.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 63: 5 (में)-11

विज्ञान में मनुष्य आत्मा की संतान है। सुंदर, अच्छा और शुद्ध उसके वंश का गठन करते हैं। उसका मूल, नश्वर की तरह, पाशविक वृत्ति में नहीं है, और न ही वह बुद्धि तक पहुँचने से पहले भौतिक परिस्थितियों से गुजरता है। आत्मा उसका मूल और होने का परम स्रोत है; परमेश्वर उसका पिता है, और जीवन उसके होने का नियम है।

1. 63 : 5 (In)-11

In Science man is the offspring of Spirit. The beautiful, good, and pure constitute his ancestry. His origin is not, like that of mortals, in brute instinct, nor does he pass through material conditions prior to reaching intelligence. Spirit is his primitive and ultimate source of being; God is his Father, and Life is the law of his being.

2. 492: 3-12

सही तर्क के लिए, विचार से पहले केवल एक तथ्य होना चाहिए, अर्थात् आध्यात्मिक अस्तित्व। वास्तव में, कोई अन्य अस्तित्व नहीं है क्योंकि जीवन को इसकी विषमता, मृत्यु दर से एकजुट नहीं किया जा सकता है।

पवित्र होना, समरसता, अमरता है। यह पहले से ही साबित हो गया है कि इस का ज्ञान, यहां तक कि छोटी सी डिग्री में, नश्वर लोगों के भौतिक और नैतिक स्तर को ऊपर उठाएगा, दीर्घायु को बढ़ाएगा, चरित्र को शुद्ध और ऊंचा करेगा। इस प्रकार प्रगति अंततः सभी त्रुटि को नष्ट कर देगी, और अमरता को प्रकाश में लाएगी।

2. 492 : 3-12

For right reasoning there should be but one fact before the thought, namely, spiritual existence. In reality there is no other existence, since Life cannot be united to its unlikeness, mortality.

Being is holiness, harmony, immortality. It is already proved that a knowledge of this, even in small degree, will uplift the physical and moral standard of mortals, will increase longevity, will purify and elevate character. Thus progress will finally destroy all error, and bring immortality to light.

3. 130: 15-25

क्रिश्चियन साइंस, ठीक से समझे जाने पर, मानव मन को उन भौतिक मान्यताओं से वंचित कर देगा जो आध्यात्मिक तथ्यों के विरुद्ध युद्ध करती हैं; और सत्य के लिए जगह बनाने के लिए इन भौतिक मान्यताओं का खंडन और बहिष्कार किया जाना चाहिए। आप पहले से भरे हुए बर्तन की सामग्री में कुछ नहीं जोड़ सकते। पदार्थ में वयस्कों के विश्वास को हिलाने और ईश्वर में विश्वास का एक कण पैदा करने के लिए लंबे समय तक श्रम करना, - शरीर को सामंजस्यपूर्ण बनाने के लिए आत्मा की क्षमता का एक संकेत, - लेखक ने अक्सर छोटे बच्चों के लिए हमारे मास्टर के प्यार को याद किया है, और समझा है कि वास्तव में कितना जैसे कि वे स्वर्गीय राज्य के हैं।

3. 130 : 15-25

Christian Science, properly understood, would disabuse the human mind of material beliefs which war against spiritual facts; and these material beliefs must be denied and cast out to make place for truth. You cannot add to the contents of a vessel already full. Laboring long to shake the adult's faith in matter and to inculcate a grain of faith in God, — an inkling of the ability of Spirit to make the body harmonious, — the author has often remembered our Master's love for little children, and understood how truly such as they belong to the heavenly kingdom.

4. 236: 23-6

माता-पिता को चाहिए कि वे जल्द से जल्द अपने बच्चों को स्वास्थ्य और पवित्रता के सत्य सिखाएं। बच्चे वयस्कों की तुलना में अधिक व्यवहार करने योग्य होते हैं, और वे सरल सत्यों से प्यार करना अधिक आसानी से सीखते हैं जो उन्हें खुश और अच्छा बना देगा।

यीशु छोटे बच्चों को गलत से आज़ादी और सही के प्रति ग्रहणशीलता के कारण प्यार करते थे। जबकि उम्र दो मतों के बीच रुक रही है या झूठी मान्यताओं से जूझ रही है, युवा सत्य की ओर आसान और तेजी से कदम बढ़ाता है।

एक छोटी लड़की, जो कभी-कभार मेरी बातें सुनती थी, ने अपनी उंगली को बुरी तरह जख्मी कर लिया। ऐसा लग रहा था कि उसने इसे नोटिस नहीं किया। इसके बारे में पूछे जाने पर उसने सरलता से उत्तर दिया, "सामग्री में कोई सनसनी नहीं है।" हंसती निगाहों से बंधते हुए, उसने वर्तमान में कहा, "मम्मा, मेरी उंगली थोड़ी खराब नहीं है।"

4. 236 : 23-6

Parents should teach their children at the earliest possible period the truths of health and holiness. Children are more tractable than adults, and learn more readily to love the simple verities that will make them happy and good.

Jesus loved little children because of their freedom from wrong and their receptiveness of right. While age is halting between two opinions or battling with false beliefs, youth makes easy and rapid strides towards Truth.

A little girl, who had occasionally listened to my explanations, badly wounded her finger. She seemed not to notice it. On being questioned about it she answered ingenuously, "There is no sensation in matter." Bounding off with laughing eyes, she presently added, "Mamma, my finger is not a bit sore."

5. 237: 10-22

माता-पिता के अधिक जिद्दी विश्वास और सिद्धांत अक्सर उनके और उनकी संतानों के मन में अच्छे बीज को दबा देते हैं। अंधविश्वास, "हवा के पक्षियों" की तरह, अच्छे बीज को अंकुरित होने से पहले ही छीन लेता है।

बच्चों को उनके पहले पाठों में से सत्य-उपचार, ईसाई विज्ञान पढ़ाया जाना चाहिए, और बीमारी के बारे में सिद्धांतों या विचारों पर चर्चा या मनोरंजन से दूर रहना चाहिए। त्रुटि के अनुभव और उसके कष्टों को रोकने के लिए, अपने बच्चों के मन से पापी या रोगग्रस्त विचारों को दूर रखें। उत्तरार्द्ध को पूर्व के समान सिद्धांत पर बाहर रखा जाना चाहिए। यह ईसाई विज्ञान को जल्दी उपलब्ध कराता है।

5. 237 : 10-22

The more stubborn beliefs and theories of parents often choke the good seed in the minds of themselves and their offspring. Superstition, like "the fowls of the air," snatches away the good seed before it has sprouted.

Children should be taught the Truth-cure, Christian Science, among their first lessons, and kept from discussing or entertaining theories or thoughts about sickness. To prevent the experience of error and its sufferings, keep out of the minds of your children either sinful or diseased thoughts. The latter should be excluded on the same principle as the former. This makes Christian Science early available.

6. 323: 28-6

क्रिश्चियन साइंस का प्रभाव उतना नहीं देखा जाता जितना महसूस किया जाता है। यह स्वयं को बोलने वाले सत्य की "स्थिर, हल्की आवाज" है। हम या तो इस उच्चारण से मुंह मोड़ रहे हैं, या हम इसे सुन रहे हैं और ऊपर जा रहे हैं। छोटे बच्चे के रूप में बनने और नए के लिए पुराने को छोड़ने की इच्छा, रेंडरर्स ने उन्नत विचार के ग्रहणशील होने का सोचा। झूठे स्थलों को छोड़ने की खुशी और उन्हें गायब देखने के लिए खुशी, - यह स्वभाव परम सद्भाव को बढ़ाने में मदद करता है। भाव और आत्म की शुद्धि ही प्रगति का प्रमाण है। “धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।”

6. 323 : 28-6

The effects of Christian Science are not so much seen as felt. It is the "still, small voice" of Truth uttering itself. We are either turning away from this utterance, or we are listening to it and going up higher. Willingness to become as a little child and to leave the old for the new, renders thought receptive of the advanced idea. Gladness to leave the false landmarks and joy to see them disappear, — this disposition helps to precipitate the ultimate harmony. The purification of sense and self is a proof of progress. "Blessed are the pure in heart: for they shall see God."

7. 242: 1-5

पश्चाताप, आध्यात्मिक बपतिस्मा, और उत्थान के माध्यम से, नश्वर अपने भौतिक विश्वासों और झूठी व्यक्तित्व को बंद कर देते हैं। यह केवल समय का सवाल है "कि छोटे से ले कर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे।"

7. 242 : 1-5

Through repentance, spiritual baptism, and regeneration, mortals put off their material beliefs and false individuality. It is only a question of time when "they shall all know Me [God], from the least of them unto the greatest."

8. 240: 19-26, 29-32

यदि मनुष्य प्रगतिशील नहीं हैं, तो पिछली असफलताएँ तब तक दोहराई जाती रहेंगी जब तक कि सभी गलत कार्य मिटा नहीं दिए जाते या सुधार नहीं लिए जाते। यदि वर्तमान में गलत काम से संतुष्ट हैं तो हमें उससे घृणा करना सीखना चाहिए। यदि वर्तमान में आलस्य से संतुष्ट हैं, तो हमें इससे असंतुष्ट भी होना पड़ेगा। याद रखें कि मानव जाति को देर-सबेर, या तो कष्ट सहकर या विज्ञान द्वारा, उस त्रुटि के प्रति आश्वस्त होना होगा जिसे दूर करना है।

पाप की मजदूरी का भुगतान करने की दैवीय पद्धति में किसी के झंझटों को खोलना, और अनुभव से सीखना शामिल है कि कैसे इंद्रिय और आत्मा के बीच विभाजन करना है।

8. 240 : 19-26, 29-32

If mortals are not progressive, past failures will be repeated until all wrong work is effaced or rectified. If at present satisfied with wrong-doing, we must learn to loathe it. If at present content with idleness, we must become dissatisfied with it. Remember that mankind must sooner or later, either by suffering or by Science, be convinced of the error that is to be overcome.

The divine method of paying sin's wages involves unwinding one's snarls, and learning from experience how to divide between sense and Soul.

9. 261: 31-8

हमें अच्छे और मानव जाति को याद करने में अपने शरीर को भूल जाना चाहिए। हर घंटे आदमी की अच्छी मांग, जिसमें होने की समस्या को हल करना। भलाई के प्रति समर्पण मनुष्य की ईश्वर पर निर्भरता को कम नहीं करता, बल्कि उसे बढ़ाता है। न तो अभिषेक परमेश्वर के प्रति मनुष्य के दायित्वों को कम करता है, बल्कि उनसे मिलने की सर्वोपरि आवश्यकता को दर्शाता है। क्रिश्चियन साइंस भगवान की पूर्णता से शून्य है, लेकिन यह उसे पूरी महिमा का वर्णन करता है। "बूढ़े आदमी को उसके कामों से दूर करने" के द्वारा, नश्वर "अमरता को पहिन लेते हैं।"

9. 261 : 31-8

We should forget our bodies in remembering good and the human race. Good demands of man every hour, in which to work out the problem of being. Consecration to good does not lessen man's dependence on God, but heightens it. Neither does consecration diminish man's obligations to God, but shows the paramount necessity of meeting them. Christian Science takes naught from the perfection of God, but it ascribes to Him the entire glory. By putting "off the old man with his deeds," mortals "put on immortality."

10. 476: 9-13, 21-22

ईश्वर मनुष्य का सिद्धांत है, और मनुष्य ईश्वर का विचार है। इसलिए मनुष्य न तो नश्वर है और न ही भौतिक। नश्वर गायब हो जाएंगे, और अमर होंगे, या भगवान की संतान, मनुष्य के एकमात्र और अनन्त सत्य के रूप में दिखाई देंगे।

इसे जानें, नश्वर, और ईमानदारी से मनुष्य की आध्यात्मिक स्थिति की तलाश करें, जो सभी भौतिक स्वार्थ से अप्रासंगिक है।

10. 476 : 9-13, 21-22

God is the Principle of man, and man is the idea of God. Hence man is not mortal nor material. Mortals will disappear, and immortals, or the children of God, will appear as the only and eternal verities of man.

Learn this, O mortal, and earnestly seek the spiritual status of man, which is outside of all material selfhood.

11. 288: 27-1

विज्ञान अमर मानव की गौरवशाली संभावनाओं को प्रकट करता है, नश्वर इंद्रियों द्वारा हमेशा के लिए असीमित।मसीहा में मसीह-तत्व ने उन्हें मार्ग-दर्शन, सत्य और जीवन का मार्ग दिखाया।

शाश्वत सत्य को नष्ट कर देता है जो लगता है कि मनुष्यों ने त्रुटि से सीखा है, और भगवान के बच्चे के रूप में मनुष्य का वास्तविक अस्तित्व प्रकाश में आता है।

11. 288 : 27-1

Science reveals the glorious possibilities of immortal man, forever unlimited by the mortal senses. The Christ-element in the Messiah made him the Way-shower, Truth and Life.

The eternal Truth destroys what mortals seem to have learned from error, and man's real existence as a child of God comes to light.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6