रविवार 18 दिसंबर, 2022



विषयक्या ब्रह्मांड, मनुष्य सहित, परमाणु बल द्वारा विकसित है?

SubjectIs The Universe, Including Man, Evolved By Atomic Force?

वर्ण पाठ: स्वर्ण पाठ: यिर्मयाह 1: 5, 19

"गर्भ में रचने से पहिले ही मैं ने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहिले ही मैं ने तुझे अभिषेक किया; यहोवा की यही वाणी है।"



Golden Text: Jeremiah 1 : 5, 19

Before I formed thee in the belly I knew thee; and before thou camest forth out of the womb I sanctified thee, for I am with thee, saith the Lord.




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उत्तरदायी अध्ययन: भजन संहिता 90: 1, 2 • भजन संहिता 104: 24, 30, 31 • अय्यूब 36: 24, 25 • अय्यूब 37: 14


1     हे प्रभु, तू पीढ़ी से पीढ़ी तक हमारे लिये धाम बना है।

2     इस से पहिले कि पहाड़ उत्पन्न हुए, वा तू ने पृथ्वी और जगत की रचना की, वरन अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही ईश्वर है॥

24     हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।

30     फिर तू अपनी ओर से सांस भेजता है, और वे सिरजे जाते हैं; और तू धरती को नया कर देता है॥

31     यहोवा की महिमा सदा काल बनी रहे, यहोवा अपने कामों से आन्दित होवे!

24     उसके कामों की महिमा और प्रशंसा करने को स्मरण रख, जिसकी प्रशंसा का गीत मनुष्य गाते चले आए हैं।

25     सब मनुष्य उसको ध्यान से देखते आए हैं, और मनुष्य उसे दूर दूर से देखता है।

14     चुपचाप खड़ा रह, और ईश्वर के आश्चर्यकर्मों का विचार कर।

Responsive Reading: Psalm 90 : 1, 2Psalm 104 : 24, 30, 31Job 36 : 24, 25Job 37 : 14

1.     Lord, thou hast been our dwelling place in all generations.

2.     Before the mountains were brought forth, or ever thou hadst formed the earth and the world, even from everlasting to everlasting, thou art God.

24.     O Lord, how manifold are thy works! in wisdom hast thou made them all: the earth is full of thy riches.

30.     Thou sendest forth thy spirit, they are created: and thou renewest the face of the earth.

31.     The glory of the Lord shall endure for ever: the Lord shall rejoice in his works.

24.     Remember that thou magnify his work, which men behold.

25.     Every man may see it; man may behold it afar off.

14.     Stand still, and consider the wondrous works of God.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. नीतिवचन 8: 22, 23

22     यहोवा ने मुझे काम करने के आरम्भ में, वरन अपने प्राचीनकाल के कामों से भी पहिले उत्पन्न किया।

23     मैं सदा से वरन आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि के पहिले ही से ठहराई गई हूं।

1. Proverbs 8 : 22, 23

22     The Lord possessed me in the beginning of his way, before his works of old.

23     I was set up from everlasting, from the beginning, or ever the earth was.

2. भजन संहिता 102: 24 (ो) (से ,), 24 (तेरा), 25, 27 (तुम)

24     हे मेरे ईश्वर ...मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे!

25     आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है।

27     ... तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त नहीं होने का।

2. Psalm 102 : 24 (O) (to ,), 24 (thy), 25, 27 (thou)

24     O my God, … thy years are throughout all generations.

25     Of old hast thou laid the foundation of the earth: and the heavens are the work of thy hands.

27     …thou art the same, and thy years shall have no end.

3. भजन संहिता 148: 2-11

2     हे उसके सब दूतों, उसकी स्तुति करो: हे उसकी सब सेना उसकी स्तुति कर!

3     हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो!

4     हे सब से ऊंचे आकाश, और हे आकाश के ऊपर वाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो।

5     वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये सिरजे गए।

6     और उसने उन को सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है; और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं॥

7     पृथ्वी में से यहोवा की स्तुति करो, हे मगरमच्छों और गहिरे सागर,

8     हे अग्नि और ओलो, हे हिम और कुहरे, हे उसका वचन मानने वाली प्रचण्ड बयार!

9     हे पहाड़ों और सब टीलो, हे फलदाई वृक्षों और सब देवदारों!

10     हे वन- पशुओं और सब घरैलू पशुओं, हे रेंगने वाले जन्तुओं और हे पक्षियों!

11     हे पृथ्वी के राजाओं, और राज्य राज्य के सब लोगों, हे हाकिमों और पृथ्वी के सब न्यायियों!

3. Psalm 148 : 2-11

2     Praise ye him, all his angels: praise ye him, all his hosts.

3     Praise ye him, sun and moon: praise him, all ye stars of light.

4     Praise him, ye heavens of heavens, and ye waters that be above the heavens.

5     Let them praise the name of the Lord: for he commanded, and they were created.

6     He hath also stablished them for ever and ever: he hath made a decree which shall not pass.

7     Praise the Lord from the earth, ye dragons, and all deeps:

8     Fire, and hail; snow, and vapour; stormy wind fulfilling his word:

9     Mountains, and all hills; fruitful trees, and all cedars:

10     Beasts, and all cattle; creeping things, and flying fowl:

11     Kings of the earth, and all people; princes, and all judges of the earth:

4. यूहन्ना 1: 3, 13 (पैदा होना)

3     सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।

13     ... लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

4. John 1 : 3, 13 (born)

3     All things were made by him; and without him was not any thing made that was made.

13     …born, not of blood, nor of the will of the flesh, nor of the will of man, but of God.

5. यूहन्ना 8: 1, 2, 12-14, 25, 31, 32, 42 (इसलिये), 51, 52, 54 (से 1st ,), 56-58

1     परन्तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया।

2     और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा।

12     तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा।

13     फरीसियों ने उस से कहा; तू अपनी गवाही आप देता है; तेरी गवाही ठीक नहीं।

14     यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि यदि मैं अपनी गवाही आप देता हूं, तौभी मेरी गवाही ठीक है, क्योंकि मैं जानता हूं, कि मैं कहां से आया हूं और कहां को जाता हूं परन्तु तुम नहीं जानते कि मैं कहां से आता हूं या कहां को जाता हूं।

25     उन्होंने उस से कहा, तू कौन है यीशु ने उन से कहा, वही हूं जो प्रारम्भ से तुम से कहता आया हूं।

31     तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।

32     और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।

42     ... क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा।

51     मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्त काल तक मृत्यु को न देखेगा।

52     यहूदियों ने उस से कहा, कि अब हम ने जान लिया कि तुझ में दुष्टात्मा है: इब्राहीम मर गया, और भविष्यद्वक्ता भी मर गए हैं और तू कहता है, कि यदि कोई मेरे वचन पर चलेगा तो वह अनन्त काल तक मृत्यु का स्वाद न चखेगा।

54     यीशु ने उत्तर दिया।

56     तुम्हारा पिता इब्राहीम मेरा दिन देखने की आशा से बहुत मगन था; और उस ने देखा, और आनन्द किया।

57     यहूदियों ने उस से कहा, अब तक तू पचास वर्ष का नहीं; फिर भी तू ने इब्राहीम को देखा है?

58     यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूं।

5. John 8 : 1, 2, 12-14, 25, 31, 32, 42 (for), 51, 52, 54 (to 1st ,), 56-58

1     Jesus went unto the mount of Olives.

2     And early in the morning he came again into the temple, and all the people came unto him; and he sat down, and taught them.

12     Then spake Jesus again unto them, saying, I am the light of the world: he that followeth me shall not walk in darkness, but shall have the light of life.

13     The Pharisees therefore said unto him, Thou bearest record of thyself; thy record is not true.

14     Jesus answered and said unto them, Though I bear record of myself, yet my record is true: for I know whence I came, and whither I go; but ye cannot tell whence I come, and whither I go.

25     Then said they unto him, Who art thou? And Jesus saith unto them, Even the same that I said unto you from the beginning.

31     Then said Jesus to those Jews which believed on him, If ye continue in my word, then are ye my disciples indeed;

32     And ye shall know the truth, and the truth shall make you free.

42     …for I proceeded forth and came from God; neither came I of myself, but he sent me.

51     Verily, verily, I say unto you, If a man keep my saying, he shall never see death.

52     Then said the Jews unto him, Now we know that thou hast a devil. Abraham is dead, and the prophets; and thou sayest, If a man keep my saying, he shall never taste of death.

54     Jesus answered,

56     Your father Abraham rejoiced to see my day: and he saw it, and was glad.

57     Then said the Jews unto him, Thou art not yet fifty years old, and hast thou seen Abraham?

58     Jesus said unto them, Verily, verily, I say unto you, Before Abraham was, I am.

6. यूहन्ना 17: 1 (से 3rd,), 3, 5 (से 2nd,), 24 (मैं करूंगा)

1     यीशु ने ये बातें कहीं और अपनी आंखे आकाश की ओर उठाकर कहा, हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे।

3     और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने।

5     और अब, हे पिता।

24     हे पिता, मैं चाहता हूं कि जिन्हें तू ने मुझे दिया है, जहां मैं हूं, वहां वे भी मेरे साथ हों कि वे मेरी उस महिमा को देखें जो तू ने मुझे दी है, क्योंकि तू ने जगत की उत्पत्ति से पहिले मुझ से प्रेम रखा।

6. John 17 : 1 (to 3rd ,), 3, 5 (to 2nd ,), 24 (I will)

1     These words spake Jesus, and lifted up his eyes to heaven, and said,

3     And this is life eternal, that they might know thee the only true God, and Jesus Christ, whom thou hast sent.

5     And now, O Father,

24     I will that they also, whom thou hast given me, be with me where I am; that they may behold my glory, which thou hast given me: for thou lovedst me before the foundation of the world.

7. यशायाह 40: 21, 26

21     क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? क्या तुम को आरम्भ ही से नहीं बताया गया? क्या तुम ने पृथ्वी की नेव पड़ने के समय ही से विचार नहीं किया?

26     अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता॥

7. Isaiah 40 : 21, 26

21     Have ye not known? have ye not heard? hath it not been told you from the beginning? have ye not understood from the foundations of the earth?

26     Lift up your eyes on high, and behold who hath created these things, that bringeth out their host by number: he calleth them all by names by the greatness of his might, for that he is strong in power: not one faileth.

8. यशायाह 45: 4 (मेरे पास भी है) (से ,), 5, 6, 8, 11-13 (से :)

4     मैं ने नाम ले कर तुझे बुलाया है; तौभी मैं ने तुझे पदवी दी है।

5     मैं यहोवा हूं और दूसरा कोई नहीं, मुझे छोड़ कोई परमेश्वर नहीं; यद्यपि तू मुझे नहीं जानता, तौभी मैं तेरी कमर कसूंगा,

6     जिस से उदयाचल से ले कर अस्ताचल तक लोग जान लें कि मुझ बिना कोई है ही नहीं है।

8     हे आकाश, ऊपर से धर्म बरसा, आकाशमण्डल से धर्म की वर्षा हो; पृथ्वी खुले कि उद्धार उत्पन्न हो; और धर्म भी उसके संग उगाए; मैं यहोवा ही ने उसे उत्पन्न किया है॥

11     यहोवा जो इस्राएल का पवित्र और उसका बनाने वाला है, वह यों कहता है, क्या तुम आने वाली घटनाएं मुझ से पूछोगे? क्या मेरे पुत्रोंऔ र मेरे कामों के विषय मुझे आज्ञा दोगे?

12     मैं ही ने पृथ्वी को बनाया और उसके ऊपर मनुष्यों को सृजा है; मैं ने अपने ही हाथों से आकाश को ताना और उसके सारे गणों को आज्ञा दी है।

13     मैं ही ने उस पुरूष को धामिर्कता से उभारा है और मैं उसके सब मार्गों को सीधा करूंगा॥

8. Isaiah 45 : 4 (I have even) (to ,), 5, 6, 8, 11-13 (to :)

4     I have even called thee by thy name: I have surnamed thee,

5     I am the Lord, and there is none else, there is no God beside me: I girded thee, though thou hast not known me:

6     That they may know from the rising of the sun, and from the west, that there is none beside me. I am the Lord, and there is none else.

8     Drop down, ye heavens, from above, and let the skies pour down righteousness: let the earth open, and let them bring forth salvation, and let righteousness spring up together; I the Lord have created it.

11     Thus saith the Lord, the Holy One of Israel, and his Maker, Ask me of things to come concerning my sons, and concerning the work of my hands command ye me.

12     I have made the earth, and created man upon it: I, even my hands, have stretched out the heavens, and all their host have I commanded.

13     I have raised him up in righteousness, and I will direct all his ways:

9. 1 यूहन्ना 2: 24

24     जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे।

9. I John 2 : 24

24     Let that therefore abide in you, which ye have heard from the beginning. If that which ye have heard from the beginning shall remain in you, ye also shall continue in the Son, and in the Father.

10. इफिसियों 1: 3, 4 (से 1st ,)

3     हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, कि उस ने हमें मसीह में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आशीष दी है।

4     जैसा उस ने हमें जगत की उत्पति से पहिले उस में चुन लिया।

10. Ephesians 1 : 3, 4 (to 1st ,)

3     Blessed be the God and Father of our Lord Jesus Christ, who hath blessed us with all spiritual blessings in heavenly places in Christ:

4     According as he hath chosen us in him before the foundation of the world,



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 267 : 10-12

महान मैंने वह सब बनाया है जो "जो बनाया गया था।" इसलिए मनुष्य और आध्यात्मिक ब्रह्मांड ईश्वर के साथ सह-अस्तित्व में हैं।

1. 267 : 10-12

The great I am made all "that was made." Hence man and the spiritual universe coexist with God.

2. 335 : 18 (कुछ भी नहीं)-20

आत्मा, प्राण के अलावा कुछ भी जीवन को विकसित नहीं कर सकता, क्योंकि आत्मा सबसे बढ़कर है।

2. 335 : 18 (Nothing)-20

Nothing but Spirit, Soul, can evolve Life, for Spirit is more than all else.

3. 252 : 31 (से 1st ,), 31 (यह वाणी)-8

आत्मा ...कहती है:

मैं आत्मा हूं। मनुष्य, जिसकी इंद्रियाँ आध्यात्मिक हैं, मेरी समानता है। वह अनंत समझ को दर्शाता है, क्योंकि मैं अनंत हूं। पवित्रता की सुंदरता, होने की पूर्णता, अविनाशी महिमा, — सभी मेरे हैं, क्योंकि मैं भगवान हूं। मैं मनुष्य को अमरता देता हूं, क्योंकि मैं सत्य हूं। मैं सभी आनंद प्रदान करता हूं और उन्हें शामिल करता हूं, क्योंकि मैं प्रेम हूं। मैं जीवन देता हूं, बिना शुरुआत और बिना अंत के, क्योंकि मैं जीवन हूं। मैं सर्वोच्च हूं और सभी को देता हूं, क्योंकि मैं माइंड हूं। मैं सब का पदार्थ हूं, क्योंकि मैं जो हूं सो हूं.

3. 252 : 31 (to 1st ,), 31 (saith)-8

Spirit, … saith:

I am Spirit. Man, whose senses are spiritual, is my likeness. He reflects the infinite understanding, for I am Infinity. The beauty of holiness, the perfection of being, imperishable glory, — all are Mine, for I am God. I give immortality to man, for I am Truth. I include and impart all bliss, for I am Love. I give life, without beginning and without end, for I am Life. I am supreme and give all, for I am Mind. I am the substance of all, because I am that I am.

4. 492 : 3-4

सही तर्क के लिए, विचार से पहले केवल एक तथ्य होना चाहिए, अर्थात् आध्यात्मिक अस्तित्व।

4. 492 : 3-4

For right reasoning there should be but one fact before the thought, namely, spiritual existence.

5. 429 : 19-28 (से ,), 31-2

यदि भौतिक संगठन के शुरू होने से पहले मनुष्य का अस्तित्व नहीं था, तो वह शरीर के विघटित होने के बाद अस्तित्व में नहीं रह सकता था। यदि हम मृत्यु के बाद जीते हैं और अमर हैं, तो हम जन्म से पहले जीवित रहे होंगे, क्योंकि यदि जीवन का कभी कोई आरंभ था, तो उसका अंत भी होना चाहिए, यहां तक कि प्राकृतिक विज्ञान की गणना के अनुसार भी। क्या आप इस पर विश्वास करते हैं? नहीं! क्या आप इसे समझते हैं? नहीं! यही कारण है कि आप बयान पर संदेह करते हैं और इसमें शामिल तथ्यों को प्रदर्शित नहीं करते हैं। हमें अपने स्वामी की सभी बातों पर विश्वास करना चाहिए,

यीशु ने कहा (यूहन्ना 8: 51), "यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्त काल तक मृत्यु को न देखेगा।" यह कथन आध्यात्मिक जीवन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अस्तित्व की सभी घटनाएं शामिल हैं।

5. 429 : 19-28 (to ,), 31-2

If man did not exist before the material organization began, he could not exist after the body is disintegrated. If we live after death and are immortal, we must have lived before birth, for if Life ever had any beginning, it must also have an ending, even according to the calculations of natural science. Do you believe this? No! Do you understand it? No! This is why you doubt the statement and do not demonstrate the facts it involves. We must have faith in all the sayings of our Master,

Jesus said (John viii. 51), "If a man keep my saying, he shall never see death." That statement is not confined to spiritual life, but includes all the phenomena of existence.

6. 547 : 23-30

शास्त्र बहुत पवित्र हैं। हमारा उद्देश्य उन्हें आध्यात्मिक रूप से समझना होगा, केवल इस समझ से सत्य को प्राप्त किया जा सकता है। मनुष्य सहित ब्रह्मांड का सही सिद्धांत भौतिक इतिहास में नहीं बल्कि आध्यात्मिक विकास में है। प्रेरित विचार ब्रह्मांड की एक सामग्री, कामुक, और नश्वर सिद्धांत को त्यागता है, और आध्यात्मिक और अमरता को अपनाता है।

6. 547 : 23-30

The Scriptures are very sacred. Our aim must be to have them understood spiritually, for only by this understanding can truth be gained. The true theory of the universe, including man, is not in material history but in spiritual development. Inspired thought relinquishes a material, sensual, and mortal theory of the universe, and adopts the spiritual and immortal.

7. 550 : 15 (वह)-23

भौतिक और भौतिक के रूप में अस्तित्व का निरंतर चिंतन - शुरुआत और अंत के रूप में, और इसके घटक चरणों के रूप में जन्म, क्षय और विघटन के साथ - सच्चे और आध्यात्मिक जीवन को छुपाता है, और हमारे मानक को धूल में फंसा देता है। यदि जीवन का कोई प्रारंभिक बिंदु है, तो महान मैं हूं एक मिथक है। यदि जीवन ईश्वर है, जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है, तो जीवन भ्रूण नहीं है, यह अनंत है।

7. 550 : 15 (The)-23

The continual contemplation of existence as material and corporeal — as beginning and ending, and with birth, decay, and dissolution as its component stages — hides the true and spiritual Life, and causes our standard to trail in the dust. If Life has any starting-point whatsoever, then the great I am is a myth. If Life is God, as the Scriptures imply, then Life is not embryonic, it is infinite.

8. 502: 24-28 (से 2nd.)

अनंत की कोई शुरुआत नहीं है। इस शब्द की शुरुआत ही एकमात्र के संकेत के लिए की जाती है, - यानी, ब्रह्मांड सहित ईश्वर और मनुष्य की अनंत सत्यता और एकता। रचनात्मक सिद्धांत - जीवन, सत्य और प्रेम - ईश्वर है। ब्रह्मांड ईश्वर को दर्शाता है।

8. 502 : 24-28 (to 2nd .)

The infinite has no beginning. This word beginning is employed to signify the only, — that is, the eternal verity and unity of God and man, including the universe. The creative Principle — Life, Truth, and Love — is God. The universe reflects God.

9. 124: 14-19, 25-26 (से 1st.)

ब्रह्मांड, मनुष्य की तरह, विज्ञान द्वारा अपने दिव्य सिद्धांत, ईश्वर से व्याख्या की जानी है, और फिर इसे समझा जा सकता है; लेकिन जब भौतिक अर्थों के आधार पर समझाया जाता है और विकास, परिपक्वता और क्षय के विषय के रूप में प्रतिनिधित्व किया जाता है, तो ब्रह्मांड, जैसे मनुष्य, है और होना चाहिए, एक रहस्य है।

आत्मा सभी चीजों का जीवन, पदार्थ और निरंतरता है।

9. 124 : 14-19, 25-26 (to 1st .)

The universe, like man, is to be interpreted by Science from its divine Principle, God, and then it can be understood; but when explained on the basis of physical sense and represented as subject to growth, maturity, and decay, the universe, like man, is, and must continue to be, an enigma.

Spirit is the life, substance, and continuity of all things.

10. 513 : 17-21

आत्मा उन सभी विचारों में विविधता, वर्गीकरण और वैयक्तिकरण करती है, जो उतने ही शाश्वत हैं जितना मन उन्हें धारण करता है; लेकिन सभी व्यक्तित्वों की बुद्धि, अस्तित्व और निरंतरता ईश्वर में रहती है, जो उसका दिव्य रचनात्मक सिद्धांत है।

10. 513 : 17-21

Spirit diversifies, classifies, and individualizes all thoughts, which are as eternal as the Mind conceiving them; but the intelligence, existence, and continuity of all individuality remain in God, who is the divinely creative Principle thereof.

11. 78 : 1-5

सड़ता हुआ फूल, मुरझाई हुई कली, धारीदार ओक, क्रूर जानवर, - रोग, पाप और मृत्यु की कलह की तरह, - अप्राकृतिक हैं। वे अर्थ के मिथ्या हैं, नश्वर मन के बदलते विक्षेप; वे मन की शाश्वत वास्तविकता नहीं हैं।

11. 78 : 1-5

The decaying flower, the blighted bud, the gnarled oak, the ferocious beast, — like the discords of disease, sin, and death, — are unnatural. They are the falsities of sense, the changing deflections of mortal mind; they are not the eternal realities of Mind.

12. 511 : 23-3

नश्वर मन के लिए, ब्रह्मांड तरल, ठोस और एक समान है। आध्यात्मिक रूप से व्याख्या की गई, चट्टानें और पहाड़ ठोस और भव्य विचारों के लिए खड़े हैं। पशु और नश्वर रूपक रूप से नश्वर विचार का क्रम बढ़ाते हैं, बुद्धि के पैमाने पर बढ़ते हैं, मर्दाना, स्त्री या नपुंसक लिंग का रूप लेते हैं। स्वर्ग के खुले संघटन में पृथ्वी के ऊपर उड़ने वाले फव्वारे, मनोरम और दिव्य सिद्धांत, प्रेम की समझ से परे और ऊपर उठने की आकांक्षाओं के अनुरूप हैं।

12. 511 : 23-3

To mortal mind, the universe is liquid, solid, and aëriform. Spiritually interpreted, rocks and mountains stand for solid and grand ideas. Animals and mortals metaphorically present the gradation of mortal thought, rising in the scale of intelligence, taking form in masculine, feminine, or neuter gender. The fowls, which fly above the earth in the open firmament of heaven, correspond to aspirations soaring beyond and above corporeality to the understanding of the incorporeal and divine Principle, Love.

13. 450 : 29-2

वह कौन है जिसने जीवन, पदार्थ और बुद्धिमत्ता में खतरनाक मान्यताओं को ईश्वर से अलग कर दिया है, और यह कह सकता है कि विश्वास की कोई त्रुटि नहीं है? पशु चुंबकत्व के दावे को जानते हुए, कि सभी बुराई जीवन, पदार्थ, और बुद्धि के विश्वास में जोड़ती है, बिजली, पशु प्रकृति, और जैविक जीवन, कौन इस बात से इंकार करेगा कि ये गलतियाँ हैं जो सत्य को सत्यानाश कर देंगी?

13. 450 : 29-2

Knowing the claim of animal magnetism, that all evil combines in the belief of life, substance, and intelligence in matter, electricity, animal nature, and organic life, who will deny that these are the errors which Truth must and will annihilate?

14. 369 : 5-13

जिस अनुपात में मनुष्य को सभी वस्तुएं मनुष्य के रूप में खो देती हैं, उसी अनुपात में मनुष्य इसका स्वामी बन जाता है। वह तथ्यों की एक दिव्य भावना में प्रवेश करता है, और यीशु के धर्मशास्त्र को समझने के रूप में बीमारों को ठीक करने, मृतकों को ऊपर उठाने और लहर पर चलने के रूप में प्रदर्शित करता है। इन सभी कर्मों से यीशु का विश्वास इस बात पर है कि सामग्री भौतिक है, यह विश्वास है कि यह जीवन का मध्यस्थ या अस्तित्व के किसी भी रूप का निर्माणकर्ता हो सकता है।

14. 369 : 5-13

In proportion as matter loses to human sense all entity as man, in that proportion does man become its master. He enters into a diviner sense of the facts, and comprehends the theology of Jesus as demonstrated in healing the sick, raising the dead, and walking over the wave. All these deeds manifested Jesus' control over the belief that matter is substance, that it can be the arbiter of life or the constructor of any form of existence.

15. 516 : 4-8

पदार्थ, जीवन, बुद्धि, सत्य और प्रेम, जो देवता का निर्माण करते हैं, उनकी रचना से परिलक्षित होते हैं; और जब हम विज्ञान के तथ्यों के प्रति कॉर्पोरल इंद्रियों की झूठी गवाही देते हैं, तो हम इस वास्तविक समानता और प्रतिबिंब को हर जगह देखेंगे।

15. 516 : 4-8

The substance, Life, intelligence, Truth, and Love, which constitute Deity, are reflected by His creation; and when we subordinate the false testimony of the corporeal senses to the facts of Science, we shall see this true likeness and reflection everywhere.

16. 331 : 16-17

भगवान के ब्रह्मांड में सब कुछ उसे व्यक्त करता है।

16. 331 : 16-17

Everything in God's universe expresses Him.

17. 264 : 28-31

जब हम क्रिश्चियन साइंस में रास्ता सीखते हैं और मनुष्य के आध्यात्मिक होने को पहचानते हैं, तो हम भगवान की रचना को समझेंगे और समझेंगे - पृथ्वी और स्वर्ग और मनुष्य की सभी महिमा।

17. 264 : 28-31

When we learn the way in Christian Science and recognize man's spiritual being, we shall behold and understand God's creation, — all the glories of earth and heaven and man.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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