रविवार 17 जुलाई, 2022



विषयजिंदगी

SubjectLife

वर्ण पाठ: स्वर्ण पाठ: कुलुस्सियों 3: 3

"तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।"



Golden Text: Colossians 3 : 3

Your life is hid with Christ in God.




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उत्तरदायी अध्ययन: इब्रानियों 7: 1-4, 15, 16


1     यह मलिकिसिदक शालेम का राजा, और परमप्रधान परमेश्वर का याजक, सर्वदा याजक बना रहता है; जब इब्राहीम राजाओं को मार कर लौटा जाता था, तो इसी ने उस से भेंट करके उसे आशीष दी।

2     इसी को इब्राहीम ने सब वस्तुओं का दसवां अंश भी दिया: यह पहिले अपने नाम के अर्थ के अनुसार, धर्म का राजा, और फिर शालेम अर्थात शांति का राजा है।

3     जिस का न पिता, न माता, न वंशावली है, जिस के न दिनों का आदि है और न जीवन का अन्त है; परन्तु परमेश्वर के पुत्र के स्वरूप ठहरा॥

4     अब इस पर ध्यान करो कि यह कैसा महान था जिस को कुलपति इब्राहीम ने अच्छे से अच्छे माल की लूट का दसवां अंश दिया।

15     ओर जब मलिकिसिदक के समान एक और ऐसा याजक उत्पन्न होने वाला था।

16     जो शारीरिक आज्ञा की व्यवस्था के अनुसार नहीं, परअविनाशी जीवन की सामर्थ के अनुसार नियुक्त हो तो हमारा दावा और भी स्पष्टता से प्रगट हो गया।

Responsive Reading: Hebrews 7 : 1-4, 15, 16

1.     For this Melchisedec, king of Salem, priest of the most high God, who met Abraham returning from the slaughter of the kings, and blessed him;

2.     To whom also Abraham gave a tenth part of all; first being by interpretation King of righteousness, and after that also King of Salem, which is, King of peace;

3.     Without father, without mother, without descent, having neither beginning of days, nor end of life; but made like unto the Son of God; abideth a priest continually.

4.     Now consider how great this man was, unto whom even the patriarch Abraham gave the tenth of the spoils.

15.     And it is yet far more evident: for that after the similitude of Melchisedec there ariseth another priest,

16.     Who is made, not after the law of a carnal commandment, but after the power of an endless life.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. नीतिवचन 12: 28

28     धर्म की बाट में जीवन मिलता है, और उसके पथ में मृत्यु का पता भी नहीं॥

1. Proverbs 12 : 28

28     In the way of righteousness is life; and in the pathway thereof there is no death.

2. भजन संहिता 36: 5-10

5     हे यहोवा तेरी करूणा स्वर्ग में है, तेरी सच्चाई आकाश मण्डल तक पहुंची है।

6     तेरा धर्म ऊंचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं; हे यहोवा तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है॥

7     हे परमेश्वर तेरी करूणा, कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखो के तले शरण लेते हैं।

8     वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा।

9     क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाएंगे॥

10     अपने जानने वालों पर करूणा करता रह, और अपने धर्म के काम सीधे मन वालों में करता रह!

2. Psalm 36 : 5-10

5     Thy mercy, O Lord, is in the heavens; and thy faithfulness reacheth unto the clouds.

6     Thy righteousness is like the great mountains; thy judgments are a great deep: O Lord, thou preservest man and beast.

7     How excellent is thy lovingkindness, O God! therefore the children of men put their trust under the shadow of thy wings.

8     They shall be abundantly satisfied with the fatness of thy house; and thou shalt make them drink of the river of thy pleasures.

9     For with thee is the fountain of life: in thy light shall we see light.

10     O continue thy lovingkindness unto them that know thee; and thy righteousness to the upright in heart.

3. भजन संहिता 90 : 16, 17

16     तेरा काम तेरे दासों को, और तेरा प्रताप उनकी सन्तान पर प्रगट हो।

17     और हमारे परमेश्वर यहोवा की मनोहरता हम पर प्रगट हो, तू हमारे हाथों का काम हमारे लिये दृढ़ कर, हमारे हाथों के काम को दृढ़ कर॥

3. Psalm 90 : 16, 17

16     Let thy work appear unto thy servants, and thy glory unto their children.

17     And let the beauty of the Lord our God be upon us: and establish thou the work of our hands upon us; yea, the work of our hands establish thou it.

4. उत्पत्ति 5: 18, 21-24

18     जब येरेद एक सौ बासठ वर्ष का हुआ, जब उसने हनोक को जन्म दिया।

21     जब हनोक पैंसठ वर्ष का हुआ, तब उसने मतूशेलह को जन्म दिया।

22     और मतूशेलह के जन्म के पश्चात हनोक तीन सौ वर्ष तक परमेश्वर के साथ साथ चलता रहा, और उसके और भी बेटे बेटियां उत्पन्न हुईं।

23     और हनोक की कुल अवस्था तीन सौ पैंसठ वर्ष की हुई।

24     और हनोक परमेश्वर के साथ साथ चलता था; फिर वह लोप हो गया क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया।

4. Genesis 5 : 18, 21-24

18     And Jared lived an hundred sixty and two years, and he begat Enoch:

21     And Enoch lived sixty and five years, and begat Methuselah:

22     And Enoch walked with God after he begat Methuselah three hundred years, and begat sons and daughters:

23     And all the days of Enoch were three hundred sixty and five years:

24     And Enoch walked with God: and he was not; for God took him.

5. अय्यूब 11 : 14-17

14     और जो कोई अनर्थ काम तुझ से होता हो उसे दूर करे, और अपने डेरों में कोई कुटिलता न रहने दे,

15     तब तो तू निश्चय अपना मुंह निष्कलंक दिखा सकेगा; और तू स्थिर हो कर कभी न डरेगा।

16     तब तू अपना दु:ख भूल जाएगा, तू उसे उस पानी के समान स्मरण करेगा जो बह गया हो।

17     और तेरा जीवन दोपहर से भी अधिक प्रकाशमान होगा; और चाहे अन्धेरा भी हो तौभी वह भोर सा हो जाएगा।

5. Job 11 : 14-17

14     If iniquity be in thine hand, put it far away, and let not wickedness dwell in thy tabernacles.

15     For then shalt thou lift up thy face without spot; yea, thou shalt be stedfast, and shalt not fear:

16     Because thou shalt forget thy misery, and remember it as waters that pass away:

17     And thine age shall be clearer than the noonday; thou shalt shine forth, thou shalt be as the morning.

6. व्यवस्थाविवरण 30 : 11-14, 19, 20

11     देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है।

12     और न तो यह आकाश में है, कि तू कहे, कि कौन हमारे लिये आकाश में चढ़कर उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें?

13     और न यह समुद्र पार है, कि तू कहे, कौन हमारे लिये समुद्र पार जाए, और उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें?

14     परन्तु यह वचन तेरे बहुत निकट, वरन तेरे मुंह और मन ही में है ताकि तू इस पर चले॥

19     मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें;

20     इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, और उसकी बात मानों, और उस से लिपटे रहो; क्योंकि तेरा जीवन और दीर्घ जीवन यही है, और ऐसा करने से जिस देश को यहोवा ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजों को देने की शपथ खाई थी उस देश में तू बसा रहेगा॥

6. Deuteronomy 30 : 11-14, 19, 20

11     For this commandment which I command thee this day, it is not hidden from thee, neither is it far off.

12     It is not in heaven, that thou shouldest say, Who shall go up for us to heaven, and bring it unto us, that we may hear it, and do it?

13     Neither is it beyond the sea, that thou shouldest say, Who shall go over the sea for us, and bring it unto us, that we may hear it, and do it?

14     But the word is very nigh unto thee, in thy mouth, and in thy heart, that thou mayest do it.

19     I call heaven and earth to record this day against you, that I have set before you life and death, blessing and cursing: therefore choose life, that both thou and thy seed may live:

20     That thou mayest love the Lord thy God, and that thou mayest obey his voice, and that thou mayest cleave unto him: for he is thy life, and the length of thy days: that thou mayest dwell in the land which the Lord sware unto thy fathers, to Abraham, to Isaac, and to Jacob, to give them.

7. यूहन्ना 12: 1-3, 35, 36 (से 1st.), 44 (वह)-47, 49, 50 (से :)

1     फिर यीशु फतह से छ: दिन पहिले बैतनिय्याह में आया, जहां लाजर था: जिसे यीशु ने मरे हुओं में से जिलाया था।

2     वहां उन्होंने उसके लिये भोजन तैयार किया, और मारथा सेवा कर रही थी, और लाजर उन में से एक था, जो उसके साथ भोजन करने के लिये बैठे थे।

3     तब मरियम ने जटामासी का आध सेर बहुमूल्य इत्र लेकर यीशु के पावों पर डाला, और अपने बालों से उसके पांव पोंछे, और इत्र की सुगंध से घर सुगन्धित हो गया।

35     यह मनुष्य का पुत्र कौन है? यीशु ने उन से कहा, ज्योति अब थोड़ी देर तक तुम्हारे बीच में है, जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है तब तक चले चलो; ऐसा न हो कि अन्धकार तुम्हें आ घेरे; जो अन्धकार में चलता है वह नहीं जानता कि किधर जाता है।

36     जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है, ज्योति पर विश्वास करो कि तुम ज्योति के सन्तान होओ॥ ये बातें कहकर यीशु चला गया और उन से छिपा रहा।

44     यीशु ने पुकारकर कहा, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है।

45     और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजने वाले को देखता है।

46     मैं जगत में ज्योति होकर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे।

47     यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं।

49     क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिस ने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं और क्या क्या बोलूं

50     और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा जीवन है॥

7. John 12 : 1-3, 35, 36 (to 1st .), 44 (He)-47, 49, 50 (to :)

1     Then Jesus six days before the passover came to Bethany, where Lazarus was which had been dead, whom he raised from the dead.

2     There they made him a supper; and Martha served: but Lazarus was one of them that sat at the table with him.

3     Then took Mary a pound of ointment of spikenard, very costly, and anointed the feet of Jesus, and wiped his feet with her hair: and the house was filled with the odour of the ointment.

35     Then Jesus said unto them, Yet a little while is the light with you. Walk while ye have the light, lest darkness come upon you: for he that walketh in darkness knoweth not whither he goeth.

36     While ye have light, believe in the light, that ye may be the children of light.

44     He that believeth on me, believeth not on me, but on him that sent me.

45     And he that seeth me seeth him that sent me.

46     I am come a light into the world, that whosoever believeth on me should not abide in darkness.

47     And if any man hear my words, and believe not, I judge him not: for I came not to judge the world, but to save the world.

49     For I have not spoken of myself; but the Father which sent me, he gave me a commandment, what I should say, and what I should speak.

50     And I know that his commandment is life everlasting:

8. प्रेरितों के काम 9: 36-41

36     याफा में तबीता अर्थात दोरकास नाम एक विश्वासिनी रहती थी, वह बहुतेरे भले भले काम और दान किया करती थी।

37     उन्हीं दिनों में वह बीमार होकर मर गई; और उन्होंने उसे नहला कर अटारी पर रख दिया।

38     और इसलिये कि लुद्दा याफा के निकट था, चेलों ने यह सुनकर कि पतरस वहां है दो मनुष्य भेजकर उस ने बिनती की कि हमारे पास आने में देर न कर।

39     तब पतरस उठकर उन के साथ हो लिया, और जब पहुंच गया, तो वे उसे उस अटारी पर ले गए; और सब विधवाएं रोती हुई उसके पास आ खड़ी हुई: और जो कुरते और कपड़े दोरकास ने उन के साथ रहते हुए बनाए थे, दिखाने लगीं।

40     तब पतरस ने सब को बाहर कर दिया, और घुटने टेककर प्रार्थना की; और लोथ की ओर देखकर कहा; हे तबीता उठ: तब उस ने अपनी आंखे खोल दी; और पतरस को देखकर उठ बैठी।

41     उस ने हाथ देकर उसे उठाया और पवित्र लोगों और विधवाओं को बुलाकर उसे जीवित और जागृत दिखा दिया।

8. Acts 9 : 36-41

36     Now there was at Joppa a certain disciple named Tabitha, which by interpretation is called Dorcas: this woman was full of good works and almsdeeds which she did.

37     And it came to pass in those days, that she was sick, and died: whom when they had washed, they laid her in an upper chamber.

38     And forasmuch as Lydda was nigh to Joppa, and the disciples had heard that Peter was there, they sent unto him two men, desiring him that he would not delay to come to them.

39     Then Peter arose and went with them. When he was come, they brought him into the upper chamber: and all the widows stood by him weeping, and shewing the coats and garments which Dorcas made, while she was with them.

40     But Peter put them all forth, and kneeled down, and prayed; and turning him to the body said, Tabitha, arise. And she opened her eyes: and when she saw Peter, she sat up.

41     And he gave her his hand, and lifted her up, and when he had called the saints and widows, presented her alive.

9. भजन संहिता 92: 12-14

12     धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे।

13     वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।

14     वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे।

9. Psalm 92 : 12-14

12     The righteous shall flourish like the palm tree: he shall grow like a cedar in Lebanon.

13     Those that be planted in the house of the Lord shall flourish in the courts of our God.

14     They shall still bring forth fruit in old age; they shall be fat and flourishing;



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 394 : 28-29

हमें याद रखना चाहिए कि जीवन ईश्वर है, और यह कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है।

1. 394 : 28-29

We should remember that Life is God, and that God is omnipotent. 

2. 246 : 27-31

जीवन शाश्वत है। हमें इसका पता लगाना चाहिए, और इसके बाद प्रदर्शन शुरू करना चाहिए। जीवन और अच्छाई अमर है। आइए फिर हम उम्र और तुषार के बजाय अपने अस्तित्व के विचारों को प्रेम, ताजगी और निरंतरता में आकार दें।

2. 246 : 27-31

Life is eternal. We should find this out, and begin the demonstration thereof. Life and goodness are immortal. Let us then shape our views of existence into loveliness, freshness, and continuity, rather than into age and blight.

3. 249: 18-20 (से 1st.)

जीवन, मसीह की तरह है, "वही कल, और आज, और हमेशा के लिए।" संगठन और समय का जीवन से कोई लेना-देना नहीं है।

3. 249 : 18-20 (to 1st .)

Life is, like Christ, "the same yesterday, and to-day, and forever." Organization and time have nothing to do with Life.

4. 584: 1-2, 4-8

दिन। जीवन की किरण; प्रकाश, सत्य और प्रेम का आध्यात्मिक विचार।

आध्यात्मिक समझ की रोशनी में समय और इंद्रिय के विषय गायब हो जाते हैं, और मन समय को उस अच्छे के अनुसार मापता है जो सामने आता है। यह प्रकट होना परमेश्वर का दिन है, और "वहां कोई रात न होगी।"

4. 584 : 1-2, 4-8

DAY. The irradiance of Life; light, the spiritual idea of Truth and Love.

The objects of time and sense disappear in the illumination of spiritual understanding, and Mind measures time according to the good that is unfolded. This unfolding is God's day, and "there shall be no night there."

5. 245: 32-6

अनंत न कभी शुरू हुआ और न कभी खत्म होगा। मन और उसके स्वरूपों का सत्यानाश कभी नहीं हो सकता। मनुष्य एक पेंडुलम नहीं है, जो बुराई और भलाई, खुशी और दुःख, बीमारी और स्वास्थ्य, जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा है। जीवन और उसके संकायों को कैलेंडरों द्वारा मापा नहीं जाता है। सही और अमर उनके निर्माता की शाश्वत समानता है।

5. 245 : 32-6

The infinite never began nor will it ever end. Mind and its formations can never be annihilated. Man is not a pendulum, swinging between evil and good, joy and sorrow, sickness and health, life and death. Life and its faculties are not measured by calendars. The perfect and immortal are the eternal likeness of their Maker.

6. 246: 10-26

सौर वर्षों से जीवन का माप युवाओं को लूटता है और उम्र के लिए कुरूपता देता है। पुण्य का उज्ज्वल सूर्य और होने के साथ सत्य सह-अस्तित्व। घटता हुआ सूरज उसकी शाश्वत दोपहर है, जो एक गिरते सूरज से अनिच्छुक है। भौतिक और भौतिक के रूप में, सौंदर्य की क्षणिक भावना फीकी पड़ जाती है, आत्मा की चमक उज्ज्वल और अपूर्ण चमक के साथ उत्कीर्ण भावना पर भोर होनी चाहिए।

उम्र पर कभी ध्यान न दें। कालानुक्रमिक डेटा हमेशा के लिए विशाल का हिस्सा नहीं हैं। जन्म और मृत्यु के समय-सारणी मर्दानगी और नारीत्व के खिलाफ बहुत सारे षड्यंत्र हैं। उस अच्छे और सुंदर सभी को मापने और सीमित करने की त्रुटि को छोड़कर, आदमी थ्रीस्कोर वर्ष और दस से अधिक का आनंद ले सकता है और अभी भी अपनी ताक़त, ताजगी और वादे को बनाए रखेगा। अमर मन द्वारा शासित मनुष्य हमेशा सुंदर और भव्य होता है। प्रत्येक सफल वर्ष ज्ञान, सौंदर्य और पवित्रता को प्रकट करता है।

6. 246 : 10-26

The measurement of life by solar years robs youth and gives ugliness to age. The radiant sun of virtue and truth coexists with being. Manhood is its eternal noon, undimmed by a declining sun. As the physical and material, the transient sense of beauty fades, the radiance of Spirit should dawn upon the enraptured sense with bright and imperishable glories.

Never record ages. Chronological data are no part of the vast forever. Time-tables of birth and death are so many conspiracies against manhood and womanhood. Except for the error of measuring and limiting all that is good and beautiful, man would enjoy more than threescore years and ten and still maintain his vigor, freshness, and promise. Man, governed by immortal Mind, is always beautiful and grand. Each succeeding year unfolds wisdom, beauty, and holiness.

7. 247: 13-30

अमरता, उम्र या क्षय से मुक्त, अपनी खुद की एक महिमा है, - आत्मा की चमक। अमर पुरुष और महिला आध्यात्मिक भावना के उदाहरण हैं, पूर्ण मन से खींचे गए और प्रेम के उन उच्च अवधारणाओं को दर्शाते हैं जो अपनी भौतिक भावना को पार करते हैं।

सौम्यता और अनुग्रह पदार्थ से स्वतंत्र हैं। मानवीय रूप से देखे जाने से पहले उसके गुण उसके पास होते हैं। सुंदरता जीवन की एक चीज है, जो शाश्वत मन में हमेशा के लिए रहती है और अभिव्यक्ति, रूप, रूपरेखा और रंग में उनकी अच्छाई के आकर्षण को दर्शाती है। यह प्रेम ही है जो पंखुड़ी को असंख्य रंगों से रंगता है, गर्म धूप की किरणों में झलकता है, सुंदरता के धनुष के साथ बादल को झुकाता है, रात को तारों से जगमगाता है, और पृथ्वी को सुंदरता से ढकता है।

व्यक्ति के अलंकरण अस्तित्व के आकर्षण के लिए घटिया विकल्प हैं, चमकते हुए देदीप्यमान और उम्र और क्षय के साथ शाश्वत हैं।

7. 247 : 13-30

Immortality, exempt from age or decay, has a glory of its own, — the radiance of Soul. Immortal men and women are models of spiritual sense, drawn by perfect Mind and reflecting those higher conceptions of loveliness which transcend all material sense.

Comeliness and grace are independent of matter. Being possesses its qualities before they are perceived humanly. Beauty is a thing of life, which dwells forever in the eternal Mind and reflects the charms of His goodness in expression, form, outline, and color. It is Love which paints the petal with myriad hues, glances in the warm sunbeam, arches the cloud with the bow of beauty, blazons the night with starry gems, and covers earth with loveliness.

The embellishments of the person are poor substitutes for the charms of being, shining resplendent and eternal over age and decay.

8. 243: 30-6

बीमारी, पाप और मृत्यु जीवन का फल नहीं हैं। वे ऐसे लोग हैं जो सत्य को नष्ट कर देते हैं। पूर्णता अपूर्णता को चेतन नहीं करती है। भगवान जितना अच्छा है और सभी का स्रोत है, वह नैतिक या शारीरिक विकृति उत्पन्न नहीं करता है, लेकिन इस तरह की विकृति वास्तविक नहीं है, लेकिन भ्रम है, त्रुटि का मतिभ्रम। दिव्य विज्ञान इन भव्य तथ्यों का खुलासा करता है। किसी भी रूप में कभी भी डरने या न मानने की गलती से, उनके आधार पर यीशु ने जीवन का प्रदर्शन किया।

8. 243 : 30-6

Sickness, sin, and death are not the fruits of Life. They are inharmonies which Truth destroys. Perfection does not animate imperfection. Inasmuch as God is good and the fount of all being, He does not produce moral or physical deformity; therefore such deformity is not real, but is illusion, the mirage of error. Divine Science reveals these grand facts. On their basis Jesus demonstrated Life, never fearing nor obeying error in any form.

9. 245: 30 (जीर्णता)-31

… निपुणता कानून के अनुसार नहीं है, न ही यह प्रकृति की आवश्यकता है, लेकिन एक भ्रम है।

9. 245 : 30 (decrepitude)-31

…decrepitude is not according to law, nor is it a necessity of nature, but an illusion.

10. 407: 21-28

यदि भ्रम कहता है, "मैंने अपनी याददाश्त खो दी है," तो इसका खंडन करें। मन का कोई संकाय नहीं खोया है। विज्ञान में, सभी अनन्त, आध्यात्मिक, परिपूर्ण, हर क्रिया में सामंजस्यपूर्ण हैं। अपने आदर्श के विपरीत अपने आदर्शों को अपने विचारों में उपस्थित होने दें। विचार का यह आधुनिकीकरण प्रकाश में लाता है, और दिव्य मन, जीवन को मृत्यु नहीं, आपकी चेतना में लाता है।

10. 407 : 21-28

If delusion says, "I have lost my memory," contradict it. No faculty of Mind is lost. In Science, all being is eternal, spiritual, perfect, harmonious in every action. Let the perfect model be present in your thoughts instead of its demoralized opposite. This spiritualization of thought lets in the light, and brings the divine Mind, Life not death, into your consciousness.

11. 289: 1-4, 14-20

सत्य का प्रदर्शन शाश्वत जीवन है। नश्वर मनुष्य कभी भी त्रुटि, पाप, बीमारी, और मृत्यु में विश्वास की लौकिक दुर्बलता से नहीं उठ सकता, जब तक कि वह यह न जान ले कि ईश्वर ही एकमात्र जीवन है।

यह तथ्य कि क्राइस्ट या सत्य, मृत्यु पर काबू पा लेता है और "आतंकियों का राजा" साबित हो जाता है, लेकिन एक नश्वर विश्वास, या त्रुटि, जिसे सत्य जीवन के आध्यात्मिक प्रमाणों से नष्ट कर देता है; और इससे पता चलता है कि मृत्यु के प्रति इंद्रियों को जो दिखाई देता है वह वास्तविक मनुष्य और वास्तविक ब्रह्मांड के लिए एक नश्वर भ्रम है, लेकिन मृत्यु-प्रक्रिया नहीं है।

11. 289 : 1-4, 14-20

Truth demonstrated is eternal life. Mortal man can never rise from the temporal débris of error, belief in sin, sickness, and death, until he learns that God is the only Life. 

The fact that the Christ, or Truth, overcame and still overcomes death proves the "king of terrors" to be but a mortal belief, or error, which Truth destroys with the spiritual evidences of Life; and this shows that what appears to the senses to be death is but a mortal illusion, for to the real man and the real universe there is no death-process.

12. 214: 5-8

यदि हनोक की धारणा उसकी भौतिक इंद्रियों के सामने सबूतों तक ही सीमित थी, तो वह कभी भी "ईश्वर के साथ नहीं चल सकता था," और न ही अनन्त जीवन के प्रदर्शन में निर्देशित हो सकता था।

12. 214 : 5-8

If Enoch's perception had been confined to the evidence before his material senses, he could never have "walked with God," nor been guided into the demonstration of life eternal.

13. 376: 10-16

पल्लीड अमान्य, जिसे आप रक्त के सेवन से बर्बाद होने की घोषणा करते हैं, को बताया जाना चाहिए कि रक्त ने कभी जीवन नहीं दिया और इसे कभी नहीं ले सकता, - कि जीवन आत्मा है, और एक अच्छे मकसद में अधिक जीवन और अमरता है और सभी रक्त की तुलना में कार्य करते हैं, जो कभी नश्वर नसों के माध्यम से बहते थे और जीवन की एक भौतिक भावना का अनुकरण करते थे।

13. 376 : 10-16

The pallid invalid, whom you declare to be wasting away with consumption of the blood, should be told that blood never gave life and can never take it away, — that Life is Spirit, and that there is more life and immortality in one good motive and act, than in all the blood, which ever flowed through mortal veins and simulated a corporeal sense of life.

14. 206: 25-31

क्या मनुष्य के लिए कोई जन्म या मृत्यु, आध्यात्मिक छवि और भगवान की समानता हो सकती है? भगवान ने बीमारी और मौत भेजने के बजाय, उन्हें नष्ट कर दिया, और प्रकाश अमरता में लाया। सर्वव्यापी और अनंत मन ने सभी को बनाया और सभी को शामिल किया। यह मन गलतियाँ नहीं करता है और बाद में उन्हें सही करता है। ईश्वर मनुष्य को पाप करने, बीमार होने या मरने के लिए प्रेरित नहीं करता है।

14. 206 : 25-31

Can there be any birth or death for man, the spiritual image and likeness of God? Instead of God sending sickness and death, He destroys them, and brings to light immortality. Omnipotent and infinite Mind made all and includes all. This Mind does not make mistakes and subsequently correct them. God does not cause man to sin, to be sick, or to die.

15. 492: 3-4, 7-12

सही तर्क के लिए, विचार से पहले केवल एक तथ्य होना चाहिए, अर्थात् आध्यात्मिक अस्तित्व।

पवित्र होना, समरसता, अमरता है। यह पहले से ही साबित हो गया है कि इस का ज्ञान, यहां तक कि छोटी सी डिग्री में, नश्वर लोगों के भौतिक और नैतिक स्तर को ऊपर उठाएगा, दीर्घायु को बढ़ाएगा, चरित्र को शुद्ध और ऊंचा करेगा। इस प्रकार प्रगति अंततः सभी त्रुटि को नष्ट कर देगी, और अमरता को प्रकाश में लाएगी।

15. 492 : 3-4, 7-12

For right reasoning there should be but one fact before the thought, namely, spiritual existence.

Being is holiness, harmony, immortality. It is already proved that a knowledge of this, even in small degree, will uplift the physical and moral standard of mortals, will increase longevity, will purify and elevate character. Thus progress will finally destroy all error, and bring immortality to light.

16. 496: 9-19

हम सभी को यह सीखना चाहिए कि जीवन ईश्वर है। अपने आप से पूछें: क्या मैं उस जीवन को जी रहा हूं जो सर्वोच्च भलाई के लिए है? क्या मैं सत्य और प्रेम की उपचार शक्ति का प्रदर्शन कर रहा हूँ? यदि ऐसा है, तो रास्ता उज्जवल हो जाएगा "पूरे दिन तक।" आपका फल यह साबित करेगा कि परमेश्वर की समझ मनुष्य को क्या लाती है। शाश्वत रूप से इस विचार पर दृढ़ रहें, - कि यह आध्यात्मिक विचार है, पवित्र आत्मा और मसीह, जो आपको वैज्ञानिक निश्चितता के साथ, अपने ईश्वरीय सिद्धांत, प्रेम, अंतर्निहित, अतिव्यापी, और सभी को शामिल करने के आधार पर प्रदर्शित करने में सक्षम बनाता है।

16. 496 : 9-19

We all must learn that Life is God. Ask yourself: Am I living the life that approaches the supreme good? Am I demonstrating the healing power of Truth and Love? If so, then the way will grow brighter "unto the perfect day." Your fruits will prove what the understanding of God brings to man. Hold perpetually this thought, — that it is the spiritual idea, the Holy Ghost and Christ, which enables you to demonstrate, with scientific certainty, the rule of healing, based upon its divine Principle, Love, underlying, overlying, and encompassing all true being.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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