रविवार 14 जून, 2020 |

रविवार 14 जून, 2020



विषयभगवान मनुष्य के संरक्षक हैं

SubjectGod the Preserver of Man

वर्ण पाठ: मत्ती 26 : 53

क्या तू नहीं समझता, कि मैं अपने पिता से बिनती कर सकता हूं, और वह स्वर्गदूतों की बारह पलटन से अधिक मेरे पास अभी उपस्थित कर देगा?”– मसीह यीशु



Golden Text: Matthew 26 : 53

Thinkest thou that I cannot now pray to my Father, and he shall presently give me more than twelve legions of angels?”– Christ Jesus




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2 राजा 6 : 15-17 • भजन संहिता 68: 17 • भजन संहिता 40: 4, 5


15     भोर को परमेश्वर के भक्त का टहलुआ उठा और निकल कर क्या देखता है कि घोड़ों और रथों समेत एक दल नगर को घेरे हुए पड़ा है। और उसके सेवक ने उस से कहा, हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?

16     उसने कहा, मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं।

17     तब एलीशा ने यह प्रार्थना की, हे यहोवा, इसकी आंखें खोल दे कि यह देख सके। तब यहोवा ने सेवक की आंखें खोल दीं, और जब वह देख सका, तब क्या देखा, कि एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है।

17     परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन हजारों हजार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्र स्थान में है।

4     क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है।

5     हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोलकर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती॥

Responsive Reading: II Kings 6 : 15-17 • Psalm 68 : 17 • Psalm 40 : 4, 5<

15.     And when the servant of the man of God was risen early, and gone forth, behold, an host compassed the city both with horses and chariots. And his servant said unto him, Alas, my master! how shall we do?

16.     And he answered, Fear not: for they that be with us are more than they that be with them.

17.     And Elisha prayed, and said, Lord, I pray thee, open his eyes, that he may see. And the Lord opened the eyes of the young man; and he saw: and, behold, the mountain was full of horses and chariots of fire round about Elisha.

17.     The chariots of God are twenty thousand, even thousands of angels: the Lord is among them, as in Sinai, in the holy place.

4.     Blessed is that man that maketh the Lord his trust.

5.     Many, O Lord my God, are thy wonderful works which thou hast done, and thy thoughts which are to us-ward: they cannot be reckoned up in order unto thee: if I would declare and speak of them, they are more than can be numbered.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. भजन संहिता 121 : 1, 2, 3 (वह), 7

1     मैंअपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?

2     मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है॥

3     ....तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।

7     यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।

1. Psalm 121 : 1, 2, 3 (he that), 7

1     I will lift up mine eyes unto the hills, from whence cometh my help.

2     My help cometh from the Lord, which made heaven and earth.

3     …he that keepeth thee will not slumber.

7     The Lord shall preserve thee from all evil: he shall preserve thy soul.

2. निर्गमन 23 : 20, 25

20     सुन, मैं एक दूत तेरे आगे आगे भेजता हूं जो मार्ग में तेरी रक्षा करेगा, और जिस स्थान को मैं ने तैयार किया है उस में तुझे पहुंचाएगा।

25     और तुम अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना करना, तब वह तेरे अन्न जल पर आशीष देगा, और तेरे बीच में से रोग दूर करेगा।

2. Exodus 23 : 20, 25

20     Behold, I send an Angel before thee, to keep thee in the way, and to bring thee into the place which I have prepared.

25     And ye shall serve the Lord your God, and he shall bless thy bread, and thy water; and I will take sickness away from the midst of thee.

3. मरकुस 5 : 25, 26 (पड़ा था)-34

25     और एक स्त्री, जिस को बारह वर्ष से लोहू बहने का रोग था।

26     ...जिस ने बहुत वैद्यों से बड़ा दुख उठाया और अपना सब माल व्यय करने पर भी कुछ लाभ न उठाया था, परन्तु और भी रोगी हो गई थी।

27     यीशु की चर्चा सुनकर, भीड़ में उसके पीछे से आई, और उसके वस्त्र को छू लिया।

28     क्योंकि वह कहती थी, यदि मैं उसके वस्त्र ही को छू लूंगी, तो चंगी हो जाऊंगी।

29     और तुरन्त उसका लोहू बहना बन्द हो गया; और उस ने अपनी देह में जान लिया, कि मैं उस बीमारी से अच्छी हो गई।

30     यीशु ने तुरन्त अपने में जान लिया, कि मुझ में से सामर्थ निकली है, और भीड़ में पीछे फिरकर पूछा; मेरा वस्त्र किस ने छूआ?

31     उसके चेलों ने उस से कहा; तू देखता है, कि भीड़ तुझ पर गिरी पड़ती है, और तू कहता है; कि किस ने मुझे छुआ?

32     तब उस ने उसे देखने के लिये जिस ने यह काम किया था, चारों ओर दृष्टि की।

33     तब वह स्त्री यह जानकर, कि मेरी कैसी भलाई हुई है, डरती और कांपती हुई आई, और उसके पांवों पर गिरकर, उस से सब हाल सच सच कह दिया।

34     उस ने उस से कहा; पुत्री तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है: कुशल से जा, और अपनी इस बीमारी से बची रह॥

3. Mark 5 : 25, 26 (had suffered)-34

25     And a certain woman, which had an issue of blood twelve years,

26     …had suffered many things of many physicians, and had spent all that she had, and was nothing bettered, but rather grew worse,

27     When she had heard of Jesus, came in the press behind, and touched his garment.

28     For she said, If I may touch but his clothes, I shall be whole.

29     And straightway the fountain of her blood was dried up; and she felt in her body that she was healed of that plague.

30     And Jesus, immediately knowing in himself that virtue had gone out of him, turned him about in the press, and said, Who touched my clothes?

31     And his disciples said unto him, Thou seest the multitude thronging thee, and sayest thou, Who touched me?

32     And he looked round about to see her that had done this thing.

33     But the woman fearing and trembling, knowing what was done in her, came and fell down before him, and told him all the truth.

34     And he said unto her, Daughter, thy faith hath made thee whole; go in peace, and be whole of thy plague.

4. यशायाह 63: 7, 9 (देवदूत), 16 (हे), 19 (से :)

7     जितना उपकार यहोवा ने हम लोगों का किया अर्थात इस्राएल के घराने पर दया और अत्यन्त करूणा कर के उसने हम से जितनी भलाई, कि उस सब के अनुसार मैं यहोवा के करूणामय कामों का वर्णन और उसका गुणानुवाद करूंगा।

9     ... और उसके सम्मुख रहने वाले दूत ने उनका उद्धार किया; प्रेम और कोमलता से उसने आप ही उन को छुड़ाया; उसने उन्हें उठाया और प्राचीनकाल से सदा उन्हें लिए फिरा।

16     ... हे यहोवा, तू हमारा पिता और हमारा छुड़ाने वाला है; प्राचीनकाल से यही तेरा नाम है।

19     हम आपके हे।

4. Isaiah 63 : 7, 9 (the angel), 16 (O), 19 (to :)

7     I will mention the lovingkindnesses of the Lord, and the praises of the Lord, according to all that the Lord hath bestowed on us, and the great goodness toward the house of Israel, which he hath bestowed on them according to his mercies, and according to the multitude of his lovingkindnesses.

9     …the angel of his presence saved them: in his love and in his pity he redeemed them; and he bare them, and carried them all the days of old.

16     …O Lord, art our father, our redeemer; thy name is from everlasting.

19     We are thine:

5. नीतिवचन 3 : 1-3 (से 1st :), 5, 6

1     हेमेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना; अपने हृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना;

2     क्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा।

3     कृपा और सच्चाई तुझ से अलग न होने पाएं।

5     तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।

6     उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।

5. Proverbs 3 : 1-3 (to 1st :), 5, 6

1     My son, forget not my law; but let thine heart keep my commandments:

2     For length of days, and long life, and peace, shall they add to thee.

3     Let not mercy and truth forsake thee:

5     Trust in the Lord with all thine heart; and lean not unto thine own understanding.

6     In all thy ways acknowledge him, and he shall direct thy paths.

6. यिर्मयाह: 29 : 11-14 (से 2nd ,)

11     क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानी की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा।

12     तब उस समय तुम मुझ को पुकारोगे और आकर मुझ से प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा।

13     तुम मुझे ढूंढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे।

14     मैं तुम्हें मिलूंगा, यहोवा की यह वाणी है, और बंधुआई से लौटा ले आऊंगा।

6. Jeremiah: 29 : 11-14 (to 2nd ,

11     For I know the thoughts that I think toward you, saith the Lord, thoughts of peace, and not of evil, to give you an expected end.

12     Then shall ye call upon me, and ye shall go and pray unto me, and I will hearken unto you.

13     And ye shall seek me, and find me, when ye shall search for me with all your heart.

14     And I will be found of you, saith the Lord: and I will turn away your captivity,

7. प्रेरितों के काम 12 : 1, 3 (वह आगे बढ़ा) (से 1st .), 4-11

1     उस समय हेरोदेस राजा ने कलीसिया के कई एक व्यक्तियों को दुख देने के लिये उन पर हाथ डाले।

3     ... तो उस ने पतरस को भी पकड़ लिया।

4     और उस ने उसे पकड़ के बन्दीगृह में डाला, और रखवाली के लिये, चार चार सिपाहियों के चार पहरों में रखा: इस मनसा से कि फसह के बाद उसे लोगों के साम्हने लाए।

5     सो बन्दीगृह में पतरस की रखवाली हो रही थी; परन्तु कलीसिया उसके लिये लौ लगाकर परमेश्वर से प्रार्थना कर रही थी।

6     और जब हेरोदेस उसे उन के साम्हने लाने को था, तो उसी रात पतरस दो जंजीरों से बन्धा हुआ, दो सिपाहियों के बीच में सो रहा था: और पहरूए द्वार पर बन्दीगृह की रखवाली कर रहे थे।

7     तो देखो, प्रभु का एक स्वर्गदूत आ खड़ा हुआ: और उस कोठरी में ज्योति चमकी: और उस ने पतरस की पसली पर हाथ मार के उसे जगाया, और कहा; उठ, फुरती कर, और उसके हाथ से जंजीरें खुलकर गिर पड़ीं।

8     तब स्वर्गदूत ने उस से कहा; कमर बान्ध, और अपने जूते पहिन ले: उस ने वैसा ही किया, फिर उस ने उस से कहा; अपना वस्त्र पहिनकर मेरे पीछे हो ले।

9     वह निकलकर उसके पीछे हो लिया; परन्तु यह न जानता था, कि जो कुछ स्वर्गदूत कर रहा है, वह सचमुच है, वरन यह समझा, कि मैं दर्शन देख रहा हूं।

10     तब वे पहिल और दूसरे पहरे से निकलकर उस लोहे के फाटक पर पहुंचे, जो नगर की ओर है; वह उन के लिये आप से आप खुल गया: और वे निकलकर एक ही गली होकर गए, इतने में स्वर्गदूत उसे छोड़कर चला गया।

11     तब पतरस ने सचेत होकर कहा; अब मैं ने सच जान लिया कि प्रभु ने अपना स्वर्गदूत भेजकर मुझे हेरोदेस के हाथ से छुड़ा लिया, और यहूदियों की सारी आशा तोड़ दी।

7. Acts 12 : 1, 3 (he proceeded) (to 1st .), 4-11

1     Now about that time Herod the king stretched forth his hands to vex certain of the church.

3     …he proceeded further to take Peter also.

4     And when he had apprehended him, he put him in prison, and delivered him to four quaternions of soldiers to keep him; intending after Easter to bring him forth to the people.

5     Peter therefore was kept in prison: but prayer was made without ceasing of the church unto God for him.

6     And when Herod would have brought him forth, the same night Peter was sleeping between two soldiers, bound with two chains: and the keepers before the door kept the prison.

7     And, behold, the angel of the Lord came upon him, and a light shined in the prison: and he smote Peter on the side, and raised him up, saying, Arise up quickly. And his chains fell off from his hands.

8     And the angel said unto him, Gird thyself, and bind on thy sandals. And so he did. And he saith unto him, Cast thy garment about thee, and follow me.

9     And he went out, and followed him; and wist not that it was true which was done by the angel; but thought he saw a vision.

10     When they were past the first and the second ward, they came unto the iron gate that leadeth unto the city; which opened to them of his own accord: and they went out, and passed on through one street; and forthwith the angel departed from him.

11     And when Peter was come to himself, he said, Now I know of a surety, that the Lord hath sent his angel, and hath delivered me out of the hand of Herod, and from all the expectation of the people of the Jews.

8. भजन संहिता 91 : 9-16

9     हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,

10     इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा॥

11     क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।

12     वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।

13     तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।

14     उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।

15     जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।

16     मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा॥

8. Psalm 91 : 9-16

9     Because thou hast made the Lord, which is my refuge, even the most High, thy habitation;

10     There shall no evil befall thee, neither shall any plague come nigh thy dwelling.

11     For he shall give his angels charge over thee, to keep thee in all thy ways.

12     They shall bear thee up in their hands, lest thou dash thy foot against a stone.

13     Thou shalt tread upon the lion and adder: the young lion and the dragon shalt thou trample under feet.

14     Because he hath set his love upon me, therefore will I deliver him: I will set him on high, because he hath known my name.

15     He shall call upon me, and I will answer him: I will be with him in trouble; I will deliver him, and honour him.

16     With long life will I satisfy him, and shew him my salvation.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 587 : 5-8

परमेश्वर। मैं जो महान हूं; सर्व-ज्ञान, सर्व-दर्शन, सर्व-कार्य, सर्व-ज्ञान, सर्व-प्रिय और शाश्वत; सिद्धांत; मन; अन्त: मन; आत्मा; जिंदगी; सत्य; प्रेम; सभी पदार्थ; बुद्धि।

1. 587 : 5-8

God. The great I am; the all-knowing, all-seeing, all-acting, all-wise, all-loving, and eternal; Principle; Mind; Soul; Spirit; Life; Truth; Love; all substance; intelligence.

2. 487 : 27-1

यह समझ कि जीवन ईश्वर है, आत्मा, जीवन की मृत्यु रहित वास्तविकता, उसकी सर्वशक्तिमानता और अमरता में हमारे विश्वास को मजबूत करके हमारे दिनों को लंबा कर देती है।

यह विश्वास एक समझे हुए सिद्धांत पर निर्भर करता है। यह सिद्धांत संपूर्ण रोगग्रस्त बनाता है, और चीजों के स्थायी और सामंजस्यपूर्ण चरणों को सामने लाता है।

2. 487 : 27-1

The understanding that Life is God, Spirit, lengthens our days by strengthening our trust in the deathless reality of Life, its almightiness and immortality.

This faith relies upon an understood Principle. This Principle makes whole the diseased, and brings out the enduring and harmonious phases of things.

3. 23 : 17-20

आस्था, आध्यात्मिक समझ के लिए उन्नत, आत्मा से प्राप्त साक्ष्य है, जो हर तरह के पाप का खंडन करता है और भगवान के दावों को स्थापित करता है।

3. 23 : 17-20

Faith, advanced to spiritual understanding, is the evidence gained from Spirit, which rebukes sin of every kind and establishes the claims of God.

4. 512 : 8-16

आत्मा शक्ति, उपस्थिति, और शक्ति का प्रतीक है, और पवित्र विचारों द्वारा भी, प्रेम से युक्त है। उनकी उपस्थिति के ये देवदूत, जिनके पास सबसे पवित्र प्रभार है, मन के आध्यात्मिक वातावरण में प्रचुर मात्रा में है, और परिणामस्वरूप अपनी स्वयं की विशेषताओं को पुन: पेश करते हैं। उनके व्यक्तिगत रूप जिन्हें हम नहीं जानते, लेकिन हम जानते हैं कि उनके स्वभाव भगवान के स्वभाव से संबद्ध हैं; और आध्यात्मिक आशीर्वाद, इस प्रकार, बाहरी रूप से, अभी तक व्यक्तिपरक हैं, विश्वास और आध्यात्मिक समझ के राज्य हैं।

4. 512 : 8-16

Spirit is symbolized by strength, presence, and power, and also by holy thoughts, winged with Love. These angels of His presence, which have the holiest charge, abound in the spiritual atmosphere of Mind, and consequently reproduce their own characteristics. Their individual forms we know not, but we do know that their natures are allied to God's nature; and spiritual blessings, thus typified, are the externalized, yet subjective, states of faith and spiritual understanding.

5. 581 : 4-7

स्वर्गदूतों। ईश्वर के विचार मनुष्य को पास करते हैं; आध्यात्मिक अंतर्ज्ञान, शुद्ध और परिपूर्ण; अच्छाई, पवित्रता, और अमरता की प्रेरणा, सभी बुराई, कामुकता और नश्वरता का प्रतिकार करती है।

5. 581 : 4-7

Angels. God's thoughts passing to man; spiritual intuitions, pure and perfect; the inspiration of goodness, purity, and immortality, counteracting all evil, sensuality, and mortality.

6. 299 : 7-17

मेरे स्वर्गदूत अतिविशिष्ट विचार हैं, जो कुछ सेपुलचर के दरवाजे पर दिखाई देते हैं, जिसमें मानव विश्वास ने अपने सबसे प्यारे सांसारिक आशाओं को दफन कर दिया है। सफेद उंगलियों के साथ वे एक नए और गौरवशाली विश्वास की ओर इशारा करते हैं, जीवन के उच्च आदर्शों और इसकी खुशियों के लिए। देवदूत भगवान के प्रतिनिधि हैं। ये उर्ध्वगामी प्राणी कभी भी स्व, पाप, या भौतिकता की ओर नहीं जाते हैं, बल्कि सभी अच्छे लोगों के दिव्य सिद्धांत के लिए मार्गदर्शन करते हैं, जो हर वास्तविक व्यक्तित्व, छवि या भगवान की समानता को इकट्ठा करता है। बयाना देकर इन आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को ध्यान में रखते हुए वे हमारे साथ छेड़छाड़ करते हैं, और हम मनोरंजन करते हैं "स्वर्गदूतों।"

6. 299 : 7-17

My angels are exalted thoughts, appearing at the door of some sepulchre, in which human belief has buried its fondest earthly hopes. With white fingers they point upward to a new and glorified trust, to higher ideals of life and its joys. Angels are God's representatives. These upward-soaring beings never lead towards self, sin, or materiality, but guide to the divine Principle of all good, whither every real individuality, image, or likeness of God, gathers. By giving earnest heed to these spiritual guides they tarry with us, and we entertain "angels unawares."

7. 174 : 9-14

सामग्री के दृष्टिकोण से ऊपर उठते हुए, विचारों के नक्शेकदम धीमे हैं, और यात्री को एक लंबी रात को चित्रित करते हैं; लेकिन उनकी उपस्थिति के स्वर्गदूतों - आध्यात्मिक अंतर्ज्ञान जो हमें बताते हैं कि "रात बहुत दूर है, दिन निकट है" - संकट में हमारे संरक्षक हैं।

7. 174 : 9-14

The footsteps of thought, rising above material standpoints, are slow, and portend a long night to the traveller; but the angels of His presence — the spiritual intuitions that tell us when "the night is far spent, the day is at hand" — are our guardians in the gloom.

8. 203 : 17-18

हम एक से अधिक सर्वोच्च शासक या भगवान से कम किसी शक्ति में विश्वास करने के लिए प्रवण हैं।

8. 203 : 17-18

We are prone to believe either in more than one Supreme Ruler or in some power less than God.

9. 204 : 3-11, 18-19

सभी प्रकार के त्रुटि झूठे निष्कर्षों का समर्थन करते हैं कि एक से अधिक जीवन हैं; वह भौतिक इतिहास उतना ही वास्तविक है और आध्यात्मिक इतिहास जैसा है; वह नश्वर त्रुटि उतना ही मानसिक है जितना कि अमर सत्य; और यह कि दो अलग-अलग, विरोधी शक्तियां और प्राणी हैं, दो शक्तियां, - अर्थात्, आत्मा और पदार्थ, - जिसके परिणामस्वरूप एक तीसरा व्यक्ति (नश्वर मनुष्य) है जो पाप, बीमारी और मृत्यु के भ्रम को वहन करता है।

इस तरह के सिद्धांत स्पष्ट रूप से गलत हैं। वे कभी भी विज्ञान की परीक्षा में खड़े नहीं हो सकते।

9. 204 : 3-11, 18-19

All forms of error support the false conclusions that there is more than one Life; that material history is as real and living as spiritual history; that mortal error is as conclusively mental as immortal Truth; and that there are two separate, antagonistic entities and beings, two powers, — namely, Spirit and matter, — resulting in a third person (mortal man) who carries out the delusions of sin, sickness, and death.

Such theories are evidently erroneous. They can never stand the test of Science.

10. 192 : 19-26

विज्ञान में, आपके पास भगवान के विपरीत कोई शक्ति नहीं हो सकती है, और शारीरिक इंद्रियों को अपनी झूठी गवाही देनी चाहिए। अच्छे के लिए आपका प्रभाव आपके द्वारा सही पैमाने पर फेंके गए वजन पर निर्भर करता है। आप जो अच्छा करते हैं और अवतार लेते हैं वह आपको एकमात्र शक्ति प्राप्त करने योग्य बनाता है। बुराई शक्ति नहीं है। यह ताकत का मजाक है, जो अपनी कमजोरी को मिटाता है और गिरता है, कभी नहीं उठता।

10. 192 : 19-26

In Science, you can have no power opposed to God, and the physical senses must give up their false testimony. Your influence for good depends upon the weight you throw into the right scale. The good you do and embody gives you the only power obtainable. Evil is not power. It is a mockery of strength, which erelong betrays its weakness and falls, never to rise.

11. 183 : 21-25

डिवाइन माइंड सही ढंग से मनुष्य की संपूर्ण आज्ञाकारिता, स्नेह और शक्ति की माँग करता है। किसी भी कम निष्ठा के लिए कोई आरक्षण नहीं किया जाता है। सत्य का पालन मनुष्य को शक्ति और सामर्थ्य देता है। त्रुटि के अधीन होने से शक्ति का नुकसान होता है।

11. 183 : 21-25

Divine Mind rightly demands man's entire obedience, affection, and strength. No reservation is made for any lesser loyalty. Obedience to Truth gives man power and strength. Submission to error superinduces loss of power.

12. 495 : 14-20

जब बीमारी या पाप का भ्रम आपको घेरता है, तो आपको भगवान और उनके विचार पर दृढ़ता से टिकना चाहिए अपने विचार में पालन करने के लिए उसकी समानता के अलावा कुछ भी अनुमति न दें न तो डर और न ही संदेह को अपनी स्पष्ट भावना और शांत विश्वास का पालन करें, कि जीवन के सामंजस्यपूर्ण जीवन की मान्यता - जैसा कि जीवन है - किसी भी दर्दनाक भावना को नष्ट कर सकता है या उस पर विश्वास कर सकता है, जो जीवन नहीं है।

12. 495 : 14-20

When the illusion of sickness or sin tempts you, cling steadfastly to God and His idea. Allow nothing but His likeness to abide in your thought. Let neither fear nor doubt overshadow your clear sense and calm trust, that the recognition of life harmonious — as Life eternally is — can destroy any painful sense of, or belief in, that which Life is not.

13. 130 : 26-2

यदि ईश्वर या सत्य के वर्चस्व के लिए विज्ञान के मजबूत दावे पर विचार किया गया है, और अच्छाई के वर्चस्व पर संदेह किया गया है, क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि, दुष्टतापूर्ण, बुराई के जोरदार दावों पर चकित होना और उन पर संदेह करना, और अब उसे त्यागने के लिए पाप और अप्राकृतिक प्रेम करना स्वाभाविक नहीं लगता, - अब बुराई की कभी भी कल्पना करना अच्छा नहीं है और वर्तमान अच्छा है? सत्य को त्रुटि के रूप में इतना आश्चर्यजनक और अप्राकृतिक नहीं होना चाहिए, और त्रुटि को सत्य के रूप में वास्तविक नहीं होना चाहिए।

13. 130 : 26-2

If thought is startled at the strong claim of Science for the supremacy of God, or Truth, and doubts the supremacy of good, ought we not, contrariwise, to be astounded at the vigorous claims of evil and doubt them, and no longer think it natural to love sin and unnatural to forsake it, — no longer imagine evil to be ever-present and good absent? Truth should not seem so surprising and unnatural as error, and error should not seem so real as truth.

14. 548 : 13-17

नश्वर त्रुटि की हर पीड़ा त्रुटि को नष्ट करने में मदद करती है, और इसलिए अमर सत्य की आशंका को दूर करता है। यह प्रति घंटा चलने वाला नया जन्म है, जिसके द्वारा पुरुष स्वर्गदूतों, ईश्वर के सच्चे विचारों, होने की आध्यात्मिक भावना का मनोरंजन कर सकते हैं।

14. 548 : 13-17

Every agony of mortal error helps error to destroy error, and so aids the apprehension of immortal Truth. This is the new birth going on hourly, by which men may entertain angels, the true ideas of God, the spiritual sense of being.

15. 567 : 3-6, 7-8

ये स्वर्गदूत हमें गहराई तक पहुँचाते हैं। सत्य और प्रेम, शोक की घड़ी में आते हैं, जब मजबूत विश्वास या आध्यात्मिक शक्ति कुश्ती और भगवान की समझ के माध्यम से प्रबल होती है। … असीम, सदा-सदा के लिए, सब प्रेम है, और न कोई त्रुटि है, न कोई पाप, न बीमारी, न मृत्यु।

15. 567 : 3-6, 7-8

These angels deliver us from the depths. Truth and Love come nearer in the hour of woe, when strong faith or spiritual strength wrestles and prevails through the understanding of God. … To infinite, ever-present Love, all is Love, and there is no error, no sin, sickness, nor death.

16. 224: 29-31 (से 2nd.)

भगवान की शक्ति कैद में उद्धार लाता है। कोई भी शक्ति दिव्य प्रेम का सामना नहीं कर सकती।

16. 224 : 29-31 (to 2nd .)

The power of God brings deliverance to the captive. No power can withstand divine Love.

17. 372 : 14-17

जब मनुष्य क्रिश्चियन साइंस का प्रदर्शन करता है, तो वह एकदम सही होगा। वह न तो पाप कर सकता है, न पीड़ित, मामले के अधीन हो सकता है, और न ही परमेश्वर के कानून की अवज्ञा कर सकता है। इसलिए वह स्वर्ग में स्वर्गदूतों के रूप में होगा।

17. 372 : 14-17

When man demonstrates Christian Science absolutely, he will be perfect. He can neither sin, suffer, be subject to matter, nor disobey the law of God. Therefore he will be as the angels in heaven.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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