रविवार 13 जून, 2021



विषयभगवान मनुष्य के संरक्षक

SubjectGod the Preserver of Man

वर्ण पाठ: स्वर्ण पाठ: भजन संहिता 121 : 8

"यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा॥"



Golden Text: Psalm 121 : 8

The Lord shall preserve thy going out and thy coming in from this time forth, and even for evermore.




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उत्तरदायी अध्ययन: भजन संहिता 16 : 1, 8, 9 • 2 शमूएल 22: 33 • 2 इतिहास 16: 9 • 1 राजा 8: 61


1     हेईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं।

8     मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा॥

9     इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।

33     यह वही ईश्वर है, जो मेरा अति दृढ़ क़िला है, वह खरे मनुष्य को अपने मार्ग में लिए चलता है।

9     देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए।

61     तो तुम्हारा मन हमारे परमेश्वर यहोवा की ओर ऐसी पूरी रीति से लगा रहे, कि आज की नाईं उसकी विधियों पर चलते और उसकी आज्ञाएं मानते रहो।

Responsive Reading: Psalm 16 : 1, 8, 9; II Samuel 22 : 33; II Chronicles 16 : 9; I Kings 8 : 61

1.     Preserve me, O God: for in thee do I put my trust.

8.     I have set the Lord always before me: because he is at my right hand, I shall not be moved.

9.     Therefore my heart is glad, and my glory rejoiceth: my flesh also shall rest in hope.

33.     God is my strength and power: and he maketh my way perfect.

9.     For the eyes of the Lord run to and fro throughout the whole earth, to shew himself strong in the behalf of them whose heart is perfect toward him.

61.     Let your heart therefore be perfect with the Lord our God, to walk in his statutes, and to keep his commandments.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. व्यवस्थाविवरण 32 : 3 (वर्णन), 4 (से 1st :)

3     ... तुम अपने परमेश्वर की महिमा को मानो!

4     वह चट्टान है, उसका काम खरा है॥

1. Deuteronomy 32 : 3 (ascribe), 4 (to 1st :)

3     …ascribe ye greatness unto our God.

4     He is the Rock, his work is perfect:

2. भजन संहिता 37: 37

37     खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है।

2. Psalm 37 : 37

37     Mark the perfect man, and behold the upright: for the end of that man is peace.

3. अय्यूब 1 : 1, 6-9 (से 2nd ,), 11, 12, 14 (से 2nd ,), 16 (आग) (से ;), 18 (तेरा)-20

1     ऊज़ देश में अय्यूब नाम एक पुरुष था; वह खरा और सीधा था और परमेश्वर का भय मानता और बुराई से परे रहता था।

6     एक दिन यहोवा परमेश्वर के पुत्र उसके साम्हने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी आया।

7     यहोवा ने शैतान से पूछा, तू कहां से आता है? शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, कि पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।

8     यहोवा ने शैतान से पूछा, क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय मानने वाला और बुराई से दूर रहने वाला मनुष्य और कोई नहीं है।

9     शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया,

11     परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुंह पर तेरी निन्दा करेगा।

12     यहोवा ने शैतान से कहा, सुन, जो कुछ उसका है, वह सब तेरे हाथ में है; केवल उसके शरीर पर हाथ न लगाना। तब शैतान यहोवा के साम्हने से चला गया।

14     तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा,

16     परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए।

18     तेरे बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे,

19     कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचण्ड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।

20     तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दण्डवत् कर,

3. Job 1 : 1, 6-9 (to 2nd ,), 11, 12, 14 (to 2nd ,), 16 (The fire) (to ;), 18 (Thy)-20

1     There was a man in the land of Uz, whose name was Job; and that man was perfect and upright, and one that feared God, and eschewed evil.

6     Now there was a day when the sons of God came to present themselves before the Lord, and Satan came also among them.

7     And the Lord said unto Satan, Whence comest thou? Then Satan answered the Lord, and said, From going to and fro in the earth, and from walking up and down in it.

8     And the Lord said unto Satan, Hast thou considered my servant Job, that there is none like him in the earth, a perfect and an upright man, one that feareth God, and escheweth evil?

9     Then Satan answered the Lord, and said,

11     But put forth thine hand now, and touch all that he hath, and he will curse thee to thy face.

12     And the Lord said unto Satan, Behold, all that he hath is in thy power; only upon himself put not forth thine hand. So Satan went forth from the presence of the Lord.

14     And there came a messenger unto Job, and said,

16     The fire of God is fallen from heaven, and hath burned up the sheep, and the servants, and consumed them;

18     Thy sons and thy daughters were eating and drinking wine in their eldest brother’s house:

19     And, behold, there came a great wind from the wilderness, and smote the four corners of the house, and it fell upon the young men, and they are dead; and I only am escaped alone to tell thee.

20     Then Job arose, and rent his mantle, and shaved his head, and fell down upon the ground, and worshipped,

4. अय्यूब 2 : 3 (से 1st ,), 3 (फिर भी) (से ,), 4 (से 2nd ,), 5-7, 11, 13 (के लिये)

3     यहोवा ने शैतान से पूछा ... तौभी वह अब तक अपनी खराई पर बना है।

4     शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया।

5     सो केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हड्डियां और मांस छू, तब वह तेरे मुंह पर तेरी निन्दा करेगा।

6     यहोवा ने शैतान से कहा, सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।

7     तब शैतान यहोवा के साम्हने से निकला, और अय्यूब को पांव के तलवे से ले सिर की चोटी तक बड़े बड़े फोड़ों से पीड़ित किया।

11     जब तेमानी एलीपज, और शूही बिलदद, और नामाती सोपर, अय्यूब के इन तीन मित्रों ने इस सब विपत्ति का समाचार पाया जो उस पर पड़ी थीं, तब वे आपस में यह ठान कर कि हम अय्यूब के पास जा कर उसके संग विलाप करेंगे, और उसको शान्ति देंगे, अपने अपने यहां से उसके पास चले।

13     ... परन्तु उसका दु: ख बहुत ही बड़ा जान कर किसी ने उस से एक भी बात न कही।

4. Job 2 : 3 (to 1st ,), 3 (still) (to ,), 4 (to 2nd ,), 5-7, 11, 13 (for)

3     And the Lord said unto Satan, … still he holdeth fast his integrity,

4     And Satan answered the Lord, and said,

5     But put forth thine hand now, and touch his bone and his flesh, and he will curse thee to thy face.

6     And the Lord said unto Satan, Behold, he is in thine hand; but save his life.

7     So went Satan forth from the presence of the Lord, and smote Job with sore boils from the sole of his foot unto his crown.

11     Now when Job’s three friends heard of all this evil that was come upon him, they came every one from his own place; Eliphaz the Temanite, and Bildad the Shuhite, and Zophar the Naamathite: for they had made an appointment together to come to mourn with him and to comfort him.

13     …for they saw that his grief was very great.

5. अय्यूब 3 : 1, 3, 25 (से ,)

1     इसके बाद अय्यूब मुंह खोल कर अपने जन्मदिन को धिक्कारने

3     वह दिन जल जाए जिस में मैं उत्पन्न हुआ, और वह रात भी जिस में कहा गया, कि बेटे का गर्भ रहा।

25     क्योंकि जिस डरावनी बात से मैं डरता हूँ, वही मुझ पर आ पड़ती है।

5. Job 3 : 1, 3, 25 (to ,)

1     After this opened Job his mouth, and cursed his day.

3     Let the day perish wherein I was born, and the night in which it was said, There is a man child conceived.

25     For the thing which I greatly feared is come upon me,

6. अय्यूब 4 : 1, 3, 5

1     तब तेमानी एलीपज ने कहा,

3     सुन, तू ने बहुतों को शिक्षा दी है, और निर्बल लोगों को बलवन्त किया है।

5     परन्तु अब विपत्ति तो तुझी पर आ पड़ी, और तू निराश हुआ जाता है; उसने तुझे छुआ और तू घबरा उठा।

6. Job 4 : 1, 3, 5

1     Then Eliphaz the Temanite answered and said,

3     Behold, thou hast instructed many, and thou hast strengthened the weak hands.

5     But now it is come upon thee, and thou faintest; it toucheth thee, and thou art troubled.

7. अय्यूब 6 : 1

1     फिर अय्यूब ने कहा,

7. Job 6 : 1

1     But Job answered and said,

8. अय्यूब 7: 20

20     हे मनुष्यों के ताकने वाले, मैं ने पाप तो किया होगा, तो मैं ने तेरा क्या बिगाड़ा? तू ने क्यों मुझ को अपना निशाना बना लिया है, यहां तक कि मैं अपने ऊपर आप ही बोझ हुआ हूँ?

8. Job 7 : 20

20     I have sinned; what shall I do unto thee, O thou preserver of men? why hast thou set me as a mark against thee, so that I am a burden to myself?

9. अय्यूब 8: 1, 3, 19, 20

1     तब शूही बिलदद ने कहा,

3     क्या ईश्वर अन्याय करता है? और क्या सर्वशक्तिमान धर्म को उलटा करता है?

19     देख, उसकी आनन्द भरी चाल यही है; फिर उसी मिट्टी में से दूसरे उगेंगे।

20     देख, ईश्वर न तो खरे मनुष्य को निकम्मा जान कर छोड़ देता है, और न बुराई करने वालों को संभालता है।

9. Job 8 : 1, 3, 19, 20

1     Then answered Bildad the Shuhite, and said,

3     Doth God pervert judgment? or doth the Almighty pervert justice?

19     Behold, this is the joy of his way, and out of the earth shall others grow.

20     Behold, God will not cast away a perfect man, neither will he help the evil doers:

10. अय्यूब 9: 1, 20, 21

1     तब अय्यूब ने कहा,

20     चाहे मैं निर्दोष ही क्यों न हूँ, परन्तु अपने ही मुंह से दोषी ठहरूंगा; खरा होने पर भी वह मुझे कुटिल ठहराएगा।

21     मैं खरा तो हूँ, परन्तु अपना भेद नहीं जानता; अपने जीवन से मुझे घृण आती है।

10. Job 9 : 1, 20, 21

1     Then Job answered and said,

20     If I justify myself, mine own mouth shall condemn me: if I say, I am perfect, it shall also prove me perverse.

21     Though I were perfect, yet would I not know my soul: I would despise my life.

11. अय्यूब 11: 1, 6 (जानना), 7

1     तब नामाती सोपर ने कहा:

6     इसलिये जान ले, कि ईश्वर तेरे अधर्म में से बहुत कुछ भूल जाता है।

7     क्या तू ईश्वर का गूढ़ भेद पा सकता है? और क्या तू सर्वशक्तिमान का मर्म पूरी रीति से जांच सकता है?

11. Job 11 : 1, 6 (Know), 7

1     Then answered Zophar the Naamathite, and said,

6     Know therefore that God exacteth of thee less than thine iniquity deserveth.

7     Canst thou by searching find out God? canst thou find out the Almighty unto perfection?

12. अय्यूब 38: 1-4, 33

1     तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया,

2     यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है?

3     पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे।

4     जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।

33     क्या तू आकाशमण्डल की विधियां जानता और पृथ्वी पर उनका अधिकार ठहरा सकता है?

12. Job 38 : 1-4, 33

1     Then the Lord answered Job out of the whirlwind, and said,

2     Who is this that darkeneth counsel by words without knowledge?

3     Gird up now thy loins like a man; for I will demand of thee, and answer thou me.

4     Where wast thou when I laid the foundations of the earth? declare, if thou hast understanding.

33     Knowest thou the ordinances of heaven? canst thou set the dominion thereof in the earth?

13. अय्यूब 40: 8, 10

8     क्या तू मेरा न्याय भी व्यर्थ ठहराएगा? क्या तू आप निर्दोष ठहरने की मनसा से मुझ को दोषी ठहराएगा?

10     अब अपने को महिमा और प्रताप से संवार और ऐश्वर्य्य और तेज के वस्त्र पहिन ले।

13. Job 40 : 8, 10

8     Wilt thou also disannul my judgment? wilt thou condemn me, that thou mayest be righteous?

10     Deck thyself now with majesty and excellency; and array thyself with glory and beauty.

14. अय्यूब 42: 1, 2, 3 (इसलिये), 5, 7, 8 (जाओ) (से 1st :), 9 (से :), 10, 12 (से :)

1     तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया;

2     मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।

3     ... परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिन को मैं जानता भी नहीं था।

5     मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;

7     और ऐसा हुआ कि जब यहोवा ये बातें अय्यूब से कह चुका, तब उसने तेमानी एलीपज से कहा, मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही।

8     मेरे दास अय्यूब के पास जा कर अपने निमित्त होमबलि चढ़ाओ, तब मेरा दास अय्यूब तुम्हारे लिये प्रार्थना करेगा

9     यह सुन तेमानी एलीपज, शूही बिल्दद और नामाती सोपर ने जा कर यहोवा की आाज्ञा के अनुसार किया।

10     जब अय्यूब ने अपने मित्रों के लिये प्रार्थना की, तब यहोरवा ने उसका सारा दु:ख दूर किया, और जितना अय्यूब का पहिले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया।

12     और यहोवा ने अय्यूब के पिछले दिनों में उसको अगले दिनों से अधिक आशीष दी।

14. Job 42 : 1, 2, 3 (therefore), 5, 7, 8 (go) (to 1st :), 9 (to :), 10, 12 (to :)

1     Then Job answered the Lord, and said,

2     I know that thou canst do every thing, and that no thought can be withholden from thee.

3     …therefore have I uttered that I understood not; things too wonderful for me, which I knew not.

5     I have heard of thee by the hearing of the ear: but now mine eye seeth thee.

7     And it was so, that after the Lord had spoken these words unto Job, the Lord said to Eliphaz the Temanite, My wrath is kindled against thee, and against thy two friends: for ye have not spoken of me the thing that is right, as my servant Job hath.

8     …go to my servant Job, and offer up for yourselves a burnt offering; and my servant Job shall pray for you:

9     So Eliphaz the Temanite and Bildad the Shuhite and Zophar the Naamathite went, and did according as the Lord commanded them:

10     And the Lord turned the captivity of Job, when he prayed for his friends: also the Lord gave Job twice as much as he had before.

12     So the Lord blessed the latter end of Job more than his beginning:

15. 2 तीमुथियुस 1: 1, 2, 7

1     पौलुस की ओर से जो उस जीवन की प्रतिज्ञा के अनुसार जो मसीह यीशु में है, परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है।

2     प्रिय पुत्र तीमुथियुस के नाम॥ परमेश्वर पिता और हमारे प्रभु मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह और दया और शान्ति मिलती रहे॥

7     क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।

15. II Timothy 1 : 1, 2, 7

1     Paul, an apostle of Jesus Christ by the will of God, according to the promise of life which is in Christ Jesus,

2     To Timothy, my dearly beloved son: Grace, mercy, and peace, from God the Father and Christ Jesus our Lord.

7     For God hath not given us the spirit of fear; but of power, and of love, and of a sound mind.

16. 2 तीमुथियुस 2: 1

1     इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्त हो जा।

16. II Timothy 2 : 1

1     Thou therefore, my son, be strong in the grace that is in Christ Jesus.

17. 2 तीमुथियुस 3: 2 (से 1st,), 4 (सुख के प्रेमी), 5, 14

2     क्योंकि मनुष्य अपस्वार्थी।

4     ... परमेश्वर के नहीं वरन सुखविलास ही के चाहने वाले होंगे।

5     वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना।

14     पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था

17. II Timothy 3 : 2 (to 1st ,), 4 (lovers of pleasures), 5, 14

2     For men shall be lovers of their own selves,

4     …lovers of pleasures more than lovers of God;

5     Having a form of godliness, but denying the power thereof: from such turn away.

14     But continue thou in the things which thou hast learned and hast been assured of, knowing of whom thou hast learned them;

18. 2 कुरिन्थियों 13 : 11 (परिपूर्ण हों)

11     सिद्ध बनते जाओ; ढाढ़स रखो; एक ही मन रखो; मेल से रहो, और प्रेम और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हारे साथ होगा।

18. II Corinthians 13 : 11 (Be perfect)

11     Be perfect, be of good comfort, be of one mind, live in peace; and the God of love and peace shall be with you.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 550 : 5-14

ईश्वर ही जीवन या बुद्धि है, जो जानवरों के साथ-साथ पुरुषों की व्यक्तित्व और पहचान को बनाता और संरक्षित करता है। भगवान परिमित नहीं हो सकता है, और भौतिक सीमा के भीतर सीमित हो सकता है। आत्मा न तो पदार्थ बन सकता है, न ही आत्मा इसके विपरीत विकसित हो सकती है। इस बात की जाँच करने के लिए कि भौतिक जीवन, जो समाप्त होता है, यहाँ तक कि जैसे ही यह शुरू होता है, यह सब कुछ क्या है? होने का वास्तविक अर्थ और इसकी शाश्वत पूर्णता अब दिखाई देनी चाहिए, भले ही यह उसके बाद भी हो।

1. 550 : 5-14

God is the Life, or intelligence, which forms and preserves the individuality and identity of animals as well as of men. God cannot become finite, and be limited within material bounds. Spirit cannot become matter, nor can Spirit be developed through its opposite. Of what avail is it to investigate what is miscalled material life, which ends, even as it begins, in nameless nothingness? The true sense of being and its eternal perfection should appear now, even as it will hereafter.

2. 302 : 14 (हमें करने दो)-24

... आइए याद रखें कि सामंजस्यपूर्ण और अमर आदमी हमेशा के लिए अस्तित्व में है, और किसी भी जीवन, पदार्थ और बुद्धि के नश्वर भ्रम से परे और हमेशा मौजूद है। यह कथन तथ्य पर आधारित है, काल्पनिक नहीं। मनुष्य के पूर्ण, यहाँ तक कि पिता के रूप में भी पूर्ण होने का विज्ञान बताता है, क्योंकि आध्यात्मिक मनुष्य का आत्मा या मन, ईश्वर है, जो सभी का दिव्य सिद्धांत है, और क्योंकि यह वास्तविक व्यक्ति आत्मा के बजाय आत्मा के नियम द्वारा शासित है, न कि पदार्थ के तथाकथित नियमों द्वारा।

2. 302 : 14 (let)-24

…let us remember that harmonious and immortal man has existed forever, and is always beyond and above the mortal illusion of any life, substance, and intelligence as existent in matter. This statement is based on fact, not fable. The Science of being reveals man as perfect, even as the Father is perfect, because the Soul, or Mind, of the spiritual man is God, the divine Principle of all being, and because this real man is governed by Soul instead of sense, by the law of Spirit, not by the so-called laws of matter.

3. 393 : 16-18

अपनी समझ में दृढ़ रहें कि दिव्य मन शासन करता है, और यह कि विज्ञान में मनुष्य ईश्वर की सरकार को दर्शाता है।

3. 393 : 16-18

Be firm in your understanding that the divine Mind governs, and that in Science man reflects God's government.

4. 14 : 1-11

यदि हम शरीर के साथ समझदार हैं और एक निगम, भौतिक व्यक्ति, जिसका कान हम प्राप्त करेंगे, के रूप में सर्वशक्तिमानता का सम्मान करते हैं, हम आत्मा के प्रदर्शन में "शरीर से अनुपस्थित" और "प्रभु के साथ उपस्थित" नहीं हैं। हम "दो स्वामी की सेवा नहीं कर सकते।" "प्रभु के साथ वर्तमान" होना, केवल भावनात्मक परमानंद या विश्वास नहीं है, बल्कि वास्तविक प्रदर्शन और जीवन की समझ है जैसा कि क्राइस्टियन साइंस में सामने आया है। "प्रभु के साथ" होना ईश्वर के कानून का पालन करना है, परमात्मा द्वारा पूर्ण रूप से शासित होना, - आत्मा द्वारा, पदार्थ द्वारा नहीं।

4. 14 : 1-11

If we are sensibly with the body and regard omnipotence as a corporeal, material person, whose ear we would gain, we are not "absent from the body" and "present with the Lord" in the demonstration of Spirit. We cannot "serve two masters." To be "present with the Lord" is to have, not mere emotional ecstasy or faith, but the actual demonstration and understanding of Life as revealed in Christian Science. To be "with the Lord" is to be in obedience to the law of God, to be absolutely governed by divine Love, — by Spirit, not by matter.

5. 261 : 31-23

हमें अच्छे और मानव जाति को याद करने में अपने शरीर को भूल जाना चाहिए। हर घंटे आदमी की अच्छी मांग, जिसमें होने की समस्या को हल करना। भलाई के प्रति समर्पण मनुष्य की ईश्वर पर निर्भरता को कम नहीं करता, बल्कि उसे बढ़ाता है। न तो अभिषेक परमेश्वर के प्रति मनुष्य के दायित्वों को कम करता है, बल्कि उनसे मिलने की सर्वोपरि आवश्यकता को दर्शाता है। क्रिश्चियन साइंस भगवान की पूर्णता से शून्य है, लेकिन यह उसे पूरी महिमा का वर्णन करता है। "बूढ़े आदमी को उसके कामों से दूर करने" के द्वारा, नश्वर "अमरता को पहिन लेते हैं।"

हम नश्वर विश्वास के उथलेपन में गोता लगाकर ईश्वर की रचना की प्रकृति और गुणवत्ता को थाह नहीं दे सकते। हमें जीवन में सत्य और भौतिकता को खोजने के अपने अथक स्पंदन को उलट देना चाहिए - और ईश्वर के अमर विचार के लिए नश्वर से ऊपर, भौतिक इंद्रियों की गवाही से ऊपर उठना होगा। ये स्पष्ट, उच्च विचार भगवान-जैसे मनुष्य को उसके अस्तित्व के पूर्ण केंद्र और सीमा तक पहुंचने के लिए प्रेरित करते हैं।

अय्यूब ने कहा: "मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;" पुरुष अय्यूब के विचार को प्रतिध्वनित करेंगे, जब पदार्थ का दर्द और सुख पूर्वसूचक होना बंद हो जाएगा। वे फिर जीवन और खुशी, खुशी और दुःख के झूठे अनुमान को छोड़ देंगे, और प्रेमपूर्वक आनंद प्राप्त करने, धैर्य से काम लेने और ईश्वर के विपरीत सभी को जीतने का आनंद प्राप्त करेंगे।

5. 261 : 31-23

We should forget our bodies in remembering good and the human race. Good demands of man every hour, in which to work out the problem of being. Consecration to good does not lessen man's dependence on God, but heightens it. Neither does consecration diminish man's obligations to God, but shows the paramount necessity of meeting them. Christian Science takes naught from the perfection of God, but it ascribes to Him the entire glory. By putting "off the old man with his deeds," mortals "put on immortality."

We cannot fathom the nature and quality of God's creation by diving into the shallows of mortal belief. We must reverse our feeble flutterings — our efforts to find life and truth in matter — and rise above the testimony of the material senses, above the mortal to the immortal idea of God. These clearer, higher views inspire the Godlike man to reach the absolute centre and circumference of his being.

Job said: "I have heard of Thee by the hearing of the ear: but now mine eye seeth Thee." Mortals will echo Job's thought, when the supposed pain and pleasure of matter cease to predominate. They will then drop the false estimate of life and happiness, of joy and sorrow, and attain the bliss of loving unselfishly, working patiently, and conquering all that is unlike God.

6. 231 : 20-2

अपने आप को पाप से श्रेष्ठ बनाने के लिए, क्योंकि परमेश्वर ने आपको इससे श्रेष्ठ बनाया है और मनुष्य को नियंत्रित करता है, सच्चा ज्ञान है। पाप से डरने के लिए प्रेम की शक्ति और ईश्वर के मनुष्य के संबंध में होने के दिव्य विज्ञान को गलत समझना है, - अपनी सरकार पर संदेह करना और उसकी सर्वशक्तिमान देखभाल पर अविश्वास करना। अपने आप को बीमारी और मौत से बेहतर पकड़ना भी उतना ही बुद्धिमानी है, और ईश्वरीय विज्ञान के अनुसार है। उनसे डरना असंभव है, जब आप भगवान को पूरी तरह से समझ लेते हैं और जानते हैं कि वे उनकी रचना का हिस्सा नहीं हैं।

मनुष्य, अपने निर्माता द्वारा शासित, जिसके पास कोई अन्य मन नहीं है, - इंजीलवादी के कथन पर लगाया गया है कि "सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न [दैवीय कथन] हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई," — पाप, बीमारी और मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

6. 231 : 20-2

To hold yourself superior to sin, because God made you superior to it and governs man, is true wisdom. To fear sin is to misunderstand the power of Love and the divine Science of being in man's relation to God, — to doubt His government and distrust His omnipotent care. To hold yourself superior to sickness and death is equally wise, and is in accordance with divine Science. To fear them is impossible, when you fully apprehend God and know that they are no part of His creation.

Man, governed by his Maker, having no other Mind, — planted on the Evangelist's statement that "all things were made by Him [the Word of God]; and without Him was not anything made that was made," — can triumph over sin, sickness, and death.

7. 259 : 6-14

दिव्य विज्ञान में, मनुष्य भगवान की सच्ची छवि है। मसीह यीशु में ईश्वरीय प्रकृति को सर्वश्रेष्ठ रूप से व्यक्त किया गया था, विचार जो मनुष्य को पतित, बीमार, पापी और मरने के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वैज्ञानिक होने और दैवीय उपचार की मसीह की समझ में एक आदर्श सिद्धांत और विचार शामिल हैं, पूर्ण ईश्वर और पूर्ण मनुष्य, विचार और प्रदर्शन के आधार के रूप में।

7. 259 : 6-14

In divine Science, man is the true image of God. The divine nature was best expressed in Christ Jesus, who threw upon mortals the truer reflection of God and lifted their lives higher than their poor thought-models would allow, — thoughts which presented man as fallen, sick, sinning, and dying. The Christlike understanding of scientific being and divine healing includes a perfect Principle and idea, — perfect God and perfect man, — as the basis of thought and demonstration.

8. 192 : 4-10

हम वैज्ञानिक हैं, केवल तभी जब हम उस पर अपनी निर्भरता छोड़ देते हैं जो असत्य है और सत्य को समझ लेते हैं। हम तब तक वैज्ञानिक नहीं हैं जब तक हम सब कुछ मसीह पर छोड़ नहीं देते। मानवीय विचार आध्यात्मिक नहीं हैं। वे कान की सुनवाई से, सिद्धांत के बजाय भौतिकता से, और अमर के बजाय नश्वर से आते हैं। आत्मा ईश्वर से अलग नहीं है। आत्मा ईश्वर है।

8. 192 : 4-10

We are Christian Scientists, only as we quit our reliance upon that which is false and grasp the true. We are not Christian Scientists until we leave all for Christ. Human opinions are not spiritual. They come from the hearing of the ear, from corporeality instead of from Principle, and from the mortal instead of from the immortal. Spirit is not separate from God. Spirit is God.

9. 99 : 23-29

सच्ची आध्यात्मिकता की शांत, मजबूत धाराएँ, जिनमें से अभिव्यक्तियाँ स्वास्थ्य, पवित्रता और आत्म-विनाश हैं, मानव अनुभव को गहरा करना चाहिए, जब तक कि भौतिक अस्तित्व की मान्यताओं को एक गंजेपन के रूप में नहीं देखा जाता है, और पाप, बीमारी, और मृत्यु ईश्वरीय आत्मा के वैज्ञानिक प्रदर्शन और परमेश्‍वर के आध्यात्मिक, सिद्ध इंसान को हमेशा के लिए जगह देते हैं।

9. 99 : 23-29

The calm, strong currents of true spirituality, the manifestations of which are health, purity, and self-immolation, must deepen human experience, until the beliefs of material existence are seen to be a bald imposition, and sin, disease, and death give everlasting place to the scientific demonstration of divine Spirit and to God's spiritual, perfect man.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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