रविवार 11 फ़रवरी, 2024



विषयआत्मा

SubjectSpirit

वर्ण पाठ: स्वर्ण पाठ: प्रेरितों के काम 27: 23

"क्योंकि परमेश्वर जिस का मैं हूं, और जिस की सेवा करता हूं, उसके स्वर्गदूत ने आज रात मेरे पास।"



Golden Text: Acts 27 : 23

For there stood by me this night the angel of God, whose I am, and whom I serve.




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उत्तरदायी अध्ययन: भजन संहिता 91: 1, 2, 9-11 • यशायाह 63: 7-9


1     जोपरमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।

2     मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।

9     हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,

10     इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु: ख तेरे डेरे के निकट आएगा॥

11     क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।

7     जितना उपकार यहोवा ने हम लोगों का किया अर्थात इस्राएल के घराने पर दया और अत्यन्त करूणा कर के उसने हम से जितनी भलाई, कि उस सब के अनुसार मैं यहोवा के करूणामय कामों का वर्णन और उसका गुणानुवाद करूंगा।

8     क्योंकि उसने कहा, नि: सन्देह ये मेरी प्रजा के लोग हैं, ऐसे लड़के हैं जो धोखा न देंगे; और वह उनका उद्धारकर्ता हो गया।

9     उनके सारे संकट में उसने भी कष्ट उठाया, और उसके सम्मुख रहने वाले दूत ने उनका उद्धार किया; प्रेम और कोमलता से उसने आप ही उन को छुड़ाया; उसने उन्हें उठाया और प्राचीनकाल से सदा उन्हें लिए फिरा।

Responsive Reading: Psalm 91 : 1, 2, 9-11Isaiah 63 : 7-9

1.     He that dwelleth in the secret place of the most High shall abide under the shadow of the Almighty.

2.     I will say of the Lord, He is my refuge and my fortress: my God; in him will I trust.

9.     Because thou hast made the Lord, which is my refuge, even the most High, thy habitation;

10.     There shall no evil befall thee, neither shall any plague come nigh thy dwelling.

11.     For he shall give his angels charge over thee, to keep thee in all thy ways.

7.     I will mention the lovingkindnesses of the Lord, and the praises of the Lord, according to all that the Lord hath bestowed on us, and the great goodness toward the house of Israel, which he hath bestowed on them according to his mercies, and according to the multitude of his lovingkindnesses.

8.     For he said, Surely they are my people, children that will not lie: so he was their Saviour.

9.     In all their affliction he was afflicted, and the angel of his presence saved them: in his love and in his pity he redeemed them; and he bare them, and carried them all the days of old.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. भजन संहिता 68: 17 (से:)

17     परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन हजारों हजार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्र स्थान में है।

1. Psalm 68 : 17 (to :)

17     The chariots of God are twenty thousand, even thousands of angels:

2. भजन संहिता 34: 1, 4, 7

1     मैंहर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।

2     मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।

7     यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।

2. Psalm 34 : 1, 4, 7

1     I will bless the Lord at all times: his praise shall continually be in my mouth.

4     I sought the Lord, and he heard me, and delivered me from all my fears.

7     The angel of the Lord encampeth round about them that fear him, and delivereth them.

3. प्रेरितों के काम 5: 12, 14-23, 25-29, 33-35 (से 1st,), 38 (रोकना), 39, 4

12     और प्रेरितों के हाथों से बहुत चिन्ह और अद्भुत काम लोगों के बीच में दिखाए जाते थे, (और वे सब एक चित्त होकर सुलैमान के ओसारे में इकट्ठे हुआ करते थे।

14     और विश्वास करने वाले बहुतेरे पुरूष और स्त्रियां प्रभु की कलीसिया में और भी अधिक आकर मिलते रहे।)

15     यहां तक कि लोग बीमारों को सड़कों पर ला लाकर, खाटों और खटोलों पर लिटा देते थे, कि जब पतरस आए, तो उस की छाया ही उन में से किसी पर पड़ जाए।

16     और यरूशलेम के आस पास के नगरों से भी बहुत लोग बीमारों और अशुद्ध आत्माओं के सताए हुओं का ला लाकर, इकट्ठे होते थे, और सब अच्छे कर दिए जाते थे॥

17     तब महायाजक और उसके सब साथी जो सदूकियों के पंथ के थे, डाह से भर कर उठे।

18     और प्रेरितों को पकड़कर बन्दीगृह में बन्द कर दिया।

19     परन्तु रात को प्रभु के एक स्वर्गदूत ने बन्दीगृह के द्वार खोलकर उन्हें बाहर लाकर कहा।

20     कि जाओ, मन्दिर में खड़े होकर, इस जीवन की सब बातें लोगों को सुनाओ।

21     वे यह सुनकर भोर होते ही मन्दिर में जाकर उपदेश देने लगे: परन्तु महायाजक और उसके साथियों ने आकर महासभा को और इस्त्राएलियों के सब पुरनियों को इकट्ठे किया, और बन्दीगृह में कहला भेजा कि उन्हें लाएं।

22     परन्तु प्यादों ने वहां पहुंचकर उन्हें बन्दीगृह में न पाया, और लौटकर संदेश दिया।

23     कि हम ने बन्दीगृह को बड़ी चौकसी से बन्द किया हुआ, और पहरे वालों को बाहर द्वारों पर खड़े हुए पाया; परन्तु जब खोला, तो भीतर कोई न मिला।

25     इतने में किसी ने आकर उन्हें बताया, कि देखो, जिन्हें तुम ने बन्दीगृह में बन्द रखा था, वे मनुष्य मन्दिर में खड़े हुए लोगों को उपदेश दे रहे हैं।

26     तब सरदार, प्यादों के साथ जाकर, उन्हें ले आया, परन्तु बरबस नहीं, क्योंकि वे लोगों से डरते थे, कि हमें पत्थरवाह न करें।

27     उन्होंने उन्हें फिर लाकर महासभा के साम्हने खड़ा कर दिया और महायाजक ने उन से पूछा।

28     क्या हम ने तुम्हें चिताकर आज्ञा न दी थी, कि तुम इस नाम से उपदेश न करना? तौभी देखो, तुम ने सारे यरूशलेम को अपने उपदेश से भर दिया है और उस व्यक्ति का लोहू हमारी गर्दन पर लाना चाहते हो।

29     तब पतरस और, और प्रेरितों ने उत्तर दिया, कि मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना ही कर्तव्य कर्म है।

33     यह सुनकर वे जल गए, और उन्हें मार डालना चाहा।

34     परन्तु गमलीएल नाम एक फरीसी ने जो व्यवस्थापक और सब लोगों में माननीय था, न्यायालय में खड़े होकर प्रेरितों को थोड़ी देर के लिये बाहर कर देने की आज्ञा दी।

35     तब उस ने कहा।

38     इन मनुष्यों से दूर ही रहो और उन से कुछ काम न रखो; क्योंकि यदि यह धर्म या काम मनुष्यों की ओर से हो तब तो मिट जाएगा।

39     परन्तु यदि परमेश्वर की ओर से है, तो तुम उन्हें कदापि मिटा न सकोगे; कहीं ऐसा न हो, कि तुम परमेश्वर से भी लड़ने वाले ठहरो।

42     और प्रति दिन मन्दिर में और घर घर में उपदेश करने, और इस बात का सुसमाचार सुनाने से, कि यीशु ही मसीह है न रूके॥

3. Acts 5 : 12, 14-23, 25-29, 33-35 (to 1st ,), 38 (Refrain), 39, 42

12     And by the hands of the apostles were many signs and wonders wrought among the people; (and they were all with one accord in Solomon’s porch.

14     And believers were the more added to the Lord, multitudes both of men and women.)

15     Insomuch that they brought forth the sick into the streets, and laid them on beds and couches, that at the least the shadow of Peter passing by might overshadow some of them.

16     There came also a multitude out of the cities round about unto Jerusalem, bringing sick folks, and them which were vexed with unclean spirits: and they were healed every one.

17     Then the high priest rose up, and all they that were with him, (which is the sect of the Sadducees,) and were filled with indignation,

18     And laid their hands on the apostles, and put them in the common prison.

19     But the angel of the Lord by night opened the prison doors, and brought them forth, and said,

20     Go, stand and speak in the temple to the people all the words of this life.

21     And when they heard that, they entered into the temple early in the morning, and taught. But the high priest came, and they that were with him, and called the council together, and all the senate of the children of Israel, and sent to the prison to have them brought.

22     But when the officers came, and found them not in the prison, they returned, and told,

23     Saying, The prison truly found we shut with all safety, and the keepers standing without before the doors: but when we had opened, we found no man within.

25     Then came one and told them, saying, Behold, the men whom ye put in prison are standing in the temple, and teaching the people.

26     Then went the captain with the officers, and brought them without violence: for they feared the people, lest they should have been stoned.

27     And when they had brought them, they set them before the council: and the high priest asked them,

28 Saying, Did not we straitly command you that ye should not teach in this name? and, behold, ye have filled Jerusalem with your doctrine, and intend to bring this man’s blood upon us.

29     Then Peter and the other apostles answered and said, We ought to obey God rather than men.

33     When they heard that, they were cut to the heart, and took counsel to slay them.

34     Then stood there up one in the council, a Pharisee, named Gamaliel, a doctor of the law, had in reputation among all the people, and commanded to put the apostles forth a little space;

35     And said unto them,

38     Refrain from these men, and let them alone: for if this counsel or this work be of men, it will come to nought:

39     But if it be of God, ye cannot overthrow it; lest haply ye be found even to fight against God.

42     And daily in the temple, and in every house, they ceased not to teach and preach Jesus Christ.

4. प्रेरितों के काम 12: 1-3 (से 1st.), 4, 5, 7-1

1     उस समय हेरोदेस राजा ने कलीसिया के कई एक व्यक्तियों को दुख देने के लिये उन पर हाथ डाले।

2     उस ने यूहन्ना के भाई याकूब को तलवार से मरवा डाला।

3     और जब उस ने देखा, कि यहूदी लोग इस से आनन्दित होते हैं, तो उस ने पतरस को भी पकड़ लिया: वे दिन अखमीरी रोटी के दिन थे।

4     और उस ने उसे पकड़ के बन्दीगृह में डाला, और रखवाली के लिये, चार चार सिपाहियों के चार पहरों में रखा: इस मनसा से कि फसह के बाद उसे लोगों के साम्हने लाए।

5     सो बन्दीगृह में पतरस की रखवाली हो रही थी; परन्तु कलीसिया उसके लिये लौ लगाकर परमेश्वर से प्रार्थना कर रही थी।

6     और जब हेरोदेस उसे उन के साम्हने लाने को था, तो उसी रात पतरस दो जंजीरों से बन्धा हुआ, दो सिपाहियों के बीच में सो रहा था: और पहरूए द्वार पर बन्दीगृह की रखवाली कर रहे थे।

7     तो देखो, प्रभु का एक स्वर्गदूत आ खड़ा हुआ: और उस कोठरी में ज्योति चमकी: और उस ने पतरस की पसली पर हाथ मार के उसे जगाया, और कहा; उठ, फुरती कर, और उसके हाथ से जंजीरें खुलकर गिर पड़ीं।

8     तब स्वर्गदूत ने उस से कहा; कमर बान्ध, और अपने जूते पहिन ले: उस ने वैसा ही किया, फिर उस ने उस से कहा; अपना वस्त्र पहिनकर मेरे पीछे हो ले।

9     वह निकलकर उसके पीछे हो लिया; परन्तु यह न जानता था, कि जो कुछ स्वर्गदूत कर रहा है, वह सचमुच है, वरन यह समझा, कि मैं दर्शन देख रहा हूं।

10     तब वे पहिल और दूसरे पहरे से निकलकर उस लोहे के फाटक पर पहुंचे, जो नगर की ओर है; वह उन के लिये आप से आप खुल गया: और वे निकलकर एक ही गली होकर गए, इतने में स्वर्गदूत उसे छोड़कर चला गया।

11     तब पतरस ने सचेत होकर कहा; अब मैं ने सच जान लिया कि प्रभु ने अपना स्वर्गदूत भेजकर मुझे हेरोदेस के हाथ से छुड़ा लिया, और यहूदियों की सारी आशा तोड़ दी।

4. Acts 12 : 1-3 (to 1st .), 4, 5, 7-11

1     Now about that time Herod the king stretched forth his hands to vex certain of the church.

2     And he killed James the brother of John with the sword.

3     And because he saw it pleased the Jews, he proceeded further to take Peter also.

4     And when he had apprehended him, he put him in prison, and delivered him to four quaternions of soldiers to keep him; intending after Easter to bring him forth to the people.

5     Peter therefore was kept in prison: but prayer was made without ceasing of the church unto God for him.

7     And, behold, the angel of the Lord came upon him, and a light shined in the prison: and he smote Peter on the side, and raised him up, saying, Arise up quickly. And his chains fell off from his hands.

8     And the angel said unto him, Gird thyself, and bind on thy sandals. And so he did. And he saith unto him, Cast thy garment about thee, and follow me.

9     And he went out, and followed him; and wist not that it was true which was done by the angel; but thought he saw a vision.

10     When they were past the first and the second ward, they came unto the iron gate that leadeth unto the city; which opened to them of his own accord: and they went out, and passed on through one street; and forthwith the angel departed from him.

11     And when Peter was come to himself, he said, Now I know of a surety, that the Lord hath sent his angel, and hath delivered me out of the hand of Herod, and from all the expectation of the people of the Jews.

5. 2 कुरिन्थियों 3: 4-6, 17

4     हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं।

5     यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है।

6     जिस ने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है।

17     प्रभु तो आत्मा है: और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है वहां स्वतंत्रता है।

5. II Corinthians 3 : 4-6, 17

4     And such trust have we through Christ to God-ward:

5     Not that we are sufficient of ourselves to think any thing as of ourselves; but our sufficiency is of God;

6     Who also hath made us able ministers of the new testament; not of the letter, but of the spirit: for the letter killeth, but the spirit giveth life.

17     Now the Lord is that Spirit: and where the Spirit of the Lord is, there is liberty.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 512: 8-16

आत्मा शक्ति, उपस्थिति, और शक्ति का प्रतीक है, और पवित्र विचारों द्वारा भी, प्रेम से युक्त है। उनकी उपस्थिति के ये देवदूत, जिनके पास सबसे पवित्र प्रभार है, मन के आध्यात्मिक वातावरण में प्रचुर मात्रा में है, और परिणामस्वरूप अपनी स्वयं की विशेषताओं को पुन: पेश करते हैं। उनके व्यक्तिगत रूप जिन्हें हम नहीं जानते, लेकिन हम जानते हैं कि उनके स्वभाव भगवान के स्वभाव से संबद्ध हैं; और आध्यात्मिक आशीर्वाद, इस प्रकार, बाहरी रूप से, अभी तक व्यक्तिपरक हैं, विश्वास और आध्यात्मिक समझ के राज्य हैं।

1. 512 : 8-16

Spirit is symbolized by strength, presence, and power, and also by holy thoughts, winged with Love. These angels of His presence, which have the holiest charge, abound in the spiritual atmosphere of Mind, and consequently reproduce their own characteristics. Their individual forms we know not, but we do know that their natures are allied to God's nature; and spiritual blessings, thus typified, are the externalized, yet subjective, states of faith and spiritual understanding.

2. 581: 4-7

स्वर्गदूतों। ईश्वर के विचार मनुष्य को पास करते हैं; आध्यात्मिक अंतर्ज्ञान, शुद्ध और परिपूर्ण; अच्छाई, पवित्रता, और अमरता की प्रेरणा, सभी बुराई, कामुकता और नश्वरता का प्रतिकार करती है।

2. 581 : 4-7

Angels. God's thoughts passing to man; spiritual intuitions, pure and perfect; the inspiration of goodness, purity, and immortality, counteracting all evil, sensuality, and mortality.

3. 298: 25-30

एन्जिल्स ईथरीकृत मनुष्य नहीं हैं, अपने पंखों में पशु गुणों को विकसित कर रहे हैं; लेकिन वे दिव्य आगंतुक हैं, आध्यात्मिक पर उड़ रहे हैं, भौतिक नहीं, पिनियन। देवदूत ईश्वर के शुद्ध विचार हैं, सत्य और प्रेम के पंख हैं, चाहे उनका व्यक्तिवाद कुछ भी हो।

3. 298 : 25-30

Angels are not etherealized human beings, evolving animal qualities in their wings; but they are celestial visitants, flying on spiritual, not material, pinions. Angels are pure thoughts from God, winged with Truth and Love, no matter what their individualism may be.

4. 299: 7-17

मेरे स्वर्गदूत अतिविशिष्ट विचार हैं, जो कुछ सेपुलचर के दरवाजे पर दिखाई देते हैं, जिसमें मानव विश्वास ने अपने सबसे प्यारे सांसारिक आशाओं को दफन कर दिया है। सफेद उंगलियों के साथ वे एक नए और गौरवशाली विश्वास की ओर इशारा करते हैं, जीवन के उच्च आदर्शों और इसकी खुशियों के लिए। देवदूत भगवान के प्रतिनिधि हैं। ये उर्ध्वगामी प्राणी कभी भी स्व, पाप, या भौतिकता की ओर नहीं जाते हैं, बल्कि सभी अच्छे लोगों के दिव्य सिद्धांत के लिए मार्गदर्शन करते हैं, जो हर वास्तविक व्यक्तित्व, छवि या भगवान की समानता को इकट्ठा करता है। बयाना देकर इन आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को ध्यान में रखते हुए वे हमारे साथ छेड़छाड़ करते हैं, और हम मनोरंजन करते हैं "स्वर्गदूतों।"

4. 299 : 7-17

My angels are exalted thoughts, appearing at the door of some sepulchre, in which human belief has buried its fondest earthly hopes. With white fingers they point upward to a new and glorified trust, to higher ideals of life and its joys. Angels are God's representatives. These upward-soaring beings never lead towards self, sin, or materiality, but guide to the divine Principle of all good, whither every real individuality, image, or likeness of God, gathers. By giving earnest heed to these spiritual guides they tarry with us, and we entertain "angels unawares."

5. 566: 29-8

पुराना नियम स्वर्गदूतों, परमेश्वर के दिव्य संदेशों, विभिन्न कार्यालयों को प्रदान करता है। माइकल की विशेषता आध्यात्मिक शक्ति है। वह पाप, शैतान की शक्ति के खिलाफ स्वर्ग के बहुरूपियों का नेतृत्व करता है और पवित्र युद्धों से लड़ता है। गेब्रियल के पास हमेशा प्यार की उपस्थिति की भावना प्रदान करने का अधिक शांत कार्य है। ये स्वर्गदूत हमें गहराई तक पहुँचाते हैं। सत्य और प्रेम, शोक की घड़ी में आते हैं, जब मजबूत विश्वास या आध्यात्मिक शक्ति कुश्ती और भगवान की समझ के माध्यम से प्रबल होती है। उनकी उपस्थिति के गेब्रियल में कोई प्रतियोगिता नहीं है। असीम, सदा-सदा के लिए, सब प्रेम है, और न कोई त्रुटि है, न कोई पाप, न बीमारी, न मृत्यु।

5. 566 : 29-8

The Old Testament assigns to the angels, God's divine messages, different offices. Michael's characteristic is spiritual strength. He leads the hosts of heaven against the power of sin, Satan, and fights the holy wars. Gabriel has the more quiet task of imparting a sense of the ever-presence of ministering Love. These angels deliver us from the depths. Truth and Love come nearer in the hour of woe, when strong faith or spiritual strength wrestles and prevails through the understanding of God. The Gabriel of His presence has no contests. To infinite, ever-present Love, all is Love, and there is no error, no sin, sickness, nor death.

6. 548: 9-13

जब बादल सूर्य के मुख को ढक लेते हैं तो हमारी पृथ्वी तक कितनी कम रोशनी या गर्मी पहुँचती है! इसलिए क्रिश्चियन साइंस को केवल तभी देखा जा सकता है जब भौतिक अर्थ के बादल छंट जाते हैं। जीवन को आध्यात्मिक रूप से सीखने से पहले पृथ्वी पर मनुष्यों के लिए बहुत कम रोशनी या खुशी है।

6. 548 : 9-13

How little light or heat reach our earth when clouds cover the sun's face! So Christian Science can be seen only as the clouds of corporeal sense roll away. Earth has little light or joy for mortals before Life is spiritually learned.

7. 8: 3 (से)-8

... ईसाई विज्ञान की ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए, मनुष्य को इसके दिव्य सिद्धांत का पालन करते हुए रहना होगा। इस विज्ञान की पूर्ण शक्ति विकसित करने के लिए, भौतिक इंद्रियों की विसंगतियों को आध्यात्मिक भावना के सामंजस्य के रूप में प्रस्तुत करना होगा, जैसे कि संगीत का विज्ञान गलत स्वरों को सही करता है और ध्वनि को मधुर सामंजस्य प्रदान करता है।

7. viii : 3 (to)-8

...to reach the heights of Christian Science, man must live in obedience to its divine Principle. To develop the full might of this Science, the discords of corporeal sense must yield to the harmony of spiritual sense, even as the science of music corrects false tones and gives sweet concord to sound.

8. 298: 8-24

जिसे भौतिक इन्द्रिय कहा जाता है, वह केवल वस्तुओं के नश्वर अस्थायी बोध की सूचना दे सकता है, जबकि आध्यात्मिक इन्द्रिय केवल सत्य की गवाही दे सकता है। भौतिक अर्थों के लिए, असत्य तब तक वास्तविक है जब तक कि इस भावना को ईसाई विज्ञान द्वारा ठीक नहीं किया जाता है।

भौतिक इंद्रियों के विपरीत आध्यात्मिक भावना में अंतर्ज्ञान, आशा, विश्वास, समझ, फल, वास्तविकता शामिल है। भौतिक भावना इस विश्वास को व्यक्त करती है कि मन पदार्थ में है। सुख और दर्द, आशा और भय, जीवन और मृत्यु के बीच बारी-बारी से यह मानवीय विश्वास कभी भी नश्वर या असत्य की सीमा से परे नहीं पहुंचता है। जब वास्तविक को प्राप्त कर लिया जाता है, जिसकी घोषणा विज्ञान द्वारा की जाती है, तो आनंद अब कांपता नहीं है, न ही आशा धोखा है। संख्या और नोट्स जैसे आध्यात्मिक विचार, सिद्धांत से शुरू होते हैं, और कोई भौतिकवादी विश्वास स्वीकार नहीं करते हैं। आध्यात्मिक विचार उनके दिव्य मूल, ईश्वर और होने की आध्यात्मिक भावना की ओर ले जाते हैं।

8. 298 : 8-24

What is termed material sense can report only a mortal temporary sense of things, whereas spiritual sense can bear witness only to Truth. To material sense, the unreal is the real until this sense is corrected by Christian Science.

Spiritual sense, contradicting the material senses, involves intuition, hope, faith, understanding, fruition, reality. Material sense expresses the belief that mind is in matter. This human belief, alternating between a sense of pleasure and pain, hope and fear, life and death, never reaches beyond the boundary of the mortal or the unreal. When the real is attained, which is announced by Science, joy is no longer a trembler, nor is hope a cheat. Spiritual ideas, like numbers and notes, start from Principle, and admit no materialistic beliefs. Spiritual ideas lead up to their divine origin, God, and to the spiritual sense of being.

9. 505: 16-21

आत्मा उस समझ को प्रदान करती है जो चेतना को बढ़ाती है और सभी सत्य की ओर ले जाती है। भजनहार कहता है: "महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है॥" आध्यात्मिक भावना आध्यात्मिक अच्छाई की समझ है।

9. 505 : 16-21

Spirit imparts the understanding which uplifts consciousness and leads into all truth. The Psalmist saith: "The Lord on high is mightier than the noise of many waters, yea, than the mighty waves of the sea." Spiritual sense is the discernment of spiritual good.

10. 224: 22-4

एक उच्च और अधिक व्यावहारिक ईसाई धर्म, न्याय का प्रदर्शन और बीमारी और स्वास्थ्य में नश्वर लोगों की जरूरतों को पूरा करता है, इस उम्र के द्वार पर प्रवेश के लिए दस्तक देता है। क्या आप इस स्वर्गदूत पर दरवाजा खोलेंगे या बंद करेंगे, जो नम्रता के साथ शांत होकर आएंगे, क्योंकि वह दोपहर को बूढ़े के पिता के पास आया था?

सत्य स्वतंत्रता के तत्वों को लाता है। इसके बैनर पर आत्मा से प्रेरित आदर्श वाक्य है, "गुलामी को समाप्त कर दिया गया है।" भगवान की शक्ति कैद में उद्धार लाता है। कोई भी शक्ति दिव्य प्रेम का सामना नहीं कर सकती। यह कौन सी शक्ति है, जो स्वयं ईश्वर का विरोध करती है? यह किसके साथ आता है? वह कौन सी चीज है जो मनुष्य को पाप, बीमारी और मृत्यु के लिए लोहे की छड़ से बांधती है? जो कुछ भी मनुष्य को गुलाम बनाता है वह ईश्वरीय सरकार का विरोध करता है. सत्य ही मनुष्य को मुक्त बनाता है।

10. 224 : 22-4

A higher and more practical Christianity, demonstrating justice and meeting the needs of mortals in sickness and in health, stands at the door of this age, knocking for admission. Will you open or close the door upon this angel visitant, who cometh in the quiet of meekness, as he came of old to the patriarch at noonday?

Truth brings the elements of liberty. On its banner is the Soul-inspired motto, "Slavery is abolished." The power of God brings deliverance to the captive. No power can withstand divine Love. What is this supposed power, which opposes itself to God? Whence cometh it? What is it that binds man with iron shackles to sin, sickness, and death? Whatever enslaves man is opposed to the divine government. Truth makes man free.

11. 227: 14-26

मनुष्य के अधिकारों को त्यागकर, हम सभी उत्पीड़न के विनाश को दूर करने में विफल नहीं हो सकते। गुलामी मनुष्य की वैध स्थिति नहीं है। ईश्वर ने मनुष्य को स्वतंत्र किया। पाल ने कहा, "मैं आज़ाद पैदा हुआ था।" सभी पुरुषों को स्वतंत्र होना चाहिए। "जहां कहीं प्रभु का आत्मा है, वहां स्वतंत्रता है।" प्रेम और सत्य मुक्त करते हैं, लेकिन बुराई और त्रुटि पुरुषों को कैद में ले जाती है।

क्रिश्चियन साइंस स्वतंत्रता और रोने के मानक को बढ़ाता है: "मेरे पीछे आओ! बीमारी, पाप, और मृत्यु के बंधन से बचो! ” यीशु ने रास्ता चिह्नित किया। दुनिया के नागरिक, "परमेश्वर के बच्चों की शानदार स्वतंत्रता" स्वीकार करें और मुक्त रहें! यह तुम्हारा दिव्य अधिकार है।

11. 227 : 14-26

Discerning the rights of man, we cannot fail to foresee the doom of all oppression. Slavery is not the legitimate state of man. God made man free. Paul said, "I was free born." All men should be free. "Where the Spirit of the Lord is, there is liberty." Love and Truth make free, but evil and error lead into captivity.

Christian Science raises the standard of liberty and cries: "Follow me! Escape from the bondage of sickness, sin, and death!" Jesus marked out the way. Citizens of the world, accept the "glorious liberty of the children of God," and be free! This is your divine right.

12. 223: 2-6

पाल ने कहा, "आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।" जल्दी या बाद में हमें पता चलेगा कि मनुष्य की परिमित क्षमता के भ्रूण को इस भ्रम से मजबूर किया जाता है कि वह आत्मा के बजाय आत्मा के स्थान पर शरीर में रहता है।

12. 223 : 2-6

Paul said, "Walk in the Spirit, and ye shall not fulfil the lust of the flesh." Sooner or later we shall learn that the fetters of man's finite capacity are forged by the illusion that he lives in body instead of in Soul, in matter instead of in Spirit.

13. 481: 2-6

मनुष्य ईश्वर, आत्मा, और कुछ नहीं के लिए सहायक है। ईश्वर का होना अनंत, स्वतंत्रता, सद्भाव और असीम आनंद है। "और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है वहां स्वतंत्रता है।" योर के द्वीपसमूह की तरह, मनुष्य स्वतंत्र है "पवित्रतम में प्रवेश करने के लिए," - भगवान का क्षेत्र।

13. 481 : 2-6

Man is tributary to God, Spirit, and to nothing else. God's being is infinity, freedom, harmony, and boundless bliss. "Where the Spirit of the Lord is, there is liberty." Like the archpriests of yore, man is free "to enter into the holiest," — the realm of God.

14. 521: 12-17

मनुष्य की समरसता और अमरता बरकरार है। हमें इस विपरीत धारणा से दूर देखना चाहिए कि मनुष्य भौतिक रूप से बनाया गया है, और हमारी निगाहें सृष्टि के आध्यात्मिक रिकॉर्ड की ओर मोड़ें, जिसे समझ और दिल पर "हीरे की नोक से" और एक स्वर्गदूत की कलम पर उकेरा जाना चाहिए।

14. 521 : 12-17

The harmony and immortality of man are intact. We should look away from the opposite supposition that man is created materially, and turn our gaze to the spiritual record of creation, to that which should be engraved on the understanding and heart "with the point of a diamond" and the pen of an angel.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6