रविवार 1 दिसंबर, 2019 |

रविवार 1 दिसंबर, 2019



विषयप्राचीन और आधुनिक काला जादू, उपनाम कृत्रिम निद्रावस्था और हाइपोहान

SubjectAncient and Modern Necromancy, Alias Mesmerism and Hypnotism, Denounced

वर्ण पाठ: यशायाह 9 : 6

प्रभुता उसके कांधे पर होग



Golden Text: Isaiah 9 : 6

The government shall be upon his shoulder.




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यशायाह 1 : 9, 10 • यिर्मयाह 23: 1-5


9     यदि सेनाओं का यहोवा हमारे थोड़े से लोगों को न बचा रखता, तो हम सदोम के समान हो जाते, और अमोरा के समान ठहरते॥

10     हे सदोम के न्याइयों, यहोवा का वचन सुनो! हे अमोरा की प्रजा, हमारे परमेश्वर की शिक्षा पर कान लगा।

1     उन चरवाहों पर हाय जो मेरी चराई की भेड़-बकरियों को तितर-बितर करते ओर नाश करते हैं, यहोवा यह कहता है।

2     इसलिये इस्राएल का परमेश्वर यहोवा अपनी प्रजा के चरवाहों से यों कहता है, तुम ने मेरी भेड़-बकरियों की सुधि नहीं ली, वरन उन को तितर-बितर किया और बरबस निकाल दिया है, इस कारण यहोवा की यह वाणी है कि मैं तुम्हारे बुरे कामों का दण्ड दूंगा।

3     तब मेरी भेड़-बकरियां जो बची हैं, उन को मैं उन सब देशों में से जिन में मैं ने उन्हें बरबस भेज दिया है, स्वयं ही उन्हें लौटा लाकर उन्हीं की भेड़शाला में इकट्ठा करूंगा, और वे फिर फूलें-फलेंगी।

4     मैं उनके लिये ऐसे चरवाहे नियुक्त करूंगा जो उन्हें चराएंगे; और तब वे न तो फिर डरेंगी, न विस्मित होंगी और न उन में से कोई खो जाएंगी, यहोवा की यह वाणी है।

5     यहोवा की यह भी वाणी है, देख ऐसे दिन आते हैं जब मैं दाऊद के कुल में एक धमीं अंकुर उगाऊंगा, और वह राजा बनकर बुद्धि से राज्य करेगा, और अपने देश में न्याय और धर्म से प्रभुता करेगा।

Responsive Reading: Isaiah 1 : 9, 10; Jeremiah 23 : 1-5

9.     Except the Lord of hosts had left unto us a very small remnant, we should have been as Sodom, and we should have been like unto Gomorrah.

10.     Hear the word of the Lord, ye rulers of Sodom; give ear unto the law of our God, ye people of Gomorrah.

1.     Woe be unto the pastors that destroy and scatter the sheep of my pasture! saith the Lord.

2.     Therefore thus saith the Lord God of Israel against the pastors that feed my people; Ye have scattered my flock, and driven them away, and have not visited them: behold, I will visit upon you the evil of your doings, saith the Lord.

3.     And I will gather the remnant of my flock out of all countries whither I have driven them, and will bring them again to their folds; and they shall be fruitful and increase.

4.     And I will set up shepherds over them which shall feed them: and they shall fear no more, nor be dismayed, neither shall they be lacking, saith the Lord.

5.     Behold, the days come, saith the Lord, that I will raise unto David a righteous Branch, and a King shall reign and prosper, and shall execute judgment and justice in the earth.



पाठ उपदेश



बाइबल


1. भजन संहिता 7 : 10

10     मेरी ढाल परमेश्वर के हाथ में है, वह सीधे मन वालों को बचाता है॥

1. Psalm 7 : 10

10     My defence is of God, which saveth the upright in heart.

2. अय्यूब 5: 8-13, 15, 19-24 (से ;)

8     परन्तु मैं तो ईश्वर ही को खोजता रहूंगा और अपना मुक़द्दमा परमेश्वर पर छोड़ दूंगा।

9     वह तो एसे बड़े काम करता है जिनकी थाह नहीं लगती, और इतने आश्चर्यकर्म करता है, जो गिने नहीं जाते।

10     वही पृथ्वी के ऊपर वर्षा करता, और खेतों पर जल बरसाता है।

11     इसी रीति वह नम्र लोगों को ऊंचे स्थान पर बिठाता है, और शोक का पहिरावा पहिने हुए लोग ऊंचे पर पहुँचकर बचते हैं।

12     वह तो धूर्त्त लोगों की कल्पनाएं व्यर्थ कर देता है, और उनके हाथों से कुछ भी बन नहीं पड़ता।

13     वह बुद्धिमानों को उनकी धूर्त्तता ही में फंसाता है; और कुटिल लोगों की युक्ति दूर की जाती है।

15     परन्तु वह दरिद्रों को उनके वचनरुपी तलवार से और बलवानों के हाथ से बचाता है।

19     वह तुझे छ: विपत्तियों से छुड़ाएगा; वरन सात से भी तेरी कुछ हानि न होने पाएगी।

20     अकाल में वह तुझे मुत्यु से, और युद्ध में तलवार की धार से बचा लेगा।

21     तू वचनरूपी कोड़े से बचा रहेगा और जब विनाश आए, तब भी तुझे भय न होगा।

22     तू उजाड़ और अकाल के दिनों में हँसमुख रहेगा, और तुझे बनैले जन्तुओं से डर न लगेगा।

23     वरन मैदान के पत्थर भी तुझ से वाचा बान्धे रहेंगे, और वनपशु तुझ से मेल रखेंगे।

24     और तुझे निश्चय होगा, कि तेरा डेरा कुशल से है।

2. Job 5 : 8-13, 15, 19-24 (to ;)

8     I would seek unto God, and unto God would I commit my cause:

9     Which doeth great things and unsearchable; marvellous things without number:

10     Who giveth rain upon the earth, and sendeth waters upon the fields:

11     To set up on high those that be low; that those which mourn may be exalted to safety.

12     He disappointeth the devices of the crafty, so that their hands cannot perform their enterprise.

13     He taketh the wise in their own craftiness: and the counsel of the froward is carried headlong.

15     But he saveth the poor from the sword, from their mouth, and from the hand of the mighty.

19     He shall deliver thee in six troubles: yea, in seven there shall no evil touch thee.

20     In famine he shall redeem thee from death: and in war from the power of the sword.

21     Thou shalt be hid from the scourge of the tongue: neither shalt thou be afraid of destruction when it cometh.

22     At destruction and famine thou shalt laugh: neither shalt thou be afraid of the beasts of the earth.

23     For thou shalt be in league with the stones of the field: and the beasts of the field shall be at peace with thee.

24     And thou shalt know that thy tabernacle shall be in peace;

3. यशायाह 50 : 7 (से ,), 10

7     क्योंकि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है, इस कारण मैं ने संकोच नहीं किया; वरन अपना माथा चकमक की नाईं कड़ा किया।

10     तुम में से कौन है जो यहोवा का भय मानता और उसके दास की बातें सुनता है, जो अन्धियारे में चलता हो और उसके पास ज्योति न हो? वह यहोवा के नाम का भरोसा रखे, और अपने परमेश्वर पर आशा लगाए रहे।

3. Isaiah 50 : 7 (to ,), 10

7     For the Lord God will help me; therefore shall I not be confounded: therefore have I set my face like a flint,

10     Who is among you that feareth the Lord, that obeyeth the voice of his servant, that walketh in darkness, and hath no light? let him trust in the name of the Lord, and stay upon his God.

4. II इतिहास 15 : 1-4, 7, 8, 12, 14, 15, 19

1     तब परमेश्वर का आत्मा ओदेद के पुत्र अजर्याह में समा गया,

2     और वह आसा से भेंट करने निकला, और उस से कहा, हे आसा, और हे सारे यहूदा और बिन्यामीन मेरी सुनो, जब तक तुम यहोवा के संग रहोगे तब तक वह तुम्हारे संग रहेगा; और यदि तुम उसकी खोज में लगे रहो, तब तो वह तुम से मिला करेगा, परन्तु यदि तुम उसको त्याग दोगे तो वह भी तुम को त्याग देगा।

3     बहुत दिन इस्राएल बिना सत्य परमेश्वर के और बिना सिखाने वाले याजक के और बिना व्यवस्था के रहा।

4     परन्तु जब जब वे संकट में पड़ कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर फिरे और उसको ढूंढ़ा, तब तब वह उन को मिला।

7     परन्तु तुम लोग हियाव बान्धो और तुम्हारे हाथ ढीले न पड़ें, क्योंकि तुम्हारे काम का बदला मिलेगा।

8     जब आसा ने ये वचन और ओदेद नबी की नबूवत सुनी, तब उसने हियाव बान्ध कर यहूदा और बिन्यामीन के सारे देश में से, और उन नगरों में से भी जो उसने एप्रैम के पहाड़ी देश में ले लिये थे, सब घिनौनी वस्तुएं दूर कीं, और यहोवा की जो वेदी यहोवा के ओसारे के साम्हने थी, उसको नये सिरे से बनाया।

12     और उन्होंने वाचा बान्धी कि हम अपने पूरे मन और सारे जीव से अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा की खोज करेंगे।

14     और उन्होंने जयजयकार के साथ तुरहियां और नरसिंगे बजाते हुए ऊंचे शब्द से यहोवा की शपथ खाई।

15     और यह शपथ खाकर सब यहूदी आनन्दित हुए, क्योंकि उन्होंने अपने सारे मन से शपथ खाई और बडी अभिलाषा से उसको ढूंढ़ा और वह उन को मिला, और यहोवा ने चारों ओर से उन्हें विश्राम दिया।

19     और राजा आसा के राज्य के पैंतीसवें वर्ष तक फिर लड़ाई न हुई।

4. II Chronicles 15 : 1-4, 7, 8, 12, 14, 15, 19

1     And the Spirit of God came upon Azariah the son of Oded:

2     And he went out to meet Asa, and said unto him, Hear ye me, Asa, and all Judah and Benjamin; The Lord is with you, while ye be with him; and if ye seek him, he will be found of you; but if ye forsake him, he will forsake you.

3     Now for a long season Israel hath been without the true God, and without a teaching priest, and without law.

4     But when they in their trouble did turn unto the Lord God of Israel, and sought him, he was found of them.

7     Be ye strong therefore, and let not your hands be weak: for your work shall be rewarded.

8     And when Asa heard these words, and the prophecy of Oded the prophet, he took courage, and put away the abominable idols out of all the land of Judah and Benjamin, and out of the cities which he had taken from mount Ephraim, and renewed the altar of the Lord, that was before the porch of the Lord.

12     And they entered into a covenant to seek the Lord God of their fathers with all their heart and with all their soul;

14     And they sware unto the Lord with a loud voice, and with shouting, and with trumpets, and with cornets.

15     And all Judah rejoiced at the oath: for they had sworn with all their heart, and sought him with their whole desire; and he was found of them: and the Lord gave them rest round about.

19     And there was no more war unto the five and thirtieth year of the reign of Asa.

5. भजन संहिता 2 : 1-4, 10, 11

1     जाति जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश देश के लोग व्यर्थ बातें क्यों सोच रहे हैं?

2     यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरूद्ध पृथ्वी के राजा मिलकर, और हाकिम आपस में सम्मति करके कहते हैं, कि

3     आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, और उनकी रस्सियों अपने ऊपर से उतार फेंके॥

4     वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हंसेगा, प्रभु उन को ठट्ठों में उड़ाएगा।

10     इसलिये अब, हे राजाओं, बुद्धिमान बनो; हे पृथ्वी के न्यायियों, यह उपदेश ग्रहण करो।

11     डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपते हुए मगन हो।

5. Psalm 2 : 1-4, 10, 11

1     Why do the heathen rage, and the people imagine a vain thing?

2     The kings of the earth set themselves, and the rulers take counsel together, against the Lord, and against his anointed, saying,

3     Let us break their bands asunder, and cast away their cords from us.

4     He that sitteth in the heavens shall laugh: the Lord shall have them in derision.

10     Be wise now therefore, O ye kings: be instructed, ye judges of the earth.

11     Serve the Lord with fear, and rejoice with trembling.

6. भजन संहिता 75 : 6, 7, 10

6     क्योंकि बढ़ती न तो पूरब से न पच्छिम से, और न जंगल की ओर से आती है;

7     परन्तु परमेश्वर ही न्यायी है, वह एक को घटाता और दूसरे को बढ़ाता है।

10     दुष्टों के सब सींगों को मैं काट डालूंगा, परन्तु धर्मी के सींग ऊंचे किए जाएंगे।

6. Psalm 75 : 6, 7, 10

6     For promotion cometh neither from the east, nor from the west, nor from the south.

7     But God is the judge: he putteth down one, and setteth up another.

10     All the horns of the wicked also will I cut off; but the horns of the righteous shall be exalted.

7. II कुरिन्थियों 10 : 4, 5

4     क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।

5     सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्डन करते हैं; और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं।

7. II Corinthians 10 : 4, 5

4     (For the weapons of our warfare are not carnal, but mighty through God to the pulling down of strong holds;)

5     Casting down imaginations, and every high thing that exalteth itself against the knowledge of God, and bringing into captivity every thought to the obedience of Christ;

8. II तीमुथियुस 3 : 1, 2, 4, 5, 14-17

1     पर यह जान रख, कि अन्तिम दिनों में कठिन समय आएंगे।

2     क्योंकि मनुष्य अपस्वार्थी, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता-पिता की आज्ञा टालने वाले, कृतघ्न, अपवित्र।

4     विश्वासघाती, ढीठ, घमण्डी, और परमेश्वर के नहीं वरन सुखविलास ही के चाहने वाले होंगे।

5     वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना।

14     पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था

15     और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।

16     हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है।

17     ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए॥

8. II Timothy 3 : 1, 2, 4, 5, 14-17

1     This know also, that in the last days perilous times shall come.

2     For men shall be lovers of their own selves, covetous, boasters, proud, blasphemers, disobedient to parents, unthankful, unholy,

4     Traitors, heady, highminded, lovers of pleasures more than lovers of God;

5     Having a form of godliness, but denying the power thereof: from such turn away.

14     But continue thou in the things which thou hast learned and hast been assured of, knowing of whom thou hast learned them;

15     And that from a child thou hast known the holy scriptures, which are able to make thee wise unto salvation through faith which is in Christ Jesus.

16     All scripture is given by inspiration of God, and is profitable for doctrine, for reproof, for correction, for instruction in righteousness:

17     That the man of God may be perfect, throughly furnished unto all good works.

9. II तीमुथियुस 4 : 18

18     और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्वर्गीय राज्य में उद्धार कर के पहुंचाएगा: उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन॥

9. II Timothy 4 : 18

18     And the Lord shall deliver me from every evil work, and will preserve me unto his heavenly kingdom: to whom be glory for ever and ever. Amen.



विज्ञान और स्वास्थ्य


1. 7 : 13-21

विचारकों का समय आ गया है। सत्य, सिद्धांतों और समय-सम्मानित प्रणालियों से स्वतंत्र, मानवता के द्वार पर दस्तक देता है। अतीत के साथ संतोष और भौतिकवाद की ठंडी परम्परा के बीच टकराव कम हो रहा है। भगवान की अज्ञानता अब विश्वास के रास्ते का पत्थर नहीं है। आज्ञाकारिता का एकमात्र ज़मानता उसी की एक सही आशंका है जिसे जानने के लिए जीवन अनन्त है। यद्यपि साम्राज्य गिरते हैं, "प्रभु हमेशा के लिए शासन करेंगे।"

1. vii : 13-21

The time for thinkers has come. Truth, independent of doctrines and time-honored systems, knocks at the portal of humanity. Contentment with the past and the cold conventionality of materialism are crumbling away. Ignorance of God is no longer the stepping-stone to faith. The only guarantee of obedience is a right apprehension of Him whom to know aright is Life eternal. Though empires fall, "the Lord shall reign forever."

2. 106 : 6-14

हमारे देश की तरह, क्राइस्टियन साइंस में स्वतंत्रता की घोषणा है। ईश्वर ने मनुष्य को अहिंसात्मक अधिकारों के साथ संपन्न किया है, जिनमें से आत्मनिर्भरता, कारण और विवेक हैं। मनुष्य तभी ठीक से आत्मनिर्भर होता है जब उसे सही तरीके से निर्देशित किया जाता है और उसके निर्माता, दिव्य सत्य और प्रेम द्वारा शासित होता है।

मनुष्य के अधिकारों पर आक्रमण किया जाता है जब दैवीय आदेश में हस्तक्षेप किया जाता है, और मानसिक अतिचार इस अपराध के कारण ईश्वरीय दंड को लागू करता है।

2. 106 : 6-14

Like our nation, Christian Science has its Declaration of Independence. God has endowed man with inalienable rights, among which are self-government, reason, and conscience. Man is properly self-governed only when he is guided rightly and governed by his Maker, divine Truth and Love.

Man's rights are invaded when the divine order is interfered with, and the mental trespasser incurs the divine penalty due this crime.

3. 100 : 1-6

कृत्रिम निद्रावस्था या पशु चुंबकत्व को पहली बार जर्मनी में मेस्मर द्वारा 1775 में लाया गया था। अमेरिकी साइक्लोपीडिया के अनुसार, उन्होंने इस तथाकथित बल पर विचार किया, जो उन्होंने कहा कि बीमारी को कम करने के साधन के रूप में एक से अधिक जीवित जीवों द्वारा किया जा सकता है।

3. 100 : 1-6

MESMERISM or animal magnetism was first brought into notice by Mesmer in Germany in 1775. According to the American Cyclopædia, he regarded this so-called force, which he said could be exerted by one living organism over another, as a means of alleviating disease.

4. 101 : 21-25, 29-32

पशु चुंबकत्व के कामकाज के लेखक की अपनी टिप्पणियों ने उसे समझा दिया कि यह एक उपचारात्मक एजेंट नहीं है, और इसका प्रभाव उन पर है जो इसका अभ्यास करते हैं, और उनके विषयों पर जो इसका विरोध नहीं करते हैं, नैतिक और शारीरिक मृत्यु का कारण बनते हैं।

किसी भी उदाहरण में पशु चुंबकत्व का प्रभाव नहीं है, जिसे भ्रम के प्रभाव के अलावा हाल ही में हिप्नोटिज्म कहा जाता है। इससे प्राप्त होने वाला कोई भी लाभ गूढ़ जादू में किसी के विश्वास के समानुपाती होता है।

4. 101 : 21-25, 29-32

The author's own observations of the workings of animal magnetism convince her that it is not a remedial agent, and that its effects upon those who practise it, and upon their subjects who do not resist it, lead to moral and to physical death. 

In no instance is the effect of animal magnetism, recently called hypnotism, other than the effect of illusion. Any seeming benefit derived from it is proportional to one's faith in esoteric magic.

5. 102 : 1-8, 16-23, 30-2

पशु चुंबकत्व के पास कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, क्योंकि भगवान सभी को नियंत्रित करता है जो वास्तविक, सामंजस्यपूर्ण और शाश्वत है, और उनकी शक्ति न तो पशु है और न ही मानव। विज्ञान पशु चुंबकत्व, मेस्मेरिज्म, या हिप्नोटिज्म में एक विश्वास और इस विश्वास जानवर होने का आधार एक नकारात्मकता है, जिसमें न तो बुद्धि, शक्ति, न ही वास्तविकता है, और इस अर्थ में यह तथाकथित नश्वर मन की एक अवास्तविक अवधारणा है।

पशु चुंबकत्व के हल्के रूप गायब हो रहे हैं, और इसकी आक्रामक विशेषताएं सामने आ रही हैं। अपराध के करघे, नश्वर विचार के अंधेरे अवकाश में छिपे हुए हैं, हर घंटे बुनाई जाले अधिक जटिल और सूक्ष्म हैं। इसलिए रहस्य पशु चुंबकत्व की वर्तमान विधियां हैं कि वे उम्र को अकर्मण्यता में बदल देते हैं, और उस विषय पर बहुत उदासीनता उत्पन्न करते हैं जो आपराधिक इच्छा करता है।

मानव जाति को सीखना चाहिए कि बुराई शक्ति नहीं है। इसकी तथाकथित निरंकुशता है, लेकिन कुछ भी नहीं है। क्रिश्चियन साइंस बुराई के साम्राज्य को दूर करता है, और पूर्व में परिवारों में और इसलिए समुदाय में स्नेह और सदाचार को बढ़ावा देता है।

5. 102 : 1-8, 16-23, 30-2

Animal magnetism has no scientific foundation, for God governs all that is real, harmonious, and eternal, and His power is neither animal nor human. Its basis being a belief and this belief animal, in Science animal magnetism, mesmerism, or hypnotism is a mere negation, possessing neither intelligence, power, nor reality, and in sense it is an unreal concept of the so-called mortal mind.

The mild forms of animal magnetism are disappearing, and its aggressive features are coming to the front. The looms of crime, hidden in the dark recesses of mortal thought, are every hour weaving webs more complicated and subtle. So secret are the present methods of animal magnetism that they ensnare the age into indolence, and produce the very apathy on the subject which the criminal desires.

Mankind must learn that evil is not power. Its so-called despotism is but a phase of nothingness. Christian Science despoils the kingdom of evil, and pre-eminently promotes affection and virtue in families and therefore in the community.

6. 103 : 18-24

जैसा कि क्राइस्टियन साइंस में नाम दिया गया है, पशु चुंबकत्व या हिप्नोटिज्म त्रुटि, या नश्वर मन के लिए विशिष्ट शब्द है। यह गलत धारणा है कि मन पदार्थ में है, और यह बुराई और अच्छा दोनों है; यह बुराई उतनी ही वास्तविक है जितनी अच्छी और अधिक शक्तिशाली। इस विश्वास में सत्य का एक गुण नहीं है। यह या तो अज्ञानी है या दुर्भावनापूर्ण। हिप्नोटिज्म का दुर्भावनापूर्ण रूप नैतिक मूर्खता में बदल जाता है।

6. 103 : 18-24

As named in Christian Science, animal magnetism or hypnotism is the specific term for error, or mortal mind. It is the false belief that mind is in matter, and is both evil and good; that evil is as real as good and more powerful. This belief has not one quality of Truth. It is either ignorant or malicious. The malicious form of hypnotism ultimates in moral idiocy.

7. 273 : 29-3

विज्ञान दिखाता है कि सामग्री, परस्पर विरोधी नश्वर राय और विश्वास हर समय त्रुटि के प्रभावों का उत्सर्जन करते हैं, लेकिन यह नश्वर मन का वातावरण नैतिक और स्वास्थ्य के लिए विनाशकारी नहीं हो सकता है जब यह क्राइस्टच्यून साइंस द्वारा तुरंत और लगातार विरोध किया जाता है। ट्रुथ एंड लव इस मानसिक माया का प्रतिकार करता है, और इस प्रकार अस्तित्व और अस्तित्व को बनाए रखता है।

7. 273 : 29-3

Science shows that material, conflicting mortal opinions and beliefs emit the effects of error at all times, but this atmosphere of mortal mind cannot be destructive to morals and health when it is opposed promptly and persistently by Christian Science. Truth and Love antidote this mental miasma, and thus invigorate and sustain existence.

8. 94 : 12-16

पूर्वी साम्राज्यों और राष्ट्रों ने अपनी झूठी सरकार को वहां प्रचलित देवता की गलत धारणाओं के कारण दिया। अत्याचार, असहिष्णुता, और रक्तपात, जहाँ भी पाया जाता है, इस विश्वास से उत्पन्न होता है कि अनंत का निर्माण नश्वर व्यक्तित्व, जुनून और आवेग के पैटर्न के बाद होता है।

8. 94 : 12-16

The eastern empires and nations owe their false government to the misconceptions of Deity there prevalent. Tyranny, intolerance, and bloodshed, wherever found, arise from the belief that the infinite is formed after the pattern of mortal personality, passion, and impulse. 

9. 224 : 11-12, 22-31 (से 2nd .)

उन्नीस शताब्दियों के रिकॉर्ड में, कई संप्रदाय हैं लेकिन पर्याप्त ईसाई धर्म नहीं हैं।

एक उच्च और अधिक व्यावहारिक ईसाई धर्म, न्याय का प्रदर्शन और बीमारी और स्वास्थ्य में नश्वर लोगों की जरूरतों को पूरा करता है, इस उम्र के द्वार पर प्रवेश के लिए दस्तक देता है। क्या आप इस स्वर्गदूत पर दरवाजा खोलेंगे या बंद करेंगे, जो नम्रता के साथ शांत होकर आएंगे, क्योंकि वह दोपहर को बूढ़े के पिता के पास आया था?

सत्य स्वतंत्रता के तत्वों को लाता है। इसके बैनर पर आत्मा से प्रेरित आदर्श वाक्य है, "गुलामी को समाप्त कर दिया गया है।" भगवान की शक्ति कैद में उद्धार लाता है। कोई भी शक्ति दिव्य प्रेम का सामना नहीं कर सकती।

9. 224 : 11-12, 22-31 (to 2nd .)

In the record of nineteen centuries, there are sects many but not enough Christianity.

A higher and more practical Christianity, demonstrating justice and meeting the needs of mortals in sickness and in health, stands at the door of this age, knocking for admission. Will you open or close the door upon this angel visitant, who cometh in the quiet of meekness, as he came of old to the patriarch at noonday?

Truth brings the elements of liberty. On its banner is the Soul-inspired motto, "Slavery is abolished." The power of God brings deliverance to the captive. No power can withstand divine Love.

10. 225 : 5-22

आप जान सकते हैं कि पहला सत्य अपने अनुयायियों की पवित्रता और ईमानदारी से कब आगे बढ़ता है। इस प्रकार यह है कि समय की स्वतंत्रता के बैनर पर मार्च का आयोजन होता है। इस दुनिया की शक्तियाँ लड़ेंगी, और अपने प्रहरी को आज्ञा देंगी कि जब तक वह अपने सिस्टम की सदस्यता न ले, तब तक सच्चाई को पहरा न दें; लेकिन नुकीले चाकू की ओर ध्यान न देकर विज्ञान मार्च करता है। हमेशा कुछ खटपट होती है, लेकिन सच्चाई के मानक के लिए एक रैली है।

हमारे देश का इतिहास, सभी इतिहास की तरह, माइंड की ताकत को दर्शाता है, और मानव शक्ति को सही सोच के अवतार के रूप में दिखाता है। कुछ अमर वाक्य, दिव्य न्याय की सर्वशक्तिमानता को सांस लेते हुए, निरंकुश भ्रूणों को तोड़ने और कोड़े मारने वाली पोस्ट और दास बाजार को खत्म करने के लिए शक्तिशाली हैं; लेकिन जुल्म न तो खून में गिरा, न ही तोप के मुंह से आजादी की सांस आई। प्रेम ही मुक्तिदाता है।

10. 225 : 5-22

You may know when first Truth leads by the fewness and faithfulness of its followers. Thus it is that the march of time bears onward freedom's banner. The powers of this world will fight, and will command their sentinels not to let truth pass the guard until it subscribes to their systems; but Science, heeding not the pointed bayonet, marches on. There is always some tumult, but there is a rallying to truth's standard.

The history of our country, like all history, illustrates the might of Mind, and shows human power to be proportionate to its embodiment of right thinking. A few immortal sentences, breathing the omnipotence of divine justice, have been potent to break despotic fetters and abolish the whipping-post and slave market; but oppression neither went down in blood, nor did the breath of freedom come from the cannon's mouth. Love is the liberator.

11. 96 : 12-20, 25-27, 31-4

यह भौतिक दुनिया अब भी परस्पर विरोधी ताकतों के लिए अखाड़ा बन रही है। एक तरफ कलह और निराशा होगी; दूसरी तरफ विज्ञान और शांति होगी। भौतिक विश्वासों का टूटना अकाल और महामारी, चाहत और शोक, पाप, बीमारी और मृत्यु के रूप में प्रतीत हो सकता है, जो तब तक नए चरणों को मानते हैं जब तक कि उनका कुछ भी दिखाई नहीं देता। ये गड़बड़ी त्रुटि के अंत तक जारी रहेगी, जब सभी कलह को आध्यात्मिक सत्य में निगल लिया जाएगा।

जैसे-जैसे यह अंतर्ग्रहण समीप आता जाता है, वह दिव्य विज्ञान के अनुसार अपने पाठ्यक्रम को आकार देता गया है।

इस अंतिम संघर्ष के दौरान, दुष्ट दिमाग ऐसे साधनों को खोजने का प्रयास करेगा जिनके द्वारा अधिक बुराई को पूरा किया जा सके; लेकिन जो लोग क्रिश्चियन साइंस को समझते हैं, वे अपराध को रोकेंगे। वे त्रुटि की अस्वीकृति में सहायता करेंगे। वे कानून और व्यवस्था बनाए रखेंगे और आनंदपूर्वक परम पूर्णता की निश्चितता का इंतजार करेंगे।

11. 96 : 12-20, 25-27, 31-4

This material world is even now becoming the arena for conflicting forces. On one side there will be discord and dismay; on the other side there will be Science and peace. The breaking up of material beliefs may seem to be famine and pestilence, want and woe, sin, sickness, and death, which assume new phases until their nothingness appears. These disturbances will continue until the end of error, when all discord will be swallowed up in spiritual Truth. 

As this consummation draws nearer, he who has shaped his course in accordance with divine Science will endure to the end.

During this final conflict, wicked minds will endeavor to find means by which to accomplish more evil; but those who discern Christian Science will hold crime in check. They will aid in the ejection of error. They will maintain law and order, and cheerfully await the certainty of ultimate perfection.


दैनिक कर्तव्यों

मैरी बेकर एड्डी द्वारा

दैनिक प्रार्थना

प्रत्येक दिन प्रार्थना करने के लिए इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य होगा: "तुम्हारा राज्य आओ;" ईश्वरीय सत्य, जीवन और प्रेम के शासन को मुझमें स्थापित करो, और मुझ पर शासन करो; और तेरा वचन सभी मनुष्यों के स्नेह को समृद्ध कर सकता है, और उन पर शासन करो!

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 4

उद्देश्यों और कृत्यों के लिए एक नियम

न तो दुश्मनी और न ही व्यक्तिगत लगाव मदर चर्च के सदस्यों के उद्देश्यों या कृत्यों को लागू करना चाहिए। विज्ञान में, दिव्य प्रेम ही मनुष्य को नियंत्रित करता है; और एक क्रिश्चियन साइंटिस्ट प्यार की मीठी सुविधाओं को दर्शाता है, पाप में डांटने पर, सच्चा भाईचारा, परोपकार और क्षमा में। इस चर्च के सदस्यों को प्रतिदिन ध्यान रखना चाहिए और प्रार्थना को सभी बुराईयों से दूर करने, भविष्यद्वाणी, न्याय करने, निंदा करने, परामर्श देने, प्रभावित करने या गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 1

कर्तव्य के प्रति सतर्कता

इस चर्च के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिदिन आक्रामक मानसिक सुझाव से बचाव करे, और भूलकर भी ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, अपने नेता और मानव जाति के लिए। उनके कामों से उन्हें आंका जाएगा, — और वह उचित या निंदनीय होगा।

चर्च मैनुअल, लेख VIII, अनुभाग 6


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